

सत्र 2020-21 में यूपी बोर्ड द्वारा दी गई अंक रहित मार्कशीट में अंक दिए जाएं
समस्या
कोरोना महामारी के दौरान यूपी बोर्ड द्वारा हाई स्कूल की परीक्षाएं आयोजित नहीं कराई गई थीं। कक्षा-9 तथा हाई स्कूल प्री-बोर्ड की लिखित परीक्षा के आधार पर सभी बच्चों को अंक देकर पास किया गया था लेकिन कुछ बच्चों को अंक नहीं दिए गए। उनके अंकपत्रों में केवल प्रमोट लिख दिया गया।
आगरा में ऐसे बच्चों की संख्या 15 सौ तथा पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या लगभग 35000 बताई जा रही है। आगरा के एक ही विद्यालय श्रीमती बैजंती देवी इंटर कॉलेज के 128 छात्र छत्राओं की मार्कशीट में अंक नहीं दिए हैं। अंक न होने के कारण इन विद्यार्थियों की कभी भी मेरिट नहीं बन पाएगी। यह मेरिट सूची से हमेशा के लिए बाहर हो जाएंगे। किसी भी महाविद्यालय में प्रवेश लेने अथवा नौकरी के लिए मेरिट की आवश्यकता होती है। बिना अंको के इनकी मेरिट नहीं बन पाएगी।
जब बच्चों ने उत्तर प्रदेश बोर्ड से पत्राचार किया तो उन्हें बताया गया कि जिन विद्यालयों से अंक प्राप्त हुए थे उनको अंक दे दिए गए बाकी को सामान्य रूप से प्रमोट कर दिया गया। जो बच्चे अपने अंको से असंतुष्ट थे उनको दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। जबकि विद्यालय का कहना है कि हमने अंक भेजे थे। आखिर यह अंक गए कहां ? इन विद्यार्थियों ने अपने अंक देखे ही नहीं है जिससे इनके संतुष्ट अथवा असंतुष्ट होने का कोई अर्थ ही नहीं है। गलती किसी की भी हो खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बिना अंकों के वह कोई भी आवेदन नहीं कर पाएंगे।
अंक लेने विद्यार्थी आगरा में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वह अपनी समस्या के समाधान को लेकर आगरा के सांसद एवं कानून राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह, महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य, जिलाधिकारी आगरा, जिला विद्यालय निरीक्षक आगरा, महापौर आगरा आदि से मिल चुके हैं। वह अंको के लिए वह तमाम अभियान चला चुके हैं। हस्ताक्षर अभियान, मेरी आवाज सुनो अभियान, कैंडल मार्च, शहीद स्मारक पर प्रदर्शन के साथ-साथ जिला मुख्यालय पर अफसर तथा विधायकों से अंकों की भीख मांग चुके हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि 12वीं की पढ़ाई करें अथवा दोबारा से दसवीं की परीक्षा दें। बिना अंकों के 12वीं की पढ़ाई बेकार है और दसवीं की परीक्षा देंगे तो उनकी दो साल बर्बाद हो जाएंगी। इन विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। विद्यालयों द्वारा बोर्ड को जो नंबर भेजे गए थे उनको अंक पत्रों में अंकित कर दिया जाए तो इन विद्यार्थियों का भविष्य बचाया जा सकता है। सभी विद्यार्थी अवसाद और तनाव में हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद इन बच्चों को अंक दे सकता है क्योंकि उनके पोर्टल पर विद्यालय द्वारा अंक अपलोड किए गए हैं। यदि आपका सहयोग इन विद्यार्थियों को मिल जाएगा तो सभी का भविष्य संवर सकता है।
आप इनकी मदद के लिए जरूर आगे आइए। सभी मिलकर इस पिटीशन को साइन कीजिए। यदि इन विद्यार्थियों को आपका सहयोग नहीं मिला तो इनको मार्कशीट में अंक नहीं मिल पाएंगे। इनका भविष्य चौपट हो जाएगा। यह केवल साक्षर रह पाएंगे। किसी भी सरकारी अथवा गैर सरकारी सेवा में जाने के पात्र नहीं हो पाएंगे और मेरिट सूची से पिछड़ जाएंगे।
कृपया मेरी पेटीशन साइन करें ताकि हम मिलकर ये बदलाव ला सकें।
धन्यवाद।

पेटीशन बंद हो गई
समस्या
कोरोना महामारी के दौरान यूपी बोर्ड द्वारा हाई स्कूल की परीक्षाएं आयोजित नहीं कराई गई थीं। कक्षा-9 तथा हाई स्कूल प्री-बोर्ड की लिखित परीक्षा के आधार पर सभी बच्चों को अंक देकर पास किया गया था लेकिन कुछ बच्चों को अंक नहीं दिए गए। उनके अंकपत्रों में केवल प्रमोट लिख दिया गया।
आगरा में ऐसे बच्चों की संख्या 15 सौ तथा पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या लगभग 35000 बताई जा रही है। आगरा के एक ही विद्यालय श्रीमती बैजंती देवी इंटर कॉलेज के 128 छात्र छत्राओं की मार्कशीट में अंक नहीं दिए हैं। अंक न होने के कारण इन विद्यार्थियों की कभी भी मेरिट नहीं बन पाएगी। यह मेरिट सूची से हमेशा के लिए बाहर हो जाएंगे। किसी भी महाविद्यालय में प्रवेश लेने अथवा नौकरी के लिए मेरिट की आवश्यकता होती है। बिना अंको के इनकी मेरिट नहीं बन पाएगी।
जब बच्चों ने उत्तर प्रदेश बोर्ड से पत्राचार किया तो उन्हें बताया गया कि जिन विद्यालयों से अंक प्राप्त हुए थे उनको अंक दे दिए गए बाकी को सामान्य रूप से प्रमोट कर दिया गया। जो बच्चे अपने अंको से असंतुष्ट थे उनको दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। जबकि विद्यालय का कहना है कि हमने अंक भेजे थे। आखिर यह अंक गए कहां ? इन विद्यार्थियों ने अपने अंक देखे ही नहीं है जिससे इनके संतुष्ट अथवा असंतुष्ट होने का कोई अर्थ ही नहीं है। गलती किसी की भी हो खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बिना अंकों के वह कोई भी आवेदन नहीं कर पाएंगे।
अंक लेने विद्यार्थी आगरा में लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वह अपनी समस्या के समाधान को लेकर आगरा के सांसद एवं कानून राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह, महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य, जिलाधिकारी आगरा, जिला विद्यालय निरीक्षक आगरा, महापौर आगरा आदि से मिल चुके हैं। वह अंको के लिए वह तमाम अभियान चला चुके हैं। हस्ताक्षर अभियान, मेरी आवाज सुनो अभियान, कैंडल मार्च, शहीद स्मारक पर प्रदर्शन के साथ-साथ जिला मुख्यालय पर अफसर तथा विधायकों से अंकों की भीख मांग चुके हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि 12वीं की पढ़ाई करें अथवा दोबारा से दसवीं की परीक्षा दें। बिना अंकों के 12वीं की पढ़ाई बेकार है और दसवीं की परीक्षा देंगे तो उनकी दो साल बर्बाद हो जाएंगी। इन विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। विद्यालयों द्वारा बोर्ड को जो नंबर भेजे गए थे उनको अंक पत्रों में अंकित कर दिया जाए तो इन विद्यार्थियों का भविष्य बचाया जा सकता है। सभी विद्यार्थी अवसाद और तनाव में हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद इन बच्चों को अंक दे सकता है क्योंकि उनके पोर्टल पर विद्यालय द्वारा अंक अपलोड किए गए हैं। यदि आपका सहयोग इन विद्यार्थियों को मिल जाएगा तो सभी का भविष्य संवर सकता है।
आप इनकी मदद के लिए जरूर आगे आइए। सभी मिलकर इस पिटीशन को साइन कीजिए। यदि इन विद्यार्थियों को आपका सहयोग नहीं मिला तो इनको मार्कशीट में अंक नहीं मिल पाएंगे। इनका भविष्य चौपट हो जाएगा। यह केवल साक्षर रह पाएंगे। किसी भी सरकारी अथवा गैर सरकारी सेवा में जाने के पात्र नहीं हो पाएंगे और मेरिट सूची से पिछड़ जाएंगे।
कृपया मेरी पेटीशन साइन करें ताकि हम मिलकर ये बदलाव ला सकें।
धन्यवाद।

फैसला लेने वाले
पेटीशन अपडेट
पेटीशन को शेयर करें
7 जुलाई 2022 पर पेटीशन बनाई गई