

आज़मगढ़ लोकसभा से बहुजन महिला-अतिपिछड़ी-पसमन्दा जाति का उम्मीदवार बनाया जाय
समस्या
मायावती जी एवं अखिलेश जी,
दिनांक 24 तारीख को ये घोषणा की गई है कि गठबंधन की तरफ से अखिलेश यादव जी आज़मगढ़ सीट से चुनाव लड़ेंगे। मेरी चिंता ये है कि जिस जिले में 1000 पुरुषों पर 1022 महिलाएं हैं औए यादव जाति के अलावा अतिपिछड़ी-पसमन्दा जाति के लोगों की भी संख्या ज्यादा है लेकिन 1957 से लेकर 2019 तक समाजवादी पार्टी ने सिर्फ यादव पुरुषों को इस सीट से चुनाव लड़ाया है और बहुजन समाज पार्टी ने सिर्फ एक बार ये सीट यादव के अलावा मुस्लिम पुरुष को दी थी। ऐसे में गठबंधन पर विश्वाश करना मेरे जैसी महिला मतदाताओं के लिए बेहद संशय भरा है। कई दशकों से अतिपिछड़े पसमन्दा जातियोम के लोग और बहुजन महिलाएं सपा बसपा को वोट देती आयी है और यादव पुरुष सत्ता में रहे हैं। क्या गठबंधन में अतिपिछड़ी-पसमन्दा-बहुजन महिलाओ का कोई हिस्सा नहीं है? क्या हम ये मान लें कि यादव पुरुषों के अलावा गठबंधन की नज़र में और कोई योग्य नहीं है? खास तौर पर जब आप वोट पॉलिटिक्स में संख्या पर आधारित राजनीति कर रहे हैं तो किसी पुरूष को लगातार टिकट देना प्रति 1000 पुरुषों पर उन 1022 महिलाओं के मैंडेट का अपमान है और उनको कोई भागीदारी नहीँ देना उनकी उपेक्षा को बढ़ावा देना है। मुझे उम्मीद है कि गठबंधन हमारे इस चिंता को समझ कर अतिपिछड़ा-पसमन्दा या बहुजन महिलाओं/ट्रांसजेंडर आदि में से किसी एक को आज़मगढ़ सीट पर उम्मीदवार बनाएगा।
कनकलता यादव
शोधार्थी, जेएनयू

समस्या
मायावती जी एवं अखिलेश जी,
दिनांक 24 तारीख को ये घोषणा की गई है कि गठबंधन की तरफ से अखिलेश यादव जी आज़मगढ़ सीट से चुनाव लड़ेंगे। मेरी चिंता ये है कि जिस जिले में 1000 पुरुषों पर 1022 महिलाएं हैं औए यादव जाति के अलावा अतिपिछड़ी-पसमन्दा जाति के लोगों की भी संख्या ज्यादा है लेकिन 1957 से लेकर 2019 तक समाजवादी पार्टी ने सिर्फ यादव पुरुषों को इस सीट से चुनाव लड़ाया है और बहुजन समाज पार्टी ने सिर्फ एक बार ये सीट यादव के अलावा मुस्लिम पुरुष को दी थी। ऐसे में गठबंधन पर विश्वाश करना मेरे जैसी महिला मतदाताओं के लिए बेहद संशय भरा है। कई दशकों से अतिपिछड़े पसमन्दा जातियोम के लोग और बहुजन महिलाएं सपा बसपा को वोट देती आयी है और यादव पुरुष सत्ता में रहे हैं। क्या गठबंधन में अतिपिछड़ी-पसमन्दा-बहुजन महिलाओ का कोई हिस्सा नहीं है? क्या हम ये मान लें कि यादव पुरुषों के अलावा गठबंधन की नज़र में और कोई योग्य नहीं है? खास तौर पर जब आप वोट पॉलिटिक्स में संख्या पर आधारित राजनीति कर रहे हैं तो किसी पुरूष को लगातार टिकट देना प्रति 1000 पुरुषों पर उन 1022 महिलाओं के मैंडेट का अपमान है और उनको कोई भागीदारी नहीँ देना उनकी उपेक्षा को बढ़ावा देना है। मुझे उम्मीद है कि गठबंधन हमारे इस चिंता को समझ कर अतिपिछड़ा-पसमन्दा या बहुजन महिलाओं/ट्रांसजेंडर आदि में से किसी एक को आज़मगढ़ सीट पर उम्मीदवार बनाएगा।
कनकलता यादव
शोधार्थी, जेएनयू

पेटीशन अपडेट
पेटीशन को शेयर करें
24 मार्च 2019 पर पेटीशन बनाई गई