Protest Rajasthan Bovine Animals Amendment Bill 2018 that leads to buffalo slaughtering

समस्या

1. This is against article 48 and article 51A/G of Indian constitution.

2. It will bring scarcity of milk and is harmful to environment. 

3. This will encourage slaughtering of buffaloes and increase meat export. 

4. This is violent and cruel. 

महामहिम राष्ट्रपति महोदय,
भारत सरकार
नई दिल्ली

विषय: राजस्थान बोवाइन एनिमल्स संशोधन विधेयक के क्रम में ।

मान्यवर महोदय,

सादर प्रणाम। उपरोक्त विषय में निवेदन है कि राज्य विधानसभा में राजस्थान बोवाइन एनिमल्स संशोधन विधेयक २०१८ पारित किया गया है जिसमें धारा २ के तहत पशु की परिभाषा में से भैंस को विलोपित किया गया है। जबकि अन्य सभी संशोधन उचित व आवश्यक है तथा स्वागत किये जाने योग्य हैं। यह संशोधन आपके पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है

मान्यवर महोदय,

उपरोक्त संशोधन से राजस्थान में से भैंसों का निकास बढेगा व दूध की उपलब्धता प्रभावित होगी।क्योंकि भैंस दुधारू पशु है एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में भैंस पाली जाती हैं जो कि उनके भरण पोषण का भी साधन है। प्रस्तावित संशोधन से हिंसा को बढ़ावा मिलेगा व दूध की किल्लत होगी। हमारे देश में दूध के उत्पादन में भैंसों का योगदान दो तिहाई है।

यदि भैंसों को उपरोक्त अधिनियम के प्रावधानों से बाहर कर दिया गया तो उनका कत्ल बढेगा एवं मांस निर्यात को बढावा मिलेगा। इससे प्रस्तावित संशोधन मीट लाबी द्वारा लाया गया भी प्रतीत हो रहा है।

भैंसों की कमी के कारण अपमिश्रण बढेगा एवँ रासायनिक दूध के उत्पादन में वृद्धि होगी जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पडेगा।

उपरोक्त संशोधन राजस्थान बोवाइन एनिमल्स एक्ट की मूलभावना के विपरीत है।
उपरोक्त अधिनियम जब १९९५ में पारित किया गया था उस समय उपरोक्त अधिनियम की जो मूल भावना थी उसका संशोधन विधेयक २०१८ में ध्यान नहीं रखा गया है ।

उपरोक्त अधिनियम की मूल भावना को नीचे पुन उद्धत किया जा रहा है ।

"With the growing awareness of non conventional energy sources like bio gas the necessity of dung of these bovine species has gained further importance in additional to its utility as manure and as a fuel for the rural population. Such cattle even when they cease to be capable of yielding milk or breeding or working drought cattle can no longer consider as useless".

"In order to protect and improve the natural environment by minimising dependence on chemical fertilisers and pesticides and by using natural and soil friendly manure generated by these bovine animals. The slaughtering of these animals needs to be strictly prohibited".

उपरोक्त संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद ४८ व ५१ए।जी। के प्रावधानों की भावना के विपरीत है तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में कई निर्णय पारित किए हुए हैं ।

आप से प्रार्थना है कि आप उपरोक्त संशोधन बिल में से धारा २ के तहत प्रस्तावित संशोधन को विधेयक से हटाने पर पुनर्विचार करने की कृपा करें ।

 

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Jyoti Kothariपेटीशन स्टार्टर

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समस्या

1. This is against article 48 and article 51A/G of Indian constitution.

2. It will bring scarcity of milk and is harmful to environment. 

3. This will encourage slaughtering of buffaloes and increase meat export. 

4. This is violent and cruel. 

महामहिम राष्ट्रपति महोदय,
भारत सरकार
नई दिल्ली

विषय: राजस्थान बोवाइन एनिमल्स संशोधन विधेयक के क्रम में ।

मान्यवर महोदय,

सादर प्रणाम। उपरोक्त विषय में निवेदन है कि राज्य विधानसभा में राजस्थान बोवाइन एनिमल्स संशोधन विधेयक २०१८ पारित किया गया है जिसमें धारा २ के तहत पशु की परिभाषा में से भैंस को विलोपित किया गया है। जबकि अन्य सभी संशोधन उचित व आवश्यक है तथा स्वागत किये जाने योग्य हैं। यह संशोधन आपके पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है

मान्यवर महोदय,

उपरोक्त संशोधन से राजस्थान में से भैंसों का निकास बढेगा व दूध की उपलब्धता प्रभावित होगी।क्योंकि भैंस दुधारू पशु है एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर में भैंस पाली जाती हैं जो कि उनके भरण पोषण का भी साधन है। प्रस्तावित संशोधन से हिंसा को बढ़ावा मिलेगा व दूध की किल्लत होगी। हमारे देश में दूध के उत्पादन में भैंसों का योगदान दो तिहाई है।

यदि भैंसों को उपरोक्त अधिनियम के प्रावधानों से बाहर कर दिया गया तो उनका कत्ल बढेगा एवं मांस निर्यात को बढावा मिलेगा। इससे प्रस्तावित संशोधन मीट लाबी द्वारा लाया गया भी प्रतीत हो रहा है।

भैंसों की कमी के कारण अपमिश्रण बढेगा एवँ रासायनिक दूध के उत्पादन में वृद्धि होगी जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पडेगा।

उपरोक्त संशोधन राजस्थान बोवाइन एनिमल्स एक्ट की मूलभावना के विपरीत है।
उपरोक्त अधिनियम जब १९९५ में पारित किया गया था उस समय उपरोक्त अधिनियम की जो मूल भावना थी उसका संशोधन विधेयक २०१८ में ध्यान नहीं रखा गया है ।

उपरोक्त अधिनियम की मूल भावना को नीचे पुन उद्धत किया जा रहा है ।

"With the growing awareness of non conventional energy sources like bio gas the necessity of dung of these bovine species has gained further importance in additional to its utility as manure and as a fuel for the rural population. Such cattle even when they cease to be capable of yielding milk or breeding or working drought cattle can no longer consider as useless".

"In order to protect and improve the natural environment by minimising dependence on chemical fertilisers and pesticides and by using natural and soil friendly manure generated by these bovine animals. The slaughtering of these animals needs to be strictly prohibited".

उपरोक्त संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद ४८ व ५१ए।जी। के प्रावधानों की भावना के विपरीत है तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में कई निर्णय पारित किए हुए हैं ।

आप से प्रार्थना है कि आप उपरोक्त संशोधन बिल में से धारा २ के तहत प्रस्तावित संशोधन को विधेयक से हटाने पर पुनर्विचार करने की कृपा करें ।

 

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फैसला लेने वाले

The Hon'ble President of India
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Vasundhara Raje Chief Minister
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