काशी की पवित्रता, वैदिक ज्ञान और हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए हमारा साथ दें।

समस्या

वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, अपनी प्राचीनता, पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ के घाट, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित, सदियों से धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। दुर्भाग्यवश, हाल के वर्षों में इन घाटों पर नशीली पदार्थों का सेवन और बिक्री एक गंभीर समस्या बन गई है, जिससे इनकी पवित्रता और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँच रही है।

विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि जिन घाटों पर आरती, पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्य होते हैं, वहाँ भी शराब, सिगरेट और अन्य नशीली पदार्थों की बिक्री और सेवन खुलेआम हो रहा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस गंभीर समस्या का कोई पुरजोर विरोध नहीं कर रहा है। घाटों पर आने-जाने वाले बच्चों, छात्रों, लड़कों और लड़कियों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है। बार-बार नशा करने वालों को देखकर उनके मन में भी इन पदार्थों के प्रति जिज्ञासा पैदा होती है, जिससे कई युवा इनका सेवन शुरू कर देते हैं।

शिवाला घाट, जो काशी का एकमात्र ऐसा घाट है जहाँ नित्य वेदों का पाठ किया जाता है, इस समस्या से विशेष रूप से प्रभावित है। यहाँ पर शिवबोध जी द्वारा वैदिक पद्धति से गंगा आरती का आयोजन किया जाता है,

आरती देखें -

 

जो अन्य घाटों पर होनेवाली आरतियों से कई मायनों में भिन्न और अद्वितीय है। यह आरती न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि वैदिक ज्ञान और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। यहाँ  लोगों को वेदों और वेदांगों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जो बच्चों से लेकर सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध है। 

लेकिन अत्यंत दुःख की बात है कि इस पवित्र और अद्वितीय कार्यक्रम को स्थानीय गुंडों द्वारा बाधित किया जा रहा है। गंगा आरती करने वालों को जान से मारने की धमकी दी गई है और उन्हें आरती करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है, जिसके कारण पंडितों को वहाँ से भगा दिया गया है।

हमारा मानना है कि:

वाराणसी के घाटों की पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना हमारा कर्तव्य है।
वैदिक ज्ञान और हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना अनिवार्य है।
धार्मिक स्वतंत्रता का हनन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसलिए, हम प्रशासन से निम्नलिखित मांगों के साथ इस याचिका पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध करते हैं:

वाराणसी के सभी घाटों को नशा मुक्त किया जाए।
शिवाला घाट पर वैदिक गंगा आरती की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और इसे बिना किसी बाधा के जारी रखने की अनुमति दी जाए।
गुंडों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और दोषियों को दंडित किया जाए।
घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
आपके एक हस्ताक्षर से हम काशी की पवित्रता, वैदिक ज्ञान और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इसे अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा करें।

avatar of the starter
avikalp Shivbodhपेटीशन स्टार्टरShivbodh Avikalp, devoted to Shiva Shakti, strives to elevate lives through Vedic knowledge and culture. He leads the unique Vedic Ganga Aarti at Varanasi's Shivala Ghat. See more at <a href="http://www.shivbodh.org" rel="nofollow">www.shivbodh.org</a>

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समस्या

वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, अपनी प्राचीनता, पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ के घाट, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित, सदियों से धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। दुर्भाग्यवश, हाल के वर्षों में इन घाटों पर नशीली पदार्थों का सेवन और बिक्री एक गंभीर समस्या बन गई है, जिससे इनकी पवित्रता और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँच रही है।

विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि जिन घाटों पर आरती, पूजा-पाठ जैसे धार्मिक कार्य होते हैं, वहाँ भी शराब, सिगरेट और अन्य नशीली पदार्थों की बिक्री और सेवन खुलेआम हो रहा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस गंभीर समस्या का कोई पुरजोर विरोध नहीं कर रहा है। घाटों पर आने-जाने वाले बच्चों, छात्रों, लड़कों और लड़कियों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है। बार-बार नशा करने वालों को देखकर उनके मन में भी इन पदार्थों के प्रति जिज्ञासा पैदा होती है, जिससे कई युवा इनका सेवन शुरू कर देते हैं।

शिवाला घाट, जो काशी का एकमात्र ऐसा घाट है जहाँ नित्य वेदों का पाठ किया जाता है, इस समस्या से विशेष रूप से प्रभावित है। यहाँ पर शिवबोध जी द्वारा वैदिक पद्धति से गंगा आरती का आयोजन किया जाता है,

आरती देखें -

 

जो अन्य घाटों पर होनेवाली आरतियों से कई मायनों में भिन्न और अद्वितीय है। यह आरती न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि वैदिक ज्ञान और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। यहाँ  लोगों को वेदों और वेदांगों का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जो बच्चों से लेकर सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपलब्ध है। 

लेकिन अत्यंत दुःख की बात है कि इस पवित्र और अद्वितीय कार्यक्रम को स्थानीय गुंडों द्वारा बाधित किया जा रहा है। गंगा आरती करने वालों को जान से मारने की धमकी दी गई है और उन्हें आरती करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है, जिसके कारण पंडितों को वहाँ से भगा दिया गया है।

हमारा मानना है कि:

वाराणसी के घाटों की पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
युवा पीढ़ी को नशे के दुष्प्रभाव से बचाना हमारा कर्तव्य है।
वैदिक ज्ञान और हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना अनिवार्य है।
धार्मिक स्वतंत्रता का हनन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसलिए, हम प्रशासन से निम्नलिखित मांगों के साथ इस याचिका पर हस्ताक्षर करने का अनुरोध करते हैं:

वाराणसी के सभी घाटों को नशा मुक्त किया जाए।
शिवाला घाट पर वैदिक गंगा आरती की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और इसे बिना किसी बाधा के जारी रखने की अनुमति दी जाए।
गुंडों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और दोषियों को दंडित किया जाए।
घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
आपके एक हस्ताक्षर से हम काशी की पवित्रता, वैदिक ज्ञान और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इसे अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा करें।

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19 जनवरी 2025 पर पेटीशन बनाई गई