जोशीमठ को बचाओ!

अभी के हस्ताक्षरकर्ता:
ColonelRajan Srinivas और 19 दूसरे ने हाल ही में हस्ताक्षर किए हैं।

समस्या

मेरा शहर जोशीमठ, धंस रहा है! शहर को हर तरफ़ से खोदा जा रहा है, दशकों से खड़ी इमारतों को गिराया जा रहा है। ये सब, उन लोगों के बारे में सोचे बिना, जिन्होंने पिछले दो सालों में अपने घरों की चार दीवारी पर पड़े दरारों को धीरे-धीरे चौड़ा होता देखा है। 

हम 2019 से इस स्थिति पर अधिकारियों का ध्यान लाना की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इमारतों पर दरारें साफ़ दिखाई देने लगीं थीं, पर अधिकारियों ने 'विकास' के लिए निर्माण का काम जारी रखा, हमारे पैरों के नीचे की जमीन तक खोदी गई। 

जोशीमठ में मेरा घर सुरक्षित क्षेत्र में आता है, इसलिए इसे अभी तोड़ा नहीं जाएगा। लेकिन मेरे कई ऐसे रिश्तेदार और दोस्त हैं जिनके आँखों के सामने उनके घरों को गिराया जा रहा है। ऊपर से राज्य सरकार, प्रभावित परिवारों को प्रति माह केवल 4,000 रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। सालों की मेहनत से बने अपने घर को खोने के बाद, उन्हें जोशीमठ में ही एक  'सुरक्षित' स्थान पर ठहराया गया है। न जाने कब तक उन्हें उस एक कमरे में रहना पड़ेगा। हम तो ये तक नहीं जानते कि जो जगहें अभी सुरक्षित हैं, वो आगे भी सुरक्षित रहेंगी या उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा। 

हमारे सभी घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक लाल 'X' से चिह्नित किया गया है, ये जताने के लिए कि उन्हें भी जल्द गिराया जाएगा। लेकिन मैं वास्तव में ये नहीं समझ पा रहा कि अब इन इमारतें को गिराने से क्या हासिल होगा। स्थिति इस हद तक खराब हो गई है कि खुले मैदानों में भी, जहां न सड़कें हैं और न ही किसी तरह का निर्माण, जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई पड़ रही हैं।

जैसे जैसे मैं ये पेटीशन लिख रहा हूँ, वैसे वैसे यहाँ का मौसम भी ख़राब होता जा रहा है। आने वाले दिनों में शायद यहाँ बारिश होगी। और अगर बारिश हुई, तो यहाँ भूस्खलन का भी ख़तरा बढ़ेगा। 

मैं सरकार से अपील करता हूँ कि जोशीमठ के निवासियों को प्रदान की जा रही सहायता को बेहतर करें। सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा आर्थिक समर्थन एक पूरे परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है, क्यूँकि हम में से कइयों ने न सिर्फ़ अपना घर पर अपनी आजीविका को भी खोया है! जिन लोगों ने अपना घर, अपनी ज़मीन खोई है, सरकार द्वारा उनकी ज़मीन को उचित दाम पर ख़रीदा जाना चाहिए! 

जोशीमठ और यहाँ के निवासियों के ख़ातिर अपनी आवाज़ उठाएँ, ये पेटीशन साइन व शेयर करें।

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Rajat Chauhanपेटीशन स्टार्टर

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मेरा शहर जोशीमठ, धंस रहा है! शहर को हर तरफ़ से खोदा जा रहा है, दशकों से खड़ी इमारतों को गिराया जा रहा है। ये सब, उन लोगों के बारे में सोचे बिना, जिन्होंने पिछले दो सालों में अपने घरों की चार दीवारी पर पड़े दरारों को धीरे-धीरे चौड़ा होता देखा है। 

हम 2019 से इस स्थिति पर अधिकारियों का ध्यान लाना की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इमारतों पर दरारें साफ़ दिखाई देने लगीं थीं, पर अधिकारियों ने 'विकास' के लिए निर्माण का काम जारी रखा, हमारे पैरों के नीचे की जमीन तक खोदी गई। 

जोशीमठ में मेरा घर सुरक्षित क्षेत्र में आता है, इसलिए इसे अभी तोड़ा नहीं जाएगा। लेकिन मेरे कई ऐसे रिश्तेदार और दोस्त हैं जिनके आँखों के सामने उनके घरों को गिराया जा रहा है। ऊपर से राज्य सरकार, प्रभावित परिवारों को प्रति माह केवल 4,000 रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। सालों की मेहनत से बने अपने घर को खोने के बाद, उन्हें जोशीमठ में ही एक  'सुरक्षित' स्थान पर ठहराया गया है। न जाने कब तक उन्हें उस एक कमरे में रहना पड़ेगा। हम तो ये तक नहीं जानते कि जो जगहें अभी सुरक्षित हैं, वो आगे भी सुरक्षित रहेंगी या उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा। 

हमारे सभी घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एक लाल 'X' से चिह्नित किया गया है, ये जताने के लिए कि उन्हें भी जल्द गिराया जाएगा। लेकिन मैं वास्तव में ये नहीं समझ पा रहा कि अब इन इमारतें को गिराने से क्या हासिल होगा। स्थिति इस हद तक खराब हो गई है कि खुले मैदानों में भी, जहां न सड़कें हैं और न ही किसी तरह का निर्माण, जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई पड़ रही हैं।

जैसे जैसे मैं ये पेटीशन लिख रहा हूँ, वैसे वैसे यहाँ का मौसम भी ख़राब होता जा रहा है। आने वाले दिनों में शायद यहाँ बारिश होगी। और अगर बारिश हुई, तो यहाँ भूस्खलन का भी ख़तरा बढ़ेगा। 

मैं सरकार से अपील करता हूँ कि जोशीमठ के निवासियों को प्रदान की जा रही सहायता को बेहतर करें। सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा आर्थिक समर्थन एक पूरे परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है, क्यूँकि हम में से कइयों ने न सिर्फ़ अपना घर पर अपनी आजीविका को भी खोया है! जिन लोगों ने अपना घर, अपनी ज़मीन खोई है, सरकार द्वारा उनकी ज़मीन को उचित दाम पर ख़रीदा जाना चाहिए! 

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Rajat Chauhanपेटीशन स्टार्टर
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11 जनवरी 2023 पर पेटीशन बनाई गई