
Bineet JhaMumbai, Indien
10.12.2018
जागु मैथिल जागु
“ पाबि मनुष्यक देह रहब जा घाड खसौने, बनि कायर पुनि अपन पूर्वजक नाम हंसौने ।
ताबत दुस्मन दशो दिशासँ रहत दबौने, सुख स्वतन्त्रता हेतु रहब एहिना मुँह बौने ।।
पायब किछु अधिकार कतहु की बिना झगड़ने ? अछि सलाइमे आगि, बरत की बिना रगड़ने?
बिसरय जे निज रूप तकर जग मे की सेखी ? बकरीक डरे पडाय सिंह, सरकस मे देखी॥ “
- पंडित सीताराम झा क अमर रचना आइयो ओतबे प्रासंगिक थीक हमरा सभक लेल
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