हाथरस केस में तुरंत कार्रवाई की गुहार: यौन शोषण पीड़िता की कहानी उसकी ज़ुबानी


हाथरस केस में तुरंत कार्रवाई की गुहार: यौन शोषण पीड़िता की कहानी उसकी ज़ुबानी
समस्या
ये रही पीड़िता की पूरी कहानी, उसके शब्दों में-
“साल 2021 में, हाथरस में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है। 2 महीने तक गौरव शर्मा मुझपे शादी करने का दबाव बनाता रहा--वो हमारे पड़ोस में ही रहता था पर मेरी उससे कोई जान-पहचान नहीं थी। लोग उसे गुंडा कहते थे, इसलिए मैंने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। मुझे नहीं पता था कि मेरे मुँह से निकला “ना” शब्द मेरे जीवन को नर्क बना देगा। 2 महीने बाद वो मेरे घर में आ धमका, मुझे कमर से पकड़ कर, मेरा हाथ मोड़कर कहता है, ‘शादी कर ले वरना उठाकर ले जाऊँगा’।
वो ज़बरदस्ती मेरे कपड़े उतारता, इससे पहले मेरे माता-पिता ने दौड़कर उसे रोका। पापा ने गुस्से में चिल्लाया, ‘छोड़ेंगे नहीं साले को’ और उसके खिलाफ़ शिकायत दर्ज की। लेकिन गौरव शर्मा बस 14 दिन जेल में रहा होगा। मेरे साथ जो हुआ मैं उसके सदमे से बाहर आती उससे पहले वो अपने राजनीतिक संबंधों की बदौलत बेल पर बाहर आ गया।
अगले दिन वो हमारे गाँव में आकर खुलेआम सबके सामने ऐलान करता है, ‘अगर अंबरीश शर्मा ने केस वापस नहीं लिया तो मैं उनके परिवार को मार डालूंगा।’ डर के मारे मैंने पुलिस से मदद की भीख मांगी कि हमें सुरक्षा दें पर उन्होंने कहा, ‘कुछ होने दो, उसके बाद देखेंगे।’ एक और पुलिस वाले ने हमें पीछे हटने की सलाह दी, ‘ये लोग बड़े लोग हैं, इनसे लड़ने के बारे में सोचना भी मत’।
हमारे परिवार को गाँव से अलग-थलग कर दिया गया, पड़ोसी कहते थे, ‘लड़की के बाप को सिर झुकाना ही पड़ता है।’ उन्होंने हमसे नाता तोड़ लिया इस डर से कि कहीं वो गुंडे उन्हें भी ना शिकार बना लें।
मैं हमेशा सोचती थी कि गौरव के खिलाफ मामले को वापस ले लूँ पर पापा पूछते थे-’वो किसी की बेटी के साथ छेड़छाड़ कर कैसे बच सकता है? आज तुम हो...कल कोई और लड़की होगी!’ 2 साल तक मुझे अपने आप को घर की चार दीवारी में कैद करना पड़ा--गौरव महीने में 7-8 बार पापा को धमकाने आता। एक बार तो उसने हाथ में बंदूक लेकर आधे घंटे तक पापा को दौड़ाया और चिल्लाता रहा, ‘केस वापस ले वरना मार दूंगा’।
अब पापा को याद करती हूँ तो सोचती हूँ कि कैसे वो अपने आप को मजबूत रखते थे। वो कहते थे, ‘अगर तुम बेटी के पिता हो तो तुम्हें बहादुर होना पड़ता है।’ लेकिन गौरव ने ऐसा किया कि मैं अपने पैदा होने पर अफ़सोस करती हूँ--वो हर जगह मेरा पीछा करता था, शादी के लिए धमकाता था। उसके आदमी पापा को धमकी देते थे, कहते थे, ‘तुम्हारी बेटी की ज़िंदगी बर्बाद कर देंगे’।
2 साल तक हम इस डर में जीते रहे कि कहीं हमारा मर्डर ना कर दिया जाए। हमने अपना अधिकार--सुरक्षा, बस वही तो मांगा था; लेकिन वो नहीं मिला। वो कहते रहे, ‘कुछ हो जाए तब कॉल करना’ और कुछ हो गया; सबसे भयावह घटना हो गई और हमारी मदद के लिए एक आदमी भी आगे नहीं आया।
उस दिन मैं मंदिर जाने के लिए घर से बाहर निकली थी। लेकिन जब मैं वापस आई तो गौरव की नव-विवाहित पत्नी और मासी वहाँ थीं। वो मुझे गाली देने लगीं--’कैसी-कैसी लड़कियाँ होती हैं’, ‘बह*च*द है इसका खानदान’ मैं दौड़कर पापा के पास भागी, वो खेतों में थे। मैंने रोकर उन्हें जो कुछ हुआ है बताया। तभी गौरव ने पापा को फोन किया और कहा, ‘मैं आ रहा हूँ तुम्हें आखिरी चेतावनी देने!’
मैं जानती थी पुलिस कुछ नहीं करेगी, लेकिन इसके बावजूद मैंने फोन कर सुरक्षा की भीख माँगी। ‘मैं बिजी हूँ। 112 पर कॉल कर लेना अगर कुछ होता है तो’, पुलिसवाले ने ये कहकर फोन काट दिया। उस दिन दोपहर 3.30 बजे के करीब पापा ने देखा कि गौरव और उसके 5 दोस्त खेतों की ओर आ रहे हैं। झड़प के बाद, गौरव ने पापा का गला पकड़कर कहा, ‘अब तुम्हारा टाइम आ गया है!’
उसके बाद सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि मैं अभी तक सोच-समझ नहीं पा रही हूँ। उन 6 लोगों ने हमारा पीछा किया और अपनी पिस्टल बाहर निकाल ली; जब वो हवा में गोलियां चलाने लगे तो माँ और मैं तो डर के मारे कहीं भाग ही नहीं पाए। जब तक हम कुछ प्रतिक्रिया देते, गौरव के एक साथी ने पापा के सिर पर बंदूक सटाकर गोली मार दी। 30 सेकेंड में पापा पर 5 और गोलियाँ चलाई गईं--पापा ज़मीन पर गिर गए और वो अपनी गाड़ी में फरार हो गए।
मैं मदद के लिए चीखती रही पर कोई आसपास नहीं था। पुलिस ने वहाँ आने में 1 घंटा लगा दिया--अस्पताल में पापा को मृत घोषित कर दिया गया। मैं अंदर से मरा हुआ महसूस कर रही थी, लेकिन जब मैं अपने 52 वर्षीय पिता की लाश को अपने कंधे पर लादकर घाट लेकर गई तब मुझे एहसास हुआ--उन्होंने पापा को मार दिया क्योंकि वो अपनी बेटी के साथ खड़े थे।
अगले दिन मैंने एक एफआईआर दर्ज की--पापा की हत्या को 15 दिन गुज़र गए पर उनका कातिल अभी भी फ़रार है। पुलिस का दावा है कि वो अभी गौरव को नहीं खोज पाए, लेकिन ये कैसे संभव है? मैं जानती हूँ वो उसे बचा रहे हैं क्योंकि वो एक नेता है।
आखिर कब तक यूपी की महिलाएं ये सब सहती रहेंगी? क्या गारंटी है कि कल को वो मुझे या मेरी माँ को गोली नहीं मारेगा? उसी खेत में शायद मेरी भी लाश मिले या गौरव के आदमी मेरा गैंगरेप कर दें और कोई अपनी पलक तक नहीं झपकाएगा!
आखिर हम महिलाओं को कबतक चोट दी जाती रहेगी, हमारा बलात्कार होता रहेगा, हमें मारा जाता रहेगा? पुलिस को कोई फर्क नहीं पड़ता, सरकार बस अपना वोट बैंक बचाना चाहती है और मर्द हमारे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं मानो हम उनकी जायदाद हों। ये वो भारत नहीं जहाँ मैं जीना चाहती हूँ--या तो गुनहगारों को पकड़िये या हम सबको मार दीजिए; रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरने से अच्छा है कि एक बार में ही मर जाएं।”
_____
2020 में यौन शोषण की शिकार पीड़िता, जिसके पिता को आरोपी ने पिछले हफ्ते गोली मार दी, वो न्याय की मांग कर रही है। ये पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि इस केस को फास्ट-ट्रैक किया जाए और इंसाफ़ हो सके। किसी परिवार के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए और समय आ गया है कि हम सब मिलकर अपनी आवाज़ उठाएं।
ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे इस लेख की सच्चाई की पूरी ज़िम्मेदारी लेता है, जो कि 10 मार्च, 2021 को पीड़िता द्वारा स्वयं हमें बताया गया। पीड़िता की कहानी उसकी पूरी सहमती के बाद ही शेयर की जा रही है और ये पेटीशन उसकी पूरी जानकारी और रज़ामंदी के बाद ही शुरू की गई है।
समस्या
ये रही पीड़िता की पूरी कहानी, उसके शब्दों में-
“साल 2021 में, हाथरस में महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है। 2 महीने तक गौरव शर्मा मुझपे शादी करने का दबाव बनाता रहा--वो हमारे पड़ोस में ही रहता था पर मेरी उससे कोई जान-पहचान नहीं थी। लोग उसे गुंडा कहते थे, इसलिए मैंने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। मुझे नहीं पता था कि मेरे मुँह से निकला “ना” शब्द मेरे जीवन को नर्क बना देगा। 2 महीने बाद वो मेरे घर में आ धमका, मुझे कमर से पकड़ कर, मेरा हाथ मोड़कर कहता है, ‘शादी कर ले वरना उठाकर ले जाऊँगा’।
वो ज़बरदस्ती मेरे कपड़े उतारता, इससे पहले मेरे माता-पिता ने दौड़कर उसे रोका। पापा ने गुस्से में चिल्लाया, ‘छोड़ेंगे नहीं साले को’ और उसके खिलाफ़ शिकायत दर्ज की। लेकिन गौरव शर्मा बस 14 दिन जेल में रहा होगा। मेरे साथ जो हुआ मैं उसके सदमे से बाहर आती उससे पहले वो अपने राजनीतिक संबंधों की बदौलत बेल पर बाहर आ गया।
अगले दिन वो हमारे गाँव में आकर खुलेआम सबके सामने ऐलान करता है, ‘अगर अंबरीश शर्मा ने केस वापस नहीं लिया तो मैं उनके परिवार को मार डालूंगा।’ डर के मारे मैंने पुलिस से मदद की भीख मांगी कि हमें सुरक्षा दें पर उन्होंने कहा, ‘कुछ होने दो, उसके बाद देखेंगे।’ एक और पुलिस वाले ने हमें पीछे हटने की सलाह दी, ‘ये लोग बड़े लोग हैं, इनसे लड़ने के बारे में सोचना भी मत’।
हमारे परिवार को गाँव से अलग-थलग कर दिया गया, पड़ोसी कहते थे, ‘लड़की के बाप को सिर झुकाना ही पड़ता है।’ उन्होंने हमसे नाता तोड़ लिया इस डर से कि कहीं वो गुंडे उन्हें भी ना शिकार बना लें।
मैं हमेशा सोचती थी कि गौरव के खिलाफ मामले को वापस ले लूँ पर पापा पूछते थे-’वो किसी की बेटी के साथ छेड़छाड़ कर कैसे बच सकता है? आज तुम हो...कल कोई और लड़की होगी!’ 2 साल तक मुझे अपने आप को घर की चार दीवारी में कैद करना पड़ा--गौरव महीने में 7-8 बार पापा को धमकाने आता। एक बार तो उसने हाथ में बंदूक लेकर आधे घंटे तक पापा को दौड़ाया और चिल्लाता रहा, ‘केस वापस ले वरना मार दूंगा’।
अब पापा को याद करती हूँ तो सोचती हूँ कि कैसे वो अपने आप को मजबूत रखते थे। वो कहते थे, ‘अगर तुम बेटी के पिता हो तो तुम्हें बहादुर होना पड़ता है।’ लेकिन गौरव ने ऐसा किया कि मैं अपने पैदा होने पर अफ़सोस करती हूँ--वो हर जगह मेरा पीछा करता था, शादी के लिए धमकाता था। उसके आदमी पापा को धमकी देते थे, कहते थे, ‘तुम्हारी बेटी की ज़िंदगी बर्बाद कर देंगे’।
2 साल तक हम इस डर में जीते रहे कि कहीं हमारा मर्डर ना कर दिया जाए। हमने अपना अधिकार--सुरक्षा, बस वही तो मांगा था; लेकिन वो नहीं मिला। वो कहते रहे, ‘कुछ हो जाए तब कॉल करना’ और कुछ हो गया; सबसे भयावह घटना हो गई और हमारी मदद के लिए एक आदमी भी आगे नहीं आया।
उस दिन मैं मंदिर जाने के लिए घर से बाहर निकली थी। लेकिन जब मैं वापस आई तो गौरव की नव-विवाहित पत्नी और मासी वहाँ थीं। वो मुझे गाली देने लगीं--’कैसी-कैसी लड़कियाँ होती हैं’, ‘बह*च*द है इसका खानदान’ मैं दौड़कर पापा के पास भागी, वो खेतों में थे। मैंने रोकर उन्हें जो कुछ हुआ है बताया। तभी गौरव ने पापा को फोन किया और कहा, ‘मैं आ रहा हूँ तुम्हें आखिरी चेतावनी देने!’
मैं जानती थी पुलिस कुछ नहीं करेगी, लेकिन इसके बावजूद मैंने फोन कर सुरक्षा की भीख माँगी। ‘मैं बिजी हूँ। 112 पर कॉल कर लेना अगर कुछ होता है तो’, पुलिसवाले ने ये कहकर फोन काट दिया। उस दिन दोपहर 3.30 बजे के करीब पापा ने देखा कि गौरव और उसके 5 दोस्त खेतों की ओर आ रहे हैं। झड़प के बाद, गौरव ने पापा का गला पकड़कर कहा, ‘अब तुम्हारा टाइम आ गया है!’
उसके बाद सबकुछ इतनी जल्दी हुआ कि मैं अभी तक सोच-समझ नहीं पा रही हूँ। उन 6 लोगों ने हमारा पीछा किया और अपनी पिस्टल बाहर निकाल ली; जब वो हवा में गोलियां चलाने लगे तो माँ और मैं तो डर के मारे कहीं भाग ही नहीं पाए। जब तक हम कुछ प्रतिक्रिया देते, गौरव के एक साथी ने पापा के सिर पर बंदूक सटाकर गोली मार दी। 30 सेकेंड में पापा पर 5 और गोलियाँ चलाई गईं--पापा ज़मीन पर गिर गए और वो अपनी गाड़ी में फरार हो गए।
मैं मदद के लिए चीखती रही पर कोई आसपास नहीं था। पुलिस ने वहाँ आने में 1 घंटा लगा दिया--अस्पताल में पापा को मृत घोषित कर दिया गया। मैं अंदर से मरा हुआ महसूस कर रही थी, लेकिन जब मैं अपने 52 वर्षीय पिता की लाश को अपने कंधे पर लादकर घाट लेकर गई तब मुझे एहसास हुआ--उन्होंने पापा को मार दिया क्योंकि वो अपनी बेटी के साथ खड़े थे।
अगले दिन मैंने एक एफआईआर दर्ज की--पापा की हत्या को 15 दिन गुज़र गए पर उनका कातिल अभी भी फ़रार है। पुलिस का दावा है कि वो अभी गौरव को नहीं खोज पाए, लेकिन ये कैसे संभव है? मैं जानती हूँ वो उसे बचा रहे हैं क्योंकि वो एक नेता है।
आखिर कब तक यूपी की महिलाएं ये सब सहती रहेंगी? क्या गारंटी है कि कल को वो मुझे या मेरी माँ को गोली नहीं मारेगा? उसी खेत में शायद मेरी भी लाश मिले या गौरव के आदमी मेरा गैंगरेप कर दें और कोई अपनी पलक तक नहीं झपकाएगा!
आखिर हम महिलाओं को कबतक चोट दी जाती रहेगी, हमारा बलात्कार होता रहेगा, हमें मारा जाता रहेगा? पुलिस को कोई फर्क नहीं पड़ता, सरकार बस अपना वोट बैंक बचाना चाहती है और मर्द हमारे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं मानो हम उनकी जायदाद हों। ये वो भारत नहीं जहाँ मैं जीना चाहती हूँ--या तो गुनहगारों को पकड़िये या हम सबको मार दीजिए; रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरने से अच्छा है कि एक बार में ही मर जाएं।”
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2020 में यौन शोषण की शिकार पीड़िता, जिसके पिता को आरोपी ने पिछले हफ्ते गोली मार दी, वो न्याय की मांग कर रही है। ये पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि इस केस को फास्ट-ट्रैक किया जाए और इंसाफ़ हो सके। किसी परिवार के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए और समय आ गया है कि हम सब मिलकर अपनी आवाज़ उठाएं।
ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे इस लेख की सच्चाई की पूरी ज़िम्मेदारी लेता है, जो कि 10 मार्च, 2021 को पीड़िता द्वारा स्वयं हमें बताया गया। पीड़िता की कहानी उसकी पूरी सहमती के बाद ही शेयर की जा रही है और ये पेटीशन उसकी पूरी जानकारी और रज़ामंदी के बाद ही शुरू की गई है।
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11 मार्च 2021 पर पेटीशन बनाई गई