राजस्थान: दलित बच्चे की आवाज़ बनें, टीचर को सज़ा व परिवार को 50 लाख मुआवज़े की मांग करें


राजस्थान: दलित बच्चे की आवाज़ बनें, टीचर को सज़ा व परिवार को 50 लाख मुआवज़े की मांग करें
समस्या
चेतावनी: पेटीशन में जाति आधारित हिंसा का उल्लेख है।
राजस्थान में एक 9 साल के दलित बच्चे की मौत ने पूरे देश और दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अगर हमने इस जाति आधारित हिंसा पर चुप्पी साध ली तो देश का हर दलित बच्चा डर-डरकर अपने स्कूल जाएगा।
कुछ रिपोर्ट के अनुसार उस मासूम बच्चे को इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि कथित रूप से उसने ‘ऊँची जाति के मटके से पानी पी लिया था।’ सोशल मीडिया में वायरल उस मासूम की फोटो देखकर कलेजा फट पड़ता है।
देश को आज़ाद हुए 75 साल हो गए हैं लेकिन दलित समुदाय आज भी हिंसा और अत्याचार के जकडों में फँसा है। देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा पर अफसोस दलित समाज के लिए तो आज ‘मृत महोत्सव’ है। पूरा दलित समाज और देश उस बच्चे के लिए न्याय मांग रहा है।
9 साल की उम्र में जहां और बच्चे जी भर के सपने देखते हैं, वहीं दलित समुदाय के बच्चों को पानी पीने तक के लिए सज़ा दी जा रही है।
इस मामले में आरोपी टीचर को गिरफ्तार कर लिया गया है। हत्या और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। लेकिन न्याय तक पहुँचने का रास्ता लम्बा है। इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है। ताकि न्याय पाने के इस लम्बे सफ़र में हम नागरिक एकजुट होकर उस मासूम के परिवार के साथ खड़े हो सकें।
मेरी पेटीशन साइन करें और राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत जी से माँग करें कि वो -
1. फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के जरिए आरोपी टीचर को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएँ
2. पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा दें
3. परिवार के 2 सदस्यों को सरकारी नौकरी दें
4. उस निजी स्कूल की मान्यता रद्द करें
5. जालोर, पाली, सिरोही ज़िलों में सभी गन लाइसेंस रद्द करें
6. हाई कोर्ट में स्थापित भेदभाव की प्रतिमा मनु की मूर्ति पर बुलडोज़र चलाएं।
अगर लाखों लोग इस पेटीशन को साइन-शेयर करेंगे तो सरकार भी ये समझेगी कि अब हम भारत के नागरिक जाति आधारित हिंसा को नहीं सहेंगे।
#AbAurNahi
21,387
समस्या
चेतावनी: पेटीशन में जाति आधारित हिंसा का उल्लेख है।
राजस्थान में एक 9 साल के दलित बच्चे की मौत ने पूरे देश और दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अगर हमने इस जाति आधारित हिंसा पर चुप्पी साध ली तो देश का हर दलित बच्चा डर-डरकर अपने स्कूल जाएगा।
कुछ रिपोर्ट के अनुसार उस मासूम बच्चे को इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि कथित रूप से उसने ‘ऊँची जाति के मटके से पानी पी लिया था।’ सोशल मीडिया में वायरल उस मासूम की फोटो देखकर कलेजा फट पड़ता है।
देश को आज़ाद हुए 75 साल हो गए हैं लेकिन दलित समुदाय आज भी हिंसा और अत्याचार के जकडों में फँसा है। देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा पर अफसोस दलित समाज के लिए तो आज ‘मृत महोत्सव’ है। पूरा दलित समाज और देश उस बच्चे के लिए न्याय मांग रहा है।
9 साल की उम्र में जहां और बच्चे जी भर के सपने देखते हैं, वहीं दलित समुदाय के बच्चों को पानी पीने तक के लिए सज़ा दी जा रही है।
इस मामले में आरोपी टीचर को गिरफ्तार कर लिया गया है। हत्या और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। लेकिन न्याय तक पहुँचने का रास्ता लम्बा है। इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है। ताकि न्याय पाने के इस लम्बे सफ़र में हम नागरिक एकजुट होकर उस मासूम के परिवार के साथ खड़े हो सकें।
मेरी पेटीशन साइन करें और राजस्थान के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत जी से माँग करें कि वो -
1. फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के जरिए आरोपी टीचर को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएँ
2. पीड़ित परिवार को 50 लाख का मुआवजा दें
3. परिवार के 2 सदस्यों को सरकारी नौकरी दें
4. उस निजी स्कूल की मान्यता रद्द करें
5. जालोर, पाली, सिरोही ज़िलों में सभी गन लाइसेंस रद्द करें
6. हाई कोर्ट में स्थापित भेदभाव की प्रतिमा मनु की मूर्ति पर बुलडोज़र चलाएं।
अगर लाखों लोग इस पेटीशन को साइन-शेयर करेंगे तो सरकार भी ये समझेगी कि अब हम भारत के नागरिक जाति आधारित हिंसा को नहीं सहेंगे।
#AbAurNahi
21,387
फैसला लेने वाले
पेटीशन को शेयर करें
16 अगस्त 2022 पर पेटीशन बनाई गई