महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी पर लगी रोक के फैसले को वापस लें


महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी पर लगी रोक के फैसले को वापस लें
समस्या
दोस्तों,
“कंगाली में आटा गीला”
हिंदी की ये कहावत कोरोना वायरस के समय सच हो जाएगी, कौन जानता था। पिछले दिनों भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में बढ़ोतरी को रोक दिया है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों के डीए में डेढ़ साल तक कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी।
इस फैसले से केंद्र के 48 लाख कर्मचारियों और (सेना के जवान सहित) और 65 लाख पेंशनधारियों की पेंशन पर एक तरह से कैंची चल जाएगी, उन्हें बड़ा नुकसान होगा। कई कर्मचारी यूनियनों ने इस फैसले का विरोध किया है।
जो सरकारी कर्मचारी कोरोना की महामारी में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खतरे के बावजूद देश के लिए रोज़ काम पर जा रहे हैं, ऐसे में उनकी जेब पर हाथ डालना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वो भी तब जबकि रेलवे से लेकर पोस्टल विभाग तक के कर्मचारियों ने पीएम केयर्स फंड में भी अपना योगदान दिया।
इसकी मार बुज़ुर्ग पेंशनधारियों पर सबसे ज़्यादा पड़ेगी जिनके पास ज़िंदगी गुज़ारने के लिए पेंशन के सिवा कोई सहारा नहीं। कोरोना वायरस अपने साथ एक आर्थिक आपदो को लेकर आया है और सरकार के इस फैसले से ऐसे लाखों बुज़ुर्गों को बहुत बड़ा धक्का लगेगा।
सरकार के इस फैसले से कई कर्मचारी बहुत हतोत्साहित होंगे, उनपर बहुत दबाव पड़ेगा। एक ओर तो वो ज़मीनी स्तर पर कोरोना से लड़ाई में अपना योगदान दे रहे होंगे तो दूसरी ओर उन्हें घर के खर्चों की चिंता भी सताएगी।
इसीलिए मैं आप सबसे अनुरोध करता हूँ कि मेरी पेटीशन साइन/शेयर करें और माननीय प्रधानमंत्री जी से गुहार लगाएं कि वो इस फैसले को वापस लेकर देश के लाखों कर्मचारियों और बुज़ुर्गों का हौसला बढ़ाएं।

समस्या
दोस्तों,
“कंगाली में आटा गीला”
हिंदी की ये कहावत कोरोना वायरस के समय सच हो जाएगी, कौन जानता था। पिछले दिनों भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) में बढ़ोतरी को रोक दिया है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारियों के डीए में डेढ़ साल तक कोई बढ़ोत्तरी नहीं होगी।
इस फैसले से केंद्र के 48 लाख कर्मचारियों और (सेना के जवान सहित) और 65 लाख पेंशनधारियों की पेंशन पर एक तरह से कैंची चल जाएगी, उन्हें बड़ा नुकसान होगा। कई कर्मचारी यूनियनों ने इस फैसले का विरोध किया है।
जो सरकारी कर्मचारी कोरोना की महामारी में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खतरे के बावजूद देश के लिए रोज़ काम पर जा रहे हैं, ऐसे में उनकी जेब पर हाथ डालना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वो भी तब जबकि रेलवे से लेकर पोस्टल विभाग तक के कर्मचारियों ने पीएम केयर्स फंड में भी अपना योगदान दिया।
इसकी मार बुज़ुर्ग पेंशनधारियों पर सबसे ज़्यादा पड़ेगी जिनके पास ज़िंदगी गुज़ारने के लिए पेंशन के सिवा कोई सहारा नहीं। कोरोना वायरस अपने साथ एक आर्थिक आपदो को लेकर आया है और सरकार के इस फैसले से ऐसे लाखों बुज़ुर्गों को बहुत बड़ा धक्का लगेगा।
सरकार के इस फैसले से कई कर्मचारी बहुत हतोत्साहित होंगे, उनपर बहुत दबाव पड़ेगा। एक ओर तो वो ज़मीनी स्तर पर कोरोना से लड़ाई में अपना योगदान दे रहे होंगे तो दूसरी ओर उन्हें घर के खर्चों की चिंता भी सताएगी।
इसीलिए मैं आप सबसे अनुरोध करता हूँ कि मेरी पेटीशन साइन/शेयर करें और माननीय प्रधानमंत्री जी से गुहार लगाएं कि वो इस फैसले को वापस लेकर देश के लाखों कर्मचारियों और बुज़ुर्गों का हौसला बढ़ाएं।

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29 अप्रैल 2020 पर पेटीशन बनाई गई