

ज.न.वि. विदिशा के बच्चों के चहुँमुखी विकास में आ रही बाधाओं के समाधान के लिए।
समस्या
हाल के समय में नवोदय विद्यालयों से जुड़ी देश के कई हिस्सों से कई घटनाएं सामने आ रहीं हैं और जिनमें अधिकतर दुर्घटनाएं ही हैं। नवोदय विद्यालय यानी हमारा दूसरा घर। फिलहाल ऐसे ही कुछ घटनाक्रम की जानकारी लगातार आ रही है, JNV शमशाबाद(विदिशा) से। ये वही विद्यालय है जिसके बच्चों ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियाँ हासिल कीं। केमिस्ट्री, में बारहवीं का सब्जेक्ट एवरेज CBSE में राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल आना आम बात थी। और खो-खो में सैकड़ों बच्चे SGFI और national स्तर पर नाम कमा चुके। और मैं खुद भी इसी विद्यालय से पढ़कर निकला हूँ ।
फिलहाल इसकी हालत भी बद से बदतर होती जा रही है। जैसे कि
-> सितंबर आखिर तक बारहवीं बोर्ड की ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की शुरुआत तक नहीँ हुई है। कारण बताया गया है, कि केमिस्ट्री के टीचर को वाइस प्रिंसिपल का चार्ज मिला हुआ है। इसलिये उन्होनें पढ़ाने से साफ इन्क़ार कर दिया है।
-> नए प्रिन्सिपल साहब ने असेंबली में खड़े होने के पैटर्न को बदल दिया है। जिसके अनुसार अब लड़कों और लड़कियों की लाइन आमने-सामने नहीँ लगेगी। और वे इसको बदलने का कारण बताते हुए बच्चों से कहते हैं, कि " लड़के लड़की आमने-सामने खड़े होकर नैन मटक्का करते हैं, इसलिये बदलाव किया गया है"।
इस तरह की भाषा के इस्तेमाल और व्यवहार करने का अधिकार किसी को भी कैसे मिल सकता है।
और रही बात लड़का-लड़की के एक साथ पढ़ने या असेंबली में खड़े होने की, तो तमाम रिसर्च और अध्ययन मौजूद हैं। आप खुद से देख लीजिये कि बच्चों के लिये क्या बेहतर है। आज अगर हम पुरूषों का एक बड़ा हिस्सा लड़कियों को तुच्छ समझता है तो उसका सबसे बड़ा कारण यही है, कि हमने कभी उसे ये जानने ही नहीं दिया कि लड़की भी बात करती है, बोलती है, उसके सपने होते हैं, और दोस्त भी बनती है। सब कुछ एकदम लड़कों की तरह।
-> विद्यालय के एक हैंडबॉल ग्राउंड पर सोयाबीन की फसल लगाई गई है। और इसका तो कारण तक नहीं पता। जहाँ तक ज्ञात है विद्यालय के फण्ड में तो फिलहाल कोई कटौती नहीं हुई है, जिससे कि खुद खर्च चलाने की नौबत आ गई हो। और ये सब खेल के मैदान पर चल रहा है, जहाँ पर बच्चे खेलते थे और अपनी खेल स्पर्धा की तैयारी करते थे।
-> समस्याएं बहुत हैं और वे हैं जो आज से पहले कभी नहीँ थीं। पर कुछ का ज़िक्र विद्यार्थी खुद खुलकर नहीं कर पा रहे हैं। इस तरह की स्थिति में डरा कर चुप करा देना आम बात होती है। और यही चल भी रहा है जिससे डिप्रेशन जैसी समस्या भी हो सकती है। जो इस उम्र में होना बेहद खतरनाक है।
हाल में जो दुसरे जगह हुआ उसको सोचकर बहुत डर लगता है। इसलिये ये पोस्ट लिखी नवोदय हमारा घर है, उसके बच्चों से बिना जान पहचान भी गहरा नाता होता है। फिर चाहे वो किसी भी नवोदय से हों। उसमें बच्चों के साथ गलत हो इसको बर्दास्त नहीं किया जा सकता।
हो सकता है किसी को ये भी लगे कि हम नवोदय का नाम खराब कर रहे हैं। तो मैं उनसे निवेदन करता हूँ कि आप भी एक बार विद्यालय घूम आइये क्योंकि बीमारी को नज़रंदाज़ करने से बीमारी ठीक नहीं हो जाती। बल्कि और बढ़ती जाती है।
#Save_jnv
अगर आप भी चाहते हैं कि आपके भाई बहन और जूनियर्स को अपनी शिक्षा प्राप्ति में, आगामी कैरियर में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
तो आइये बदलाव का हिस्सा बनें।
मेरी याचिका पर हस्ताक्षर कर नवोदय विद्यालय समिति (NVS) से इन समस्याओं के निदान के लिए निवेदन करें।
1.बच्चों के भविष्य को मद्देनजर रखते हुए शीघ्रातिशीघ्र कोर्स पूरा कराने के लिए शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
2.
खेल गतिविधियों में कोई व्यवधान न आये जैसे कि खेल मैदान का किसी अन्य रूप में उपयोग न किया जाए।
3.
सह-शैक्षणिक गतिविधियां सुचारू एवं सुरुचिपूर्ण ढंग से पूर्ण समयावधि के लिए प्रारंभ हों न कि मात्र एक औपचारिकता। ताकि पहले की तरह बच्चों को राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा को निखारने के अवसर मिल सके।
4.
रूढ़िवादी मानसिकता से ऊपर उठकर लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जाए। यही सह शिक्षण संस्थान का मुख्य उद्देश्य होता है।
5.
विद्यालय प्रशासन में एकल स्वामित्व की स्थिति पैदा न कि जाए।
जैसा पहले विद्यालय की प्रगति के लिए छात्र,शिक्षक एवं प्रशासन मिलकर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देते थे, वैसा माहौल फिर बनाया जाए।
समस्या
हाल के समय में नवोदय विद्यालयों से जुड़ी देश के कई हिस्सों से कई घटनाएं सामने आ रहीं हैं और जिनमें अधिकतर दुर्घटनाएं ही हैं। नवोदय विद्यालय यानी हमारा दूसरा घर। फिलहाल ऐसे ही कुछ घटनाक्रम की जानकारी लगातार आ रही है, JNV शमशाबाद(विदिशा) से। ये वही विद्यालय है जिसके बच्चों ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियाँ हासिल कीं। केमिस्ट्री, में बारहवीं का सब्जेक्ट एवरेज CBSE में राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल आना आम बात थी। और खो-खो में सैकड़ों बच्चे SGFI और national स्तर पर नाम कमा चुके। और मैं खुद भी इसी विद्यालय से पढ़कर निकला हूँ ।
फिलहाल इसकी हालत भी बद से बदतर होती जा रही है। जैसे कि
-> सितंबर आखिर तक बारहवीं बोर्ड की ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की शुरुआत तक नहीँ हुई है। कारण बताया गया है, कि केमिस्ट्री के टीचर को वाइस प्रिंसिपल का चार्ज मिला हुआ है। इसलिये उन्होनें पढ़ाने से साफ इन्क़ार कर दिया है।
-> नए प्रिन्सिपल साहब ने असेंबली में खड़े होने के पैटर्न को बदल दिया है। जिसके अनुसार अब लड़कों और लड़कियों की लाइन आमने-सामने नहीँ लगेगी। और वे इसको बदलने का कारण बताते हुए बच्चों से कहते हैं, कि " लड़के लड़की आमने-सामने खड़े होकर नैन मटक्का करते हैं, इसलिये बदलाव किया गया है"।
इस तरह की भाषा के इस्तेमाल और व्यवहार करने का अधिकार किसी को भी कैसे मिल सकता है।
और रही बात लड़का-लड़की के एक साथ पढ़ने या असेंबली में खड़े होने की, तो तमाम रिसर्च और अध्ययन मौजूद हैं। आप खुद से देख लीजिये कि बच्चों के लिये क्या बेहतर है। आज अगर हम पुरूषों का एक बड़ा हिस्सा लड़कियों को तुच्छ समझता है तो उसका सबसे बड़ा कारण यही है, कि हमने कभी उसे ये जानने ही नहीं दिया कि लड़की भी बात करती है, बोलती है, उसके सपने होते हैं, और दोस्त भी बनती है। सब कुछ एकदम लड़कों की तरह।
-> विद्यालय के एक हैंडबॉल ग्राउंड पर सोयाबीन की फसल लगाई गई है। और इसका तो कारण तक नहीं पता। जहाँ तक ज्ञात है विद्यालय के फण्ड में तो फिलहाल कोई कटौती नहीं हुई है, जिससे कि खुद खर्च चलाने की नौबत आ गई हो। और ये सब खेल के मैदान पर चल रहा है, जहाँ पर बच्चे खेलते थे और अपनी खेल स्पर्धा की तैयारी करते थे।
-> समस्याएं बहुत हैं और वे हैं जो आज से पहले कभी नहीँ थीं। पर कुछ का ज़िक्र विद्यार्थी खुद खुलकर नहीं कर पा रहे हैं। इस तरह की स्थिति में डरा कर चुप करा देना आम बात होती है। और यही चल भी रहा है जिससे डिप्रेशन जैसी समस्या भी हो सकती है। जो इस उम्र में होना बेहद खतरनाक है।
हाल में जो दुसरे जगह हुआ उसको सोचकर बहुत डर लगता है। इसलिये ये पोस्ट लिखी नवोदय हमारा घर है, उसके बच्चों से बिना जान पहचान भी गहरा नाता होता है। फिर चाहे वो किसी भी नवोदय से हों। उसमें बच्चों के साथ गलत हो इसको बर्दास्त नहीं किया जा सकता।
हो सकता है किसी को ये भी लगे कि हम नवोदय का नाम खराब कर रहे हैं। तो मैं उनसे निवेदन करता हूँ कि आप भी एक बार विद्यालय घूम आइये क्योंकि बीमारी को नज़रंदाज़ करने से बीमारी ठीक नहीं हो जाती। बल्कि और बढ़ती जाती है।
#Save_jnv
अगर आप भी चाहते हैं कि आपके भाई बहन और जूनियर्स को अपनी शिक्षा प्राप्ति में, आगामी कैरियर में दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
तो आइये बदलाव का हिस्सा बनें।
मेरी याचिका पर हस्ताक्षर कर नवोदय विद्यालय समिति (NVS) से इन समस्याओं के निदान के लिए निवेदन करें।
1.बच्चों के भविष्य को मद्देनजर रखते हुए शीघ्रातिशीघ्र कोर्स पूरा कराने के लिए शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
2.
खेल गतिविधियों में कोई व्यवधान न आये जैसे कि खेल मैदान का किसी अन्य रूप में उपयोग न किया जाए।
3.
सह-शैक्षणिक गतिविधियां सुचारू एवं सुरुचिपूर्ण ढंग से पूर्ण समयावधि के लिए प्रारंभ हों न कि मात्र एक औपचारिकता। ताकि पहले की तरह बच्चों को राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा को निखारने के अवसर मिल सके।
4.
रूढ़िवादी मानसिकता से ऊपर उठकर लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने और लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जाए। यही सह शिक्षण संस्थान का मुख्य उद्देश्य होता है।
5.
विद्यालय प्रशासन में एकल स्वामित्व की स्थिति पैदा न कि जाए।
जैसा पहले विद्यालय की प्रगति के लिए छात्र,शिक्षक एवं प्रशासन मिलकर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देते थे, वैसा माहौल फिर बनाया जाए।
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14 अक्टूबर 2019 पर पेटीशन बनाई गई