

रैयतों की जमीन और रैयत ही बेदखल
समस्या
ये एक आम आदमी की बहुत बड़ी समस्या है. जिसका निवारण केवल और केवल संबंधित उच्च पदस्थ पदाधिकारी ही कर सकते हैं. ग्रामीण रैयत जो कई पीढियों से अपने जमीन की जुताई - कोडाई करता आ रहा है आज अपने ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है. कुछ दबंग प्रकृति के लोग जिनका सांठ-गांठ प्रशासनिक पदाधिकारियों तथा अन्य सम्बंधित विभागों में होता है. विभाग के कर्मचारी एवं पदाधिकारी से मिल कर जमीन के कागजातों में छेड़-छाड़ करवाते हैं और जमीन के असली मालिक को उसी के जमीन से बेदखल कर देते हैं . ऐसे कई मामले सामने आये हैं. अभी हाल ही में रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत बाजरा मौजा में भी रैयतों की जमींन हड़पने का मामला सामने आया है जिसमें रांची के उपायुक्त की भी मिलीभगत बताया जा रहा है. ये इनलोगों के लिए बहुत ही आम बात हैं . क्यूंकि बेचारे रैयतों की शिकायत पर न तो पुलिस करवाई करती है न तो विभागीय पदाधिकारी ही इनकी बात सुनते हैं. वो सुनेगे भी तो कैसे ये कारनामा तो इनकी मिलीभगत के बगैर तो हो ही नही सकता. इस खेल में काफी बड़े लोग शामिल होते हैं और करोड़ो अरबों का खेल होता है. भला एक आम आदमी जिसको खाने और पहनने के लिए पैसे नही है वो भला इनकी बराबरी करे भी तो कैसे. एक आम आदमी कर सकता है तो बस अपनी मेहनत की कमी का एक हिस्सा सरकारी खजाने में डाल कर सरकारी कर्मचारियों के वेतन-भत्ते का इन्तिज़ाम कर सकता है. बदले उसे क्या मिलेगा सरकारी कर्मचारियों से दुर्व्यहार, उनकी निजी सम्पतियों का दोहन. ये समस्या इतनी गंभीर है कि अबतक कई जाने भी जा चुकी हैं और यदि कुछ नही किया गया तो स्थिति और भी बद्तर हो जाएगी. इस राज्य को भूमाफिया के चंगुल से छुड़ाने के लिए एक विस्तृत आन्दोलन की जरुरत है. माननीय मुख्यमंत्री से निवेदन है कि इस मामले में अपनी चुप्पी छोड़ें और आम जनता का भला करें. और आम जनता अपने अधिकारों को जानें और उसके लिए लड़ना पड़े तो लड़े भी.

समस्या
ये एक आम आदमी की बहुत बड़ी समस्या है. जिसका निवारण केवल और केवल संबंधित उच्च पदस्थ पदाधिकारी ही कर सकते हैं. ग्रामीण रैयत जो कई पीढियों से अपने जमीन की जुताई - कोडाई करता आ रहा है आज अपने ही जमीन से बेदखल किया जा रहा है. कुछ दबंग प्रकृति के लोग जिनका सांठ-गांठ प्रशासनिक पदाधिकारियों तथा अन्य सम्बंधित विभागों में होता है. विभाग के कर्मचारी एवं पदाधिकारी से मिल कर जमीन के कागजातों में छेड़-छाड़ करवाते हैं और जमीन के असली मालिक को उसी के जमीन से बेदखल कर देते हैं . ऐसे कई मामले सामने आये हैं. अभी हाल ही में रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत बाजरा मौजा में भी रैयतों की जमींन हड़पने का मामला सामने आया है जिसमें रांची के उपायुक्त की भी मिलीभगत बताया जा रहा है. ये इनलोगों के लिए बहुत ही आम बात हैं . क्यूंकि बेचारे रैयतों की शिकायत पर न तो पुलिस करवाई करती है न तो विभागीय पदाधिकारी ही इनकी बात सुनते हैं. वो सुनेगे भी तो कैसे ये कारनामा तो इनकी मिलीभगत के बगैर तो हो ही नही सकता. इस खेल में काफी बड़े लोग शामिल होते हैं और करोड़ो अरबों का खेल होता है. भला एक आम आदमी जिसको खाने और पहनने के लिए पैसे नही है वो भला इनकी बराबरी करे भी तो कैसे. एक आम आदमी कर सकता है तो बस अपनी मेहनत की कमी का एक हिस्सा सरकारी खजाने में डाल कर सरकारी कर्मचारियों के वेतन-भत्ते का इन्तिज़ाम कर सकता है. बदले उसे क्या मिलेगा सरकारी कर्मचारियों से दुर्व्यहार, उनकी निजी सम्पतियों का दोहन. ये समस्या इतनी गंभीर है कि अबतक कई जाने भी जा चुकी हैं और यदि कुछ नही किया गया तो स्थिति और भी बद्तर हो जाएगी. इस राज्य को भूमाफिया के चंगुल से छुड़ाने के लिए एक विस्तृत आन्दोलन की जरुरत है. माननीय मुख्यमंत्री से निवेदन है कि इस मामले में अपनी चुप्पी छोड़ें और आम जनता का भला करें. और आम जनता अपने अधिकारों को जानें और उसके लिए लड़ना पड़े तो लड़े भी.

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16 जुलाई 2021 पर पेटीशन बनाई गई