कामयाबी

#SonbhadraKeAdivasi सोनभद्र नरसंहार कांड के शिकार आदिवासी लोगो की वेदना सुनिए

884 समर्थकों के साथ यह याचिका बदलाव लाई!


बनारस से सटे सोनभद्र जनपद में 16 जुलाई 2019 को दबंग भूमाफिया ने अवैध तरीके से आदिवासियों की जमीन हथियाने के लिए खूनी खेल खेला। हथियारबंद 300 लोगों ने निर्दोष आदिवासियों पर करीब आधे घंटे तक अंधाधुंध फायरिंग की। इस घटना में 10 आदिवासी मौके पर मारे गए और 25 से ज्यादा अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
बड़ी बात यह है की घटना के समय आदिवासियों ने सोनभद्र के एसपी व कलेक्टर से लेकर सभी आला अफसरों को फोन किए। सभी के मोबाइल बंद मिले। 100 डायल पुलिस आई, पर तमाशबीन बनी रही। इस पुलिस के सामने ही चार आदिवासियों को गोलियों से छलनी किया गया। घोरावल थाना पुलिस के अधीन वाले इस इलाके में पुलिस तब पहुंची, जब हत्यारे नरसंहार कांड रचने के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए। 
घटना के बाद मौके पर कोई प्रशासनिक अफसर नहीं गया। सत्तारूढ़ दल के किसी नेता ने भी शोक संवेदना व्यक्त करने की जरूरत नहीं समझी। अलबत्ता पुलिस नरसंहार कांड की अगुआई करने वाले ग्राम प्रधान यज्ञदत्त के घर की सुरक्षा करती नजर आई। इस मामले में घोरावल पुलिस तो कटघरे में थी ही, सोनभद्र के एसपी और डीएम भी कम कसूरवार नहीं। 
अब से पहले इतने संवेदनहीन अफसर सोनभद्र में कभी नहीं आए थे। मिर्जापुर के कलेक्टर रहे एक आईएएस अफसर ने आदिवासियों की जमीन हथियाई और बाद में उसे भू-माफिया के हाथ बेच दिया। साल 1955 से मुकदमा लड़ रहे आदिवासियों को न्याय नहीं मिला। जमीन राजा बड़हर की थी और बाद में वह ग्राम सभा की हो गई। रिश्वतखोर अफसरों ने योजनाबद्ध ढंग से उनकी जमीन भू माफिया के हवाले कर दी। 
हैरान कर देने वाली बात यह है कि आदिवासियों से उनकी जमीन छीनने के लिए दर्जनभर लोगों को गुंडा एक्ट में निरुद्ध किया गया और उन्हें जिलाबदर भी करवा दिया गया। करीब 60 आदिवासियों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए, जिसकी आड़ में पुलिस ने जमकर मनमानी की। पुलिस ने आदिवासियों को लूटा ही, महिलाओं की आबरू से खेला भी।
नरसंहार कांड के बाद उभ्भा गांव में महिलाओं व बच्चों की चीत्कार दिल को छलनी कर देती है। इसे बेशर्मी कहें या हठधर्मिता, इन महिलाओं की चीख सीएम श्री आदित्यनाथ और उनके नुमाइंदों को सुनाई नहीं दे रही है। हमारे समिति से जुड़े  जानेमाने पत्रकार श्री विजय विनीत  तो अपने आंसू नहीं रोक पाए। भू माफियाओं ने जिन महिलाओं की मांग का सिंदूर पोंछ डाला, उनकी वेदना सुनिए।

मीडिया विजिल पर प्रकाशित रिपोर्ट 'घोरावल नरसंहार पर गिरफ्तारियों, अर्जियों, दौरों और बयानों के बीच गांव में मातम' भी पढ़े।

प्रमुख मांगें
1. सोनभद्र में ट्रस्ट , समिति, व अन्य संस्थान बना कर भूमि चोरी करने वालों के खिलाफ लूट व डकैती की प्राथमिकी दर्ज हो।
2. जो ट्रस्ट अस्तित्व में नहीं उनसे इस तरह की जमीन वापस लेकर स्थानीय गरीबों को आवंटित की जाय।
3. सोनभद्र में ब्यापक पैमाने पर भूमि घोटाले हुए इसकी निष्पक्ष जांच के लिए राजस्व न्यायिक आयोग का गठन किया जाय।
4. सोनभद्र में राजस्व अदालतें पैसे पर बिक चुकी हैं ऐसे में रेवेन्यू फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जाय।
5. इस नर संहार के लिए जिम्मेदार सरकारी महकमे के लोगों को चिन्हित कर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
6. सन 2012 से 2017 के बीच जिले में हुए राजस्व फैसलों की समीक्षा हाई कोर्ट के जज से कराई जाय, इन वर्षों में जिले में हुए भूमि आवंटन की जनसुनवाई व समीक्षा की जाय।
7. सीलिंग एक्ट में निकल रही हजारों हेक्टेयर जमीन आज भी कई गांवों में बेनामी है । उन्हें चिन्हित कर गरीबों में वितरित किया जाय।
8. हत्यारों का व इस घटना के जिम्मेदार लोगों का सम्बंध किस राजनीतिक दल से है इसका खुलासा किया जाय।
9. नर संहार में मारे गए लोगों के परिजनों को एक एक करोड़ रुपये का मुआवजा व उस जमीन का आवंटन किया जाय।

कृपया पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और सरकार से कहें कि वो सोनभद्र के आदिवासियों को न्याय दिलवाए।
 
हम लोगो का  साथ दें, ताकि आदिवासियों को न्याय मिल सके और  सुरक्षित रहें। 



आज — Peoples' Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR) आप पर भरोसा कर रहे हैं

Peoples' Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR) से "Shri Aditya Yogi Nath: #SonbhadraKeAdivasi सोनभद्र नरसंहार कांड के शिकार आदिवासी लोगो की वेदना सुनिए" के साथ आपकी सहायता की आवश्यकता है। Peoples' Vigilance Committee on Human Rights (PVCHR) और 883 और समर्थक आज से जुड़ें।