मुंबई : आरे जंगल के आदिवासियों के घरों में बिजली पहुँचाये सरकार #BattiJalao


मुंबई : आरे जंगल के आदिवासियों के घरों में बिजली पहुँचाये सरकार #BattiJalao
समस्या
आज़ादी के 71 साल बाद भी देश की आर्थिक राजधानी-मुंबई के कुछ निवासियों तक बिजली नहीं पहुँच पाई है?
प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’(हर घर में बिजली) सरकार की योजनाओं में से एक है, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। अप्रैल 2018 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने क्वेस्ट(क्वालिटी इवैलुएशन फॉर ससटेन्बल ट्रांफर्मेशन) की शुरआत की, जिसमें आदिवासियों के लिये विशेष बजट रखा गया था। इन योजनाओं के बाद भी सपनों के इस शहर मुंबई में कुछ घर ऐसे हैं, जिनके लिये बिजली आज भी एक सपना है।
नौशाचा पाड़ा, मुंबई के आरे जंगल में स्थित एक पुराना आदिवासी गाँव है, जो गोरेगाँव पूर्व के मुंबई वेटिनरी कॉलेज की चार दिवारी में बसा है। स्वच्छ भारत और खुले में शौच से मुक्ति अभियान के अंतर्गत मैंने इस गाँव के लिये शौचालयों का प्रबंध किया है।
जब मैं गाँव में गई तो मैंने पाया कि भले ये मुंबई शहर का हिस्सा है पर यहाँ आज भी लोग अँधेरे में जीने को मजबूर हैं। गाँव से होकर पक्की सड़कें जाती हैं, जिनपर लगे स्ट्रीट लैंप रात को जलते भी हैं। पर उसी सड़क के किनारे बसे आदिवासियों के घरों में बिजली नहीं होती है।
ऐसा लगता है मानो वो स्ट्रीट लैंप अँधेरे में जी रहे उन आदिवासियों को मुँह चिढ़ा रहे हों।
ये नज़ारा देखकर मैं वाकई चौैंक गई और मुझे बहुत अफसोस भी हुआ। मैंने आरे जंगल के अन्य गाँवों का दौैरा किया तो पाया कि हर जगह हालात कुछ ऐसे ही हैं।
सरकारी आवासों में बिजली की पूरी व्यवस्था है पर वहाँ के मूल निवासी--वर्ली जनजाति, जो दशकों से वहाँ रह रहे हैं, वो अँधेरे में जीने को मजबूर हैं।
100 साल पुराने वनिचा पाड़ा गाँव में 2 साल पहले एक सबस्टेशन भी लगाया गया, जिसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसका नतीजा है कि ये गाँव आज भी अँधेरे में जी रहा है।
मैं अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रही हूँ कि गाँव में बिजली पहुँच जाये पर ये मैं अकेले नहीं कर सकती। कृपया मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें।
इस समस्या पर जब मैंने रिलायंस एनर्जी से पूछा कि वो आदिवासी गाँवों में बिजली क्यों नहीं दे रहे हैं तो उनका जवाब था, “हमें सरकार से एनओसी(नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) चाहिये।
मेरा आप सब से आग्रह है कि इस पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे सोशल मीडिया में शेयर करें। मैं हर संभव प्रयास कर रही हूँ कि आरे के जंगलों में रह रहे आदिवासियों का जीवन रोशनी से भर जाये, उनके घरों में भी बिजली पहुँचे।
मुझे पूरा यकीन है कि अगर आप मेरे साथ खड़े होंगे तो हम जल्द ही कामयाब होंगे। #BattiJalao #SwitchOn #AdivasiLivesMatter #BijliChahiye

समस्या
आज़ादी के 71 साल बाद भी देश की आर्थिक राजधानी-मुंबई के कुछ निवासियों तक बिजली नहीं पहुँच पाई है?
प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’(हर घर में बिजली) सरकार की योजनाओं में से एक है, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। अप्रैल 2018 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने क्वेस्ट(क्वालिटी इवैलुएशन फॉर ससटेन्बल ट्रांफर्मेशन) की शुरआत की, जिसमें आदिवासियों के लिये विशेष बजट रखा गया था। इन योजनाओं के बाद भी सपनों के इस शहर मुंबई में कुछ घर ऐसे हैं, जिनके लिये बिजली आज भी एक सपना है।
नौशाचा पाड़ा, मुंबई के आरे जंगल में स्थित एक पुराना आदिवासी गाँव है, जो गोरेगाँव पूर्व के मुंबई वेटिनरी कॉलेज की चार दिवारी में बसा है। स्वच्छ भारत और खुले में शौच से मुक्ति अभियान के अंतर्गत मैंने इस गाँव के लिये शौचालयों का प्रबंध किया है।
जब मैं गाँव में गई तो मैंने पाया कि भले ये मुंबई शहर का हिस्सा है पर यहाँ आज भी लोग अँधेरे में जीने को मजबूर हैं। गाँव से होकर पक्की सड़कें जाती हैं, जिनपर लगे स्ट्रीट लैंप रात को जलते भी हैं। पर उसी सड़क के किनारे बसे आदिवासियों के घरों में बिजली नहीं होती है।
ऐसा लगता है मानो वो स्ट्रीट लैंप अँधेरे में जी रहे उन आदिवासियों को मुँह चिढ़ा रहे हों।
ये नज़ारा देखकर मैं वाकई चौैंक गई और मुझे बहुत अफसोस भी हुआ। मैंने आरे जंगल के अन्य गाँवों का दौैरा किया तो पाया कि हर जगह हालात कुछ ऐसे ही हैं।
सरकारी आवासों में बिजली की पूरी व्यवस्था है पर वहाँ के मूल निवासी--वर्ली जनजाति, जो दशकों से वहाँ रह रहे हैं, वो अँधेरे में जीने को मजबूर हैं।
100 साल पुराने वनिचा पाड़ा गाँव में 2 साल पहले एक सबस्टेशन भी लगाया गया, जिसका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसका नतीजा है कि ये गाँव आज भी अँधेरे में जी रहा है।
मैं अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रही हूँ कि गाँव में बिजली पहुँच जाये पर ये मैं अकेले नहीं कर सकती। कृपया मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें।
इस समस्या पर जब मैंने रिलायंस एनर्जी से पूछा कि वो आदिवासी गाँवों में बिजली क्यों नहीं दे रहे हैं तो उनका जवाब था, “हमें सरकार से एनओसी(नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) चाहिये।
मेरा आप सब से आग्रह है कि इस पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे सोशल मीडिया में शेयर करें। मैं हर संभव प्रयास कर रही हूँ कि आरे के जंगलों में रह रहे आदिवासियों का जीवन रोशनी से भर जाये, उनके घरों में भी बिजली पहुँचे।
मुझे पूरा यकीन है कि अगर आप मेरे साथ खड़े होंगे तो हम जल्द ही कामयाब होंगे। #BattiJalao #SwitchOn #AdivasiLivesMatter #BijliChahiye

कामयाबी
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फैसला लेने वाले

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15 अगस्त 2018 पर पेटीशन बनाई गई