After The Quint fake story, It's time to come clean for Media Owners & Journalists

समस्या

वरिष्ठ मीडियाकर्मी राघव बहल द्वारा शुरू की गयी वेबसाइट ‘क्विंट’ ने हाल ही में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के सन्दर्भ में एक मनगढ़ंत और झूठी खबर छापी l इस खबर में ‘क्विंट’ ने कुलभूषण जाधव को भारत का जासूस करार दिया और इस तरह पाकिस्तान के एक सफ़ेद झूठ को ‘मान्यता’ दे दी l हालाँकि बाद में ‘क्विंट’ ने इस स्टोरी को वापस ले लिया,लेकिन देश को जो नुक्सान होना था वो हो चुका है l पाकिस्तान का मीडिया ही नहीं सरकारी एजेंसियां भी अपने झूठ को सच साबित करने के लिए अब ‘क्विंट’ की इस स्टोरी का इस्तेमाल कर रही हैं l इसलिए यह सवाल उठने जायज़ हैं कि कहीं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ही पैसे देकर तो यह स्टोरी नहीं छपवाई ? इस आशंका से इसलिए भी इनकार नहीं किया जा सकता क्यूंकि--

 मीडिया में भ्रष्टाचार है, सभी जानते हैं l (एल्डमेन ट्रस्ट ने 2017 में एक सर्वेक्षण के बाद भारतीय मीडिया को विश्व का दूसरा सबसे भ्रष्ट मीडिया बताया था ) दर्जनों ऐसे पत्रकार और मीडिया मालिक हैं जिन्होंने दो दशक में इतना पैसा कमा लिया कि अब वो बड़े- बड़े फार्म हाउस में रहते हैं , बेहद महँगी लग्सरी कारों में घूमते हैं l बड़े-बड़े मॉल्स, शॉपिंग और रेजिडेंशल कोम्प्लेक्सेस में उन्होंने निवेश किया है l ऐसा भी कहा जा रहा है कि कई पत्रकारों ने दुबई और न्यूयॉर्क शहर में फ्लैट खरीदें हैं l क्या सिर्फ पत्रकारिता करके इतने पैसे कमाए जा सकते हैं ? नहीं l तो फिर मीडियाकर्मियों के पास इतना पैसा आया कहाँ से ? कहीं इस पैसे का स्रोत ISI या इस तरह की अन्य देशद्रोही ताकतें तो नहीं ?

इसलिए भारत में मीडिया और पत्रकारों की विश्वसनीयता को बनाए रखने और पारदर्शिता के लिए कुछ बड़े कदम उठाने ज़रूरी हैं l सबसे ज़रूरी यह है कि सरकार पत्रकारों की आय और सम्पतियों की जांच कराये l

इसके अतिरिक्त ‘क्विंट’ की फर्जी स्टोरी के बाद यह ज़रूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें यह नियम बना दें कि मान्यता प्राप्त सभी पत्रकार / मीडिया मालिक प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो या राज्य सूचना विभाग में अपनी सम्पति का ब्यौरा दें l यह ब्यौरा प्रेस इनफार्मेशन के पास सुरक्षित रहेगा l पर साथ ही यह प्रावधान भी हो कि ज़रूरत पड़ने पर देश का कोई भी नागरिक RTI ( सूचना का अधिकार ) लगा कर यह जानकारी हासिल कर सकता है l

जो पत्रकार / मीडिया मालिक अपनी सम्पति का विवरण न दें या गलत विवरण दें उनकी मान्यता रद्द कर दी जाए l  

 

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ashok shrivastavपेटीशन स्टार्टर
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वरिष्ठ मीडियाकर्मी राघव बहल द्वारा शुरू की गयी वेबसाइट ‘क्विंट’ ने हाल ही में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के सन्दर्भ में एक मनगढ़ंत और झूठी खबर छापी l इस खबर में ‘क्विंट’ ने कुलभूषण जाधव को भारत का जासूस करार दिया और इस तरह पाकिस्तान के एक सफ़ेद झूठ को ‘मान्यता’ दे दी l हालाँकि बाद में ‘क्विंट’ ने इस स्टोरी को वापस ले लिया,लेकिन देश को जो नुक्सान होना था वो हो चुका है l पाकिस्तान का मीडिया ही नहीं सरकारी एजेंसियां भी अपने झूठ को सच साबित करने के लिए अब ‘क्विंट’ की इस स्टोरी का इस्तेमाल कर रही हैं l इसलिए यह सवाल उठने जायज़ हैं कि कहीं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ही पैसे देकर तो यह स्टोरी नहीं छपवाई ? इस आशंका से इसलिए भी इनकार नहीं किया जा सकता क्यूंकि--

 मीडिया में भ्रष्टाचार है, सभी जानते हैं l (एल्डमेन ट्रस्ट ने 2017 में एक सर्वेक्षण के बाद भारतीय मीडिया को विश्व का दूसरा सबसे भ्रष्ट मीडिया बताया था ) दर्जनों ऐसे पत्रकार और मीडिया मालिक हैं जिन्होंने दो दशक में इतना पैसा कमा लिया कि अब वो बड़े- बड़े फार्म हाउस में रहते हैं , बेहद महँगी लग्सरी कारों में घूमते हैं l बड़े-बड़े मॉल्स, शॉपिंग और रेजिडेंशल कोम्प्लेक्सेस में उन्होंने निवेश किया है l ऐसा भी कहा जा रहा है कि कई पत्रकारों ने दुबई और न्यूयॉर्क शहर में फ्लैट खरीदें हैं l क्या सिर्फ पत्रकारिता करके इतने पैसे कमाए जा सकते हैं ? नहीं l तो फिर मीडियाकर्मियों के पास इतना पैसा आया कहाँ से ? कहीं इस पैसे का स्रोत ISI या इस तरह की अन्य देशद्रोही ताकतें तो नहीं ?

इसलिए भारत में मीडिया और पत्रकारों की विश्वसनीयता को बनाए रखने और पारदर्शिता के लिए कुछ बड़े कदम उठाने ज़रूरी हैं l सबसे ज़रूरी यह है कि सरकार पत्रकारों की आय और सम्पतियों की जांच कराये l

इसके अतिरिक्त ‘क्विंट’ की फर्जी स्टोरी के बाद यह ज़रूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें यह नियम बना दें कि मान्यता प्राप्त सभी पत्रकार / मीडिया मालिक प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो या राज्य सूचना विभाग में अपनी सम्पति का ब्यौरा दें l यह ब्यौरा प्रेस इनफार्मेशन के पास सुरक्षित रहेगा l पर साथ ही यह प्रावधान भी हो कि ज़रूरत पड़ने पर देश का कोई भी नागरिक RTI ( सूचना का अधिकार ) लगा कर यह जानकारी हासिल कर सकता है l

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