

उत्तराखंड: हम हमारे राज्य के हर हेल्थ सेंटर में बेहतर सुविधाएं और इलाज की मांग करते हैं


उत्तराखंड: हम हमारे राज्य के हर हेल्थ सेंटर में बेहतर सुविधाएं और इलाज की मांग करते हैं
समस्या
आज एक कान के दर्द के लिए भी उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में रहने वालों को देहरादून आना पड़ता है।
सोचिए प्रसव की पीड़ा सहती महिला को आराम नहीं, सफ़र करना पड़ता है और यह भी तय नही होता के वो हॉस्पिटल वक्त पर पहुँच पाएगी भी या नहीं।
देखा तो ये भी गया कि एम्बुलेंस रास्ते में उन्हें रोक देगी यह कहके के आगे हमारा एरिया नहीं है दूसरी एम्बुलेंस बुलायें।
उत्तराखंड मातृशक्ति के लिए जाना जाता है फिर हमारी माताओं-बहनों की ऐसी दुर्दशा क्यूूँ?
मैं इस पेटीशन से #PahadKiPukar अभियान की शुरुआत कर रही हूँ। मेरा साथ दें। इस पेटीशन को साइन करें और इतना शेयर करें कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर हो।
25 वर्षीय सुनीता की गंभीर हालत में घर पर बच्चे को जन्म देते समय तबीयत बिगड़ने लगी। दूरसंचार सुविधाओं की कमी के कारण, चिकित्सा परामर्श या एम्बुलेंस को कॉल करना कोई विकल्प नहीं था।
असहाय, ग्रामीणों ने सुनीता को एक कुर्सी पर अस्पताल ले जाने का फैसला किया और मुख्य सड़क की ओर चलना शुरू कर दिया जो गाँव से 3 किलोमीटर दूर थी। सुनीता और उसके बच्चे की मुख्य सड़क पर पहुंचने से पहले ही मौत हो गई।
हम मिलकर ऐसी हज़ारों महिलाओं की जान बचा सकते हैं। मेरी पेटीशन शेयर करें।
उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में फिर भी स्वास्थ्य व्यवस्था थोड़ी बेहतर है। बड़े अस्पताल हैं, डॉक्टर हैं। पर कई पहाड़ी इलाके, खासकर गाँव भगवान भरोसे ही हैं। वहाँ एंबुलेंस नहीं जाती बल्कि लोग मरीज़ को कंधे, खाट या कुर्सी पर ले जाते हैं।
इसलिए मैं उत्तराखंड की सभी राजनीतिक पार्टियों से मांग करती हूँ कि वो प्रदेश की जनता से वादा करें कि वो स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता बनाएंगे। मैं इन मांगों को उनके मैनिफेस्टो में देखना चाहती हूँ और चाहती हूँ कि जो भी सरकार चुनकर आए वो हमारे प्रदेश के लोगों के लिए ये कदम उठाए:
-हर ग्राम पंचायत के हेल्थ सेंटर में गायनेकोलॉजिस्ट, फ़ीज़ीशियन व ट्रॉमा सेंटर का होना अनिवार्य करें।
-X-ray, इंक्यूबेशन चेंबर, अल्ट्रसाउंड, MRI, CT स्कैन, ऑक्सीजन बेड समेत सभी उपकरण की मौजूदगी हो और रखरखाव पर ध्यान दिया जाए।
-वहाँ डॉक्टरों की तैनाती 24/7 हो ताकि किसी भी समय बीमार को इलाज मिले, खासकर गर्भवती महिलाओं की समय रहते डिलीवरी हो सके।
-108 एंबुलेंस सेवा को अपग्रेड करें ताकि वो लंबी दूरी पर भी जाएं, साथ ही एंबुलेंस आने में बिना कारण देरी होने पर दंड का प्रावधान किया जाए और एंबुलेंस की संख्या को बढ़ाया जाए।
आइये मिलकर प्रयास करें कि ताकि पहाड़ी इलाकों के हेल्थ सेंटर ही इतने सशक्त हों कि मरीज़ को कहीं और ना जाना पड़े।
आशा है जल्द पहाड़ों में महिलाओं व बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं कि लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
-डॉक्टर आँचल शर्मा
द अर्थ एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव

समस्या
आज एक कान के दर्द के लिए भी उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में रहने वालों को देहरादून आना पड़ता है।
सोचिए प्रसव की पीड़ा सहती महिला को आराम नहीं, सफ़र करना पड़ता है और यह भी तय नही होता के वो हॉस्पिटल वक्त पर पहुँच पाएगी भी या नहीं।
देखा तो ये भी गया कि एम्बुलेंस रास्ते में उन्हें रोक देगी यह कहके के आगे हमारा एरिया नहीं है दूसरी एम्बुलेंस बुलायें।
उत्तराखंड मातृशक्ति के लिए जाना जाता है फिर हमारी माताओं-बहनों की ऐसी दुर्दशा क्यूूँ?
मैं इस पेटीशन से #PahadKiPukar अभियान की शुरुआत कर रही हूँ। मेरा साथ दें। इस पेटीशन को साइन करें और इतना शेयर करें कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर हो।
25 वर्षीय सुनीता की गंभीर हालत में घर पर बच्चे को जन्म देते समय तबीयत बिगड़ने लगी। दूरसंचार सुविधाओं की कमी के कारण, चिकित्सा परामर्श या एम्बुलेंस को कॉल करना कोई विकल्प नहीं था।
असहाय, ग्रामीणों ने सुनीता को एक कुर्सी पर अस्पताल ले जाने का फैसला किया और मुख्य सड़क की ओर चलना शुरू कर दिया जो गाँव से 3 किलोमीटर दूर थी। सुनीता और उसके बच्चे की मुख्य सड़क पर पहुंचने से पहले ही मौत हो गई।
हम मिलकर ऐसी हज़ारों महिलाओं की जान बचा सकते हैं। मेरी पेटीशन शेयर करें।
उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में फिर भी स्वास्थ्य व्यवस्था थोड़ी बेहतर है। बड़े अस्पताल हैं, डॉक्टर हैं। पर कई पहाड़ी इलाके, खासकर गाँव भगवान भरोसे ही हैं। वहाँ एंबुलेंस नहीं जाती बल्कि लोग मरीज़ को कंधे, खाट या कुर्सी पर ले जाते हैं।
इसलिए मैं उत्तराखंड की सभी राजनीतिक पार्टियों से मांग करती हूँ कि वो प्रदेश की जनता से वादा करें कि वो स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिकता बनाएंगे। मैं इन मांगों को उनके मैनिफेस्टो में देखना चाहती हूँ और चाहती हूँ कि जो भी सरकार चुनकर आए वो हमारे प्रदेश के लोगों के लिए ये कदम उठाए:
-हर ग्राम पंचायत के हेल्थ सेंटर में गायनेकोलॉजिस्ट, फ़ीज़ीशियन व ट्रॉमा सेंटर का होना अनिवार्य करें।
-X-ray, इंक्यूबेशन चेंबर, अल्ट्रसाउंड, MRI, CT स्कैन, ऑक्सीजन बेड समेत सभी उपकरण की मौजूदगी हो और रखरखाव पर ध्यान दिया जाए।
-वहाँ डॉक्टरों की तैनाती 24/7 हो ताकि किसी भी समय बीमार को इलाज मिले, खासकर गर्भवती महिलाओं की समय रहते डिलीवरी हो सके।
-108 एंबुलेंस सेवा को अपग्रेड करें ताकि वो लंबी दूरी पर भी जाएं, साथ ही एंबुलेंस आने में बिना कारण देरी होने पर दंड का प्रावधान किया जाए और एंबुलेंस की संख्या को बढ़ाया जाए।
आइये मिलकर प्रयास करें कि ताकि पहाड़ी इलाकों के हेल्थ सेंटर ही इतने सशक्त हों कि मरीज़ को कहीं और ना जाना पड़े।
आशा है जल्द पहाड़ों में महिलाओं व बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं कि लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
-डॉक्टर आँचल शर्मा
द अर्थ एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव

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13 नवंबर 2021 पर पेटीशन बनाई गई
