पृथक मिथिला राज्य का निर्माण

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समस्या

मिथिला राज्य का निर्माण क्यों :

१. आर्थिक पिछड़ेपन का उन्मूलन ।

 २. बाढ़ एवम सुखार का स्थायी निदान ।

३. मैथिली भाषा एवम लिपि का संरक्षण एवम संवर्धन।

४. पलायन पर रोक।

५. बंद उद्योगों का परिचालन ।

६. लघु एवम कुटीर उद्योग का विकास ।

७. शिक्षा एवम स्वास्थ्य सेवा का विकास (IIT, IIM , AIIMS की स्थापना ) ।

८. मिथिला की सांस्कृतिक , आर्थिक , भाषायी अस्तित्व का संरक्षण, संवर्धन एवम समेकित विकास।

९. पान , मत्स्य , मखाना एवम मिथिला पेंटिंग को उद्योग का दर्जा ।

१०. पर्यटन का विकास। 

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पृथक मिथिला राज्य का निर्माण -एक पृष्ठभूमि:

१.स्वतंत्रता पूर्व ईस्ट इंडिया कंपनी १८१६ में नेपाली गोरखा राजा के साथ मिलकर , मिथिला को लुट का माल समझकर दो भागों में बांटकर लगभग पाँच हज़ार वर्ग मील सुगौली संधि के तहत नेपाल को दे दिया। इस प्रकार मिथिला के ह्रदय का विभाजन हो गया। २००० ई. मे जब  झारखण्ड राज्य का निर्माण हुआ तो मिथिला का कुछ भाग झारखण्ड में चला गया और पुनः मिथिला का  दोबारा विभाजन हो गया।

२.स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी मिथिला लगातार सरकारी उपेक्षा और उदासीनता का शिकार रही है।

३.जल प्रबंधन के अभाव में प्रति वर्ष मिथिला बाढ़ की विनाशलीला को झेलती है या सुखार से पीड़ित रहती है। जान माल की भारी क्षति होती है । कृषि उद्योग समाप्ति के कगार पर है।मज़दूर और किसान पलायन को मजबूर हैं।

४.मिथिला में उद्योग शून्य पर है।चीनी मील , पेपर मील , जुट मील , लघु एवम कुटीर उद्योग बंद हो चुके हैं। रोज़गार की संभावनाएँ नगण्य है।

५.बिहार की ३८ ज़िला में से लगभग २१ ज़िला मिथिला क्षेत्र से आते हैं जबकि एक भी उच्च तकनीकी संस्थान ( IIT,IIM,AIMS) नहीं है। शिक्षा आौर स्वास्थ्य की हालत बद से बदतर है।जिसके लिए लोग देश के कोने कोने में भटकने को मजबूर हैं।

६.शिक्षा,स्वास्थ्य एवम रोज़गार के लिए देश के दूसरे भाग मे पलायन को मजबूर हैं। वहाँ भी उपेक्षा का दंश झेलने को विवश हैं।

७.भारत की प्राचीनतम भाषाओं में एक मैथिली, जनक नंदनी सीता की भाषा मैथिली, विश्व की पचास सर्वाधिक बोली जानी वाली भाषाओं मे शामिल मैथिली, साहित्य अकादमी में १९६५ ई. से प्रतिष्ठित मैथिली,संविधान के अष्टम अनुसूची में २००३ ई. से शामिल मैथिली, ज्योतिश्वर ठाकुर
,विदयापति , चन्दा झा, मणिपदम , लोरिक, सलेहेस , दिनाभदरी, दुलरादयाल , नैका वंजारा, नागार्जुन , फजलुर रहमान हाशमी , नाजिम रिजवी की भाषा मैथिली, लगभग छह करोड़ से अधिक मैथिलों की भाषा मैथिली, किसान , मज़दूर और ग्रामीण माँ , बहन की एकमात्र भाषा मैथिली , आज विहार में द्वितीय राजभाषा के रूप में शामिल नहीं है।प्राथमिक शिक्षा का माध्यम नहीं है।भाषा विकास एवम लिपि संरक्षण , संवर्धन की कोई व्यवस्था नहीं है।
इसके बाद भी शांति के पुजारी मैथिल मौन हैं , स्तब्ध हैं, नि:शब्द हैं। उपेक्षा, निराशा, हताशा का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है?

अत: मिथिला की आर्थिक , सांस्कृतिक , राजनीतिक,  भाषायी अस्तित्व , अस्मिता का संरक्षण और संवर्धन के लिए एकमात्र विकल्प :

“ पृथक मिथिला राज्य का निर्माण “

हमारा लक्ष्य है:-
१. एकमात्र संकल्प ध्यान में , मिथिला राज्य
हो संविधान में ।
२. भीख नही अधिकार चाहिये , हमको
मिथिला राज्य चाहिये ।
३. हमको चाहिये अपना ताज , हमको
चाहिये अपना राज्य।

निवेदन :
माननीय प्रधानमंत्री , अध्यक्ष संसद (लोकसभा ,
राज्यसभा), मुख्यमंत्री विहार , अध्यक्ष (विधानसभा ,
विधानपरिषद) से विनम्र आग्रह है कि अविलंव प्रस्ताव
पारित कर मिथिला राज्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त
करने का कष्ट करें।
मिथिला सदैव इनका आभारी रहेगा।

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Bineet Jhaपेटीशन स्टार्टर" मिथिला राज्य अभियानी "

फैसला लेने वाले

बिहार के मुख्यमंत्री
बिहार के मुख्यमंत्री
Hon. Chief Minister of Bihar
भारत के प्रधानमंत्री
भारत के प्रधानमंत्री
Hon. Prime Minister of India
भारतीय संसद
भारतीय संसद
Hon. Speakers ( LS and RS )
विहार विधानसभा, विधान परिषद
विहार विधानसभा, विधान परिषद
माननीय अध्यक्ष ( विहार विधान सभा एवं विधान परिषद )

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