के वाई सी नहीं होने के कारण एम एफ डी का उपार्जित शुल्क का भुगतान नहीं रूकना चाहिए ।

यह पेटीशन 72 हस्ताक्षर जुट गई

समस्या

  • भारत में प्रतिभूति बाजार एवं मिचुअल फंड में निवेश हेतु एक देश एक निवेशक एक के वाई सी  की ब्यवस्था लागू होने के पश्चात निवेश के पहले निवेशक कि के वाई सी होना आवश्यक हो गया है और सेबी ने समस्थ मिचुअल फंड प्रबंधक ए एम सी को निर्देशित किया है कि वो अपने उन निवेशों की पहचान करें जिन पर निवेशक की के वाई सी नहीं है और यह भी निर्देशित किया है कि ऐसे निवेशकों के निवेश पर किसी भी प्रकार का लेन-देन बिना के वाई सी के संपन्न नहीं हो । यहां तक तो बात सही है पर आगे निर्देशों का विस्तार,  के वाई सी विहीन निवेश पर मिचुअलफंड वितरक के ट्रेल फीस के भुगतान पर रोक, तक अनुचित रूप से फैला दिया गया है। गौरतलब है कि 1996 तक पैन नंबर , बैंक खाता नंबर, मोबाइल तो तब था ही नहीं , फोन नंबर, ई-मेल एड्रेस आदि निवेश हेतु आवश्यक नहीं था । उस वक्त के दौरान यदि किसी मिचुअलफंड वितरक ने निवेश कराया था और आगे उस निवेश पर निगरानी निवेशक की नहीं रहा और निवेशक, वितरक से बिछड़ गया जिसके कारण अब के वाई सी छुटा हुआ है , के लिए मिचुअल फंड वितरक दोषी कैसे हो सकता है ? 
  • निवेशक अपने वितरक से बिछड़ गया और अपने निवेश को भुल भी गया तो इसके लिए वितरक को दण्डित नहीं किया जाए  और उसके द्वारा कराए गए निवेश पर उपार्जित शुल्क का भुगतान उसे नियमित रूप से किया जाए ।
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Shiv Shankar Vaishnawपेटीशन स्टार्टरशिक्षा : बी.काम. , एल. एल. बी. ब्यवसाय : वयैक्तिक वित्तीय सलाहकार

फैसला लेने वाले

भारत के राष्ट्रपति
भारत के राष्ट्रपति
वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)

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