राजस्थान के सभी सार्वजनिक स्थल, स्कूल, कॉलेज को डिसेबल फ्रेंडली बनाएँ

समस्या

  1.  
  2. मेरा नाम प्रिया शर्मा है। मुझे सेरेब्ल पाल्सी   नामक बीमारी है। जिस कारण मुझे व्हीलचेयर का उपयोग करना पड़ता हैं।ज़िंदगी के हर एक पड़ाव में मुझे तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, क्यूँकि ज़्यादातर सार्वजनिक स्थल, स्कूल, कॉलेज, विकलांग व्यक्तियों के लिए समावेशी नहीं है।

मैं चाहती हूँ मुझे और देश के हर विकलांग व्यक्ति को अपने सपने साकार करने का समान अवसर मिले। मेरी पेटीशन साइन करें और मेरे राज्य, राजस्थान को डिसेबल फ़्रेंड्ली बनाने की माँग में मेरे साथ जुड़ें।

"दिव्यांग"

यह जो शब्द है ना इसका मतलब है एक दिव्य शरीर। यह नाम हमें हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी ने दिसंबर 2015 में दिया था और हमें विकलांग से दिव्यांग बनाया था। उनका मानना है हमारे पास एक दिव्य शरीर है, एक दिव्य सोच है, जो हमें सामन्य लोगों से अलग करती है। हम बहुत कुछ कर सकते है पर क्या सिर्फ एक नाम बदलने से हम सबकुछ कर सकते है? नहीं, कभी नहीं। हमें विकलांग से दिव्यांग बनाया हमें बहुत अच्छा लगा लेकिन हमारे लिए और भी बहुत कुछ बदलना होगा जो बहुत ज्यादा जरूरी है। मैंने घर से ही सारी पढाई की 10वीं, 12वीं, BA, MA, NET exam qualify किया है और 5-6 प्रतियोगी परीक्षाएं दी। इन सारी परीक्षाओं में मुझे जो परेशानियां आई उनके बारे में सरकार को बताना चाहती हूँ। इन परेशानियों का सामना मेरे जैसे कई दिव्यांगो ने किया होगा। हमेशा, हर जगह किया होगा। पर अब बस, अब और नहीं! जब हम दिव्यांग है हमारे पास एक दिव्य शरीर है एक दिव्य सोच है तो हमें ऐसी परेशानी को क्यू झेलना पड़ता है?

मुझे आजतक किसी भी कॉलेज में किसी भी स्कूल में व्हीलचेयर और रैंप नही मिला। हर जगह बहुत सी सीढियां दिखी। मुझे क्लास में जाने के लिए 4-5 लोगों की जरूरत पड़ती है, बहुत मुश्किल से क्लास तक जा पाती हूँ। ऐसे समय में बहुत बुरा लगता है, क्या इसलिए हम दिव्यांग है?

कोई भी सार्वजनिक जगह ले लो, कोई गार्डन, कोई ऐतिहासिक जगह, कोई सिनेमा हॉल, कोई रेलवे स्टेशन ,कोई बस स्टॉप, कोई धार्मिक जगह, कोई भी गुमने फिरने की जगह शायद ही बहुत कम या ना के बराबर ही डिसएबल फ्रेंडली मिलेंगी

मैं पूछती हूं कि हमे यह सारी परेशानियां क्यू झेलनी पड़ती हैं? सिर्फ इसलिए कि हम लोग दिव्यांग है? इस बात की सजा मिलती हैं क्या हमें? माफ कीजिए पर नाम बदल देने से कुछ पेंशन देने से और आरक्षण देने से हमारी स्थिति नहीं बदलेगी। 

अब बदलाव जरुरी है, और ये बदलाव मैं अपने राज्य राजस्थान से शुरू होते देखना चाहती हूँ। इन सारी जगहों को डिसेबल फ्रेंडली बनाओ और इन सब खर्चों के लिया एक दिव्यांग कोष बनाओ। यही होगा हमारे लिए असली सम्मान और तब कहलाएंगे हम सही अर्थों में "दिव्यांग"।

मुझे सम्मान नही चाहिए, मैं चाहती हूँ हमारी स्थिति बदले। ये पेटीशन साइन कर के मेरी यह बात सरकार तक पहुँचाएँ, ये मेरा विनम्र निवेदन है।

avatar of the starter
Priya Sharmaपेटीशन स्टार्टरI am Priya Sharma i am from Jaipur (Rajasthan) my qualification is Post graduation and I have a NET certificate also and I have been selected in SSC CHSL also I want to disable friendly Rajasthan

2,005

समस्या

  1.  
  2. मेरा नाम प्रिया शर्मा है। मुझे सेरेब्ल पाल्सी   नामक बीमारी है। जिस कारण मुझे व्हीलचेयर का उपयोग करना पड़ता हैं।ज़िंदगी के हर एक पड़ाव में मुझे तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, क्यूँकि ज़्यादातर सार्वजनिक स्थल, स्कूल, कॉलेज, विकलांग व्यक्तियों के लिए समावेशी नहीं है।

मैं चाहती हूँ मुझे और देश के हर विकलांग व्यक्ति को अपने सपने साकार करने का समान अवसर मिले। मेरी पेटीशन साइन करें और मेरे राज्य, राजस्थान को डिसेबल फ़्रेंड्ली बनाने की माँग में मेरे साथ जुड़ें।

"दिव्यांग"

यह जो शब्द है ना इसका मतलब है एक दिव्य शरीर। यह नाम हमें हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी जी ने दिसंबर 2015 में दिया था और हमें विकलांग से दिव्यांग बनाया था। उनका मानना है हमारे पास एक दिव्य शरीर है, एक दिव्य सोच है, जो हमें सामन्य लोगों से अलग करती है। हम बहुत कुछ कर सकते है पर क्या सिर्फ एक नाम बदलने से हम सबकुछ कर सकते है? नहीं, कभी नहीं। हमें विकलांग से दिव्यांग बनाया हमें बहुत अच्छा लगा लेकिन हमारे लिए और भी बहुत कुछ बदलना होगा जो बहुत ज्यादा जरूरी है। मैंने घर से ही सारी पढाई की 10वीं, 12वीं, BA, MA, NET exam qualify किया है और 5-6 प्रतियोगी परीक्षाएं दी। इन सारी परीक्षाओं में मुझे जो परेशानियां आई उनके बारे में सरकार को बताना चाहती हूँ। इन परेशानियों का सामना मेरे जैसे कई दिव्यांगो ने किया होगा। हमेशा, हर जगह किया होगा। पर अब बस, अब और नहीं! जब हम दिव्यांग है हमारे पास एक दिव्य शरीर है एक दिव्य सोच है तो हमें ऐसी परेशानी को क्यू झेलना पड़ता है?

मुझे आजतक किसी भी कॉलेज में किसी भी स्कूल में व्हीलचेयर और रैंप नही मिला। हर जगह बहुत सी सीढियां दिखी। मुझे क्लास में जाने के लिए 4-5 लोगों की जरूरत पड़ती है, बहुत मुश्किल से क्लास तक जा पाती हूँ। ऐसे समय में बहुत बुरा लगता है, क्या इसलिए हम दिव्यांग है?

कोई भी सार्वजनिक जगह ले लो, कोई गार्डन, कोई ऐतिहासिक जगह, कोई सिनेमा हॉल, कोई रेलवे स्टेशन ,कोई बस स्टॉप, कोई धार्मिक जगह, कोई भी गुमने फिरने की जगह शायद ही बहुत कम या ना के बराबर ही डिसएबल फ्रेंडली मिलेंगी

मैं पूछती हूं कि हमे यह सारी परेशानियां क्यू झेलनी पड़ती हैं? सिर्फ इसलिए कि हम लोग दिव्यांग है? इस बात की सजा मिलती हैं क्या हमें? माफ कीजिए पर नाम बदल देने से कुछ पेंशन देने से और आरक्षण देने से हमारी स्थिति नहीं बदलेगी। 

अब बदलाव जरुरी है, और ये बदलाव मैं अपने राज्य राजस्थान से शुरू होते देखना चाहती हूँ। इन सारी जगहों को डिसेबल फ्रेंडली बनाओ और इन सब खर्चों के लिया एक दिव्यांग कोष बनाओ। यही होगा हमारे लिए असली सम्मान और तब कहलाएंगे हम सही अर्थों में "दिव्यांग"।

मुझे सम्मान नही चाहिए, मैं चाहती हूँ हमारी स्थिति बदले। ये पेटीशन साइन कर के मेरी यह बात सरकार तक पहुँचाएँ, ये मेरा विनम्र निवेदन है।

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फैसला लेने वाले

विशेष योग्यजन आयुक्त श्री उमाशंकर जी शर्मा राजस्थान सरकार
विशेष योग्यजन आयुक्त श्री उमाशंकर जी शर्मा राजस्थान सरकार
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