स्टॉकिंग को बनाएं एक गैर-जमानती अपराध #TalkingStalking चुप्पी तोड़ो

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वो रात का वक्त था. मैं घर लौट रही थी. अचानक मैंने महसूस किया कि एक एसयूवी, मेरी कार का पीछा कर रही है. एसयूवी के अंदर दो आदमी थे. ऐसा लग रहा था जैसे मुझे छेड़ने में उन्हें मजा आ रहा हो. 

वो मेरी कार के आगे लहराने लगे. एक पल ऐसा आया जब उन्होंने मेरी गाड़ी के आगे अपनी एसयूवी लगा दी. पीछे बैठा शख्स, एसयूवी से उतरा और मेरी तरफ बढ़ने लगा. जितनी जल्दी हो सकता था, मैंने अपनी कार रिवर्स की. लेकिन ये सब कुछ मिनट तक चलता रहा. जब तक कि मैंने पुलिस को कॉल नहीं किया और एक पीसीआर वैन मेरी मदद के लिए नहीं पहुंच गई. 

मैं अपनी सुरक्षा को लेकर बुरी तरह डर गई थी. उस रात क्या हो सकता था, सोच कर ही मैं कांप जाती हूं. अगर मुझे सही वक्त पर पुलिस से मदद नहीं मिलती तो ये घटना किडनैपिंग, यौन हमले या फिर उससे भी बड़े अपराध में तब्दील हो सकती थी.

मैंने तुरंत एक FIR दर्ज कराई लेकिन केस दर्ज कराने के चंद घंटे के भीतर, आरोपी जमानत पर बाहर आ चुका था. आरोपी, एक असरदार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है और मौजूदा कानून, स्टॉकिंग पीड़ितों के पक्ष में नहीं है.

मैं अकेली नहीं हूं. भारत में स्टॉकिंग की घटनाएं उफान पर हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े देखें तो ऐसे 80 फीसदी से ज्यादा आरोपियों को चार्जशीट दाखिल होने से पहले जमानत मिल जाती है

कई मामलों में जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी, पीड़ितों के लिए और भी खतरनाक बन जाते हैं. एसिड अटैक, रेप और यहां तक कि कत्ल की वारदातें भी हो सकती हैं.

इसीलिए, मैं वर्णिका कुंडू, द क्विंट के साथ स्टॉकिंग को गैर-जमानती अपराध बनाने की याचिका शुरू कर रही हूं

दो महीने पहले ही, 17 साल की लड़की को उत्तर प्रदेश के एक गांव में चार लड़कों ने कत्ल कर दिया. ये लड़के बीते चार महीनों से लड़की का पीछा कर रहे थे, उसे परेशान कर रहे थे. 

चेन्नई में 21 साल की एक लड़की को उसी के साथ पढ़े एक लड़के ने जिंदा जला दिया. लड़की का कुसूर सिर्फ इतना था कि उसने लड़के के शादी के प्रस्ताव को न कह दिया था.

अगर स्टॉकिंग इस देश में इतना आम अपराध तो क्यों न इसे गैर-जमानती बनाया जाए.

मैं कानून में सख्त और गैर-जमानती धाराएं जोड़ने के हक में हूं ताकि पीछा करने के इस अपराध यानी स्टॉकिंग से पीछा छुड़ाया जा सके. साथ ही उन अपराधों से भी जो स्टॉकिंग की वजह से सामने आते हैं. किसी को परेशान करने से पहले हर स्टॉकर को दो बार सोचना पड़े.

स्टॉकिंग को गैर-जमानती अपराध बनाने की इस मुहिम में मैंने सांसद डॉ. शशि थरूर और द क्विंट के साथ हाथ मिलाया है.

अगर हमें आप जैसे हजारों लोगों का साथ मिलता है तो डॉ. थरूर इस याचिका को प्राइवेट बिल के तौर पर संसद के शीतकालीन सत्र में पेश कर सकते हैं. 

अब वक्त आ गया है ये तय करने का कि इस देश के कानून बनाने वाले लोग स्टॉकिंग को एक गंभीर अपराध मानें. 

इस लड़ाई में जुड़िए मेरे साथ. आइए, हम सब स्टॉकिंग के प्रति एक कड़ा रुख अपनाएं.

अगर आप भी स्टॉकिंग का शिकार हुए हैं या हो रहे हैं तो चुप्पी तोड़ें और अपने अनुभव हमें इस नंबर पर भेजें- +91 9910181818



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