

हमारे प्यारे देश भारत में भीड़ की हिंसा (मॉब लिंचिंग) के खिलाफ कड़ा कानून बनाएं
समस्या
कोरोना वायरस के इस भयानक दौर में शहरों से लेकर इंसानों तक हर कोई लॉकडाउन में है, पर हमारे देश में हिंसा पर कोई लॉकडाउन नहीं है। तो महाराष्ट्र के पालघर से 3 लोगों की लिंचिंग की भयानक खबर आती है।
ये पहला मौका नहीं है जब हमारे देश में एक हिंसक और खून की प्यासी भीड़ ने किसी को पीट-पीटकर मार डाला हो। पिछले 5 सालों में भारत में लिंचिंग की कई घटनाएं हुई हैं। आज तक लिंचिग के शिकार इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह, पहलू खान, तबरेज़ अंसारी और अखलाक़ जैसे बेगुनाह भारतियों को इंसाफ़ नहीं मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 के अपने एक फैसले में केंद्र सरकार को भीड़ की हिंसा (मॉब लिंचिंग) पर एक कड़ा कानून बनाने के निर्देश दिए थे। पर इस दिशा में सरकार की तरफ़ से कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया जा सका है।
इसके बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा नोटिस जारी कर केंद्र और राज्य सरकारों से मॉब लिंचिंग रोकने को लेकर उठाए गए कदमों पर जवाब माँगा था।
अब वक्त आ गया है कि भारत सरकार भीड़ की हिंसा (मॉब लिंचिंग) के खिलाफ़ एक कड़ा कानून बनाए। कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी में भी मॉब लिंचिंग हो रही है, इसका सीधा मतलब है कि लिचिंग भी एक बड़ी बीमारी है। लिंचिंग पर भी लॉकडाउन होना चाहिए।
समय आ गया है कि सरकार मॉब लिंचिंग जैसे जघन्य अपराध में शामिल लोगों को इतनी कठोर सज़ा दे कि लोगों की सोच बदले और कानून का डर पैदा हो। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इंसाफ़ कोर्ट में होगा ना कि सड़कों पर किसी को पीट-पीटकर मार के।
मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार लगाता हूँ कि वो केंद्र और राज्य सरकारों को मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून बनाने के अपने निर्देश को दुबारा से याद कराए। यदि वो कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते तो इसपर कोर्ट द्वारा सख्त कार्रवाई की जाए।
मैं आप सबसे अनुरोध करता हूँ कि मेरी पेटीशन साइन कर अपनी आवाज़ उठाएं। ताकि ये आवाज़ सरकार और कोर्ट तक पहुँचे और वो हमारे प्यारे भारत देश को मॉब लिंचिंग से बचाएं।
Image Credit: News18

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समस्या
कोरोना वायरस के इस भयानक दौर में शहरों से लेकर इंसानों तक हर कोई लॉकडाउन में है, पर हमारे देश में हिंसा पर कोई लॉकडाउन नहीं है। तो महाराष्ट्र के पालघर से 3 लोगों की लिंचिंग की भयानक खबर आती है।
ये पहला मौका नहीं है जब हमारे देश में एक हिंसक और खून की प्यासी भीड़ ने किसी को पीट-पीटकर मार डाला हो। पिछले 5 सालों में भारत में लिंचिंग की कई घटनाएं हुई हैं। आज तक लिंचिग के शिकार इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह, पहलू खान, तबरेज़ अंसारी और अखलाक़ जैसे बेगुनाह भारतियों को इंसाफ़ नहीं मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 के अपने एक फैसले में केंद्र सरकार को भीड़ की हिंसा (मॉब लिंचिंग) पर एक कड़ा कानून बनाने के निर्देश दिए थे। पर इस दिशा में सरकार की तरफ़ से कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया जा सका है।
इसके बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा नोटिस जारी कर केंद्र और राज्य सरकारों से मॉब लिंचिंग रोकने को लेकर उठाए गए कदमों पर जवाब माँगा था।
अब वक्त आ गया है कि भारत सरकार भीड़ की हिंसा (मॉब लिंचिंग) के खिलाफ़ एक कड़ा कानून बनाए। कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी में भी मॉब लिंचिंग हो रही है, इसका सीधा मतलब है कि लिचिंग भी एक बड़ी बीमारी है। लिंचिंग पर भी लॉकडाउन होना चाहिए।
समय आ गया है कि सरकार मॉब लिंचिंग जैसे जघन्य अपराध में शामिल लोगों को इतनी कठोर सज़ा दे कि लोगों की सोच बदले और कानून का डर पैदा हो। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इंसाफ़ कोर्ट में होगा ना कि सड़कों पर किसी को पीट-पीटकर मार के।
मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार लगाता हूँ कि वो केंद्र और राज्य सरकारों को मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून बनाने के अपने निर्देश को दुबारा से याद कराए। यदि वो कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते तो इसपर कोर्ट द्वारा सख्त कार्रवाई की जाए।
मैं आप सबसे अनुरोध करता हूँ कि मेरी पेटीशन साइन कर अपनी आवाज़ उठाएं। ताकि ये आवाज़ सरकार और कोर्ट तक पहुँचे और वो हमारे प्यारे भारत देश को मॉब लिंचिंग से बचाएं।
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