दिल्ली की सड़कों पर जीने को मजबूर इन 60,000 बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है


दिल्ली की सड़कों पर जीने को मजबूर इन 60,000 बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है
समस्या
क्या आप जानते हैं कि हमारे देश की राजधानी दिल्ली में लगभग 60,000 बच्चे बिना रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं के सड़कों पर अपना जीवन काट रहे हैं।
ये मासूम बच्चे रोज़ भूख, दुर्व्यवहार, निरक्षरता और कुपोषण का शिकार होते हैं। उनकी सुरक्षा और विकास के बारें में सोचने वाला कोई नही है।
दिल्ली में रात को बाहर निकलना या किसी अजनबी से बात करना हमें ही इतना डरावना और ख़तरनाक लगता है, तो सोचिए उन छोटे बच्चों पर क्या बीतती होगी जिनका दिन अजनबियों की दया पर कटता है? हर एक दिन उनके लिए कितना डरावना होता होगा?
दिल्ली सरकार ने स्कूल जाते बच्चों के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि दिल्ली के बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ सही मार्गदर्शन भी मिल सके, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति जो भी हो। लेकिन जो बच्चे स्कूल जाने की बजाय सड़कों पर एक वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहें हैं, उनका क्या? सरकार और हम नागरिक उन्हें और उनकी ज़रूरतों को लगातार अनदेखा करते आए हैं।
एक बच्चे की देखभाल (खाने व शिक्षा) का खर्चा प्रति महीने सिर्फ़ 2500 रुपयों का पड़ता है। आम जनता की सेवा कर रही दिल्ली सरकार अगर सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए एक स्पान्सर्शिप और मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू करे, तो मुझे पूरा विश्वास है की शहर में 60,000 ऐसे भले लोग आसानी से मिल जाएँगे जो कम से कम एक बच्चे की परवरिश और शिक्षा का खर्चा उठाना चाहेंगे।
मेरी पेटीशन साइन करें और श्री अरविंद केजरीवाल-दिल्ली के मुख्यमंत्री, श्री मनीष सिसोदिया-उपमुख्यमंत्री और श्री जैस्मीन शाह-दिल्ली के विकास और संवाद आयोग के उप अध्यक्ष से निवेदन करें कि वे दिल्ली के सड़कों पर रहने वाले बच्चों के लिए एक प्रोग्राम शुरू करें, जिसके तहत दिल्ली के नागरिक 2500/- प्रति माह का योगदान देकर एक बच्चे के महीने का खर्चा उठा सके।
मैंने Change.org पर ये पेटीशन शुरू की है क्यूँकि मुझे विश्वास है कि दिल्लीवाले इस मुद्दे पर मेरा साथ ज़रूर देंगे। आइए साथ मिलकर सुनिश्चित करें कि हमारी दिल्ली का कोई भी बच्चा पीछे ना छूटे।
-आदित्य दुबे, अनिकेत गुप्ता, अमन बांका और सिद्धांत सारंग।

समस्या
क्या आप जानते हैं कि हमारे देश की राजधानी दिल्ली में लगभग 60,000 बच्चे बिना रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं के सड़कों पर अपना जीवन काट रहे हैं।
ये मासूम बच्चे रोज़ भूख, दुर्व्यवहार, निरक्षरता और कुपोषण का शिकार होते हैं। उनकी सुरक्षा और विकास के बारें में सोचने वाला कोई नही है।
दिल्ली में रात को बाहर निकलना या किसी अजनबी से बात करना हमें ही इतना डरावना और ख़तरनाक लगता है, तो सोचिए उन छोटे बच्चों पर क्या बीतती होगी जिनका दिन अजनबियों की दया पर कटता है? हर एक दिन उनके लिए कितना डरावना होता होगा?
दिल्ली सरकार ने स्कूल जाते बच्चों के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं ताकि दिल्ली के बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ सही मार्गदर्शन भी मिल सके, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति जो भी हो। लेकिन जो बच्चे स्कूल जाने की बजाय सड़कों पर एक वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहें हैं, उनका क्या? सरकार और हम नागरिक उन्हें और उनकी ज़रूरतों को लगातार अनदेखा करते आए हैं।
एक बच्चे की देखभाल (खाने व शिक्षा) का खर्चा प्रति महीने सिर्फ़ 2500 रुपयों का पड़ता है। आम जनता की सेवा कर रही दिल्ली सरकार अगर सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए एक स्पान्सर्शिप और मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू करे, तो मुझे पूरा विश्वास है की शहर में 60,000 ऐसे भले लोग आसानी से मिल जाएँगे जो कम से कम एक बच्चे की परवरिश और शिक्षा का खर्चा उठाना चाहेंगे।
मेरी पेटीशन साइन करें और श्री अरविंद केजरीवाल-दिल्ली के मुख्यमंत्री, श्री मनीष सिसोदिया-उपमुख्यमंत्री और श्री जैस्मीन शाह-दिल्ली के विकास और संवाद आयोग के उप अध्यक्ष से निवेदन करें कि वे दिल्ली के सड़कों पर रहने वाले बच्चों के लिए एक प्रोग्राम शुरू करें, जिसके तहत दिल्ली के नागरिक 2500/- प्रति माह का योगदान देकर एक बच्चे के महीने का खर्चा उठा सके।
मैंने Change.org पर ये पेटीशन शुरू की है क्यूँकि मुझे विश्वास है कि दिल्लीवाले इस मुद्दे पर मेरा साथ ज़रूर देंगे। आइए साथ मिलकर सुनिश्चित करें कि हमारी दिल्ली का कोई भी बच्चा पीछे ना छूटे।
-आदित्य दुबे, अनिकेत गुप्ता, अमन बांका और सिद्धांत सारंग।

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1 नवंबर 2021 पर पेटीशन बनाई गई