दिल्ली के हर वार्ड में जच्चा बच्चा केंद्र खोले जाएँ

समस्या

सदियों से महिलाओं के दर्द व तकलीफ़ को समाज यह कहकर अनसुना कर देता है-

“थोड़ा बर्दाश्त कर लो!”

पर अब बर्दाश्त करने का नहीं, बदलाव का समय आ गया है। 

गर्भावस्था के दौरान सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के अनुभव में मौजूद है लाखों महिलाओं की ये तकलीफ - सही समय पर इलाज ना मिल पाने की, डॉक्टर से 5 मिनट मिलने के लिए 5 घंटे तक लाइन में खड़ा रहने की, प्राइवेट अस्पतालों का खर्च ना उठा पाने की तकलीफ़।

दिल्ली में रहने वाली मेरी दोस्त को अपनी गर्भावस्था के 9 महीनो में इन सभी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ा। चेक अप के लिए वो सरकारी अस्पताल सुबह 8 बजे पहुँचती और दवाई लेकर 4 बजे लौटती। ना बैठने की जगह, पैरों में सूजन लिए वो खड़ी रहती। जब डिलीवरी का समय आया तो डॉक्टर ने कहा की बड़े अस्पताल में लेकर जाना होगा। 

दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक सफदरजंग अस्पताल पहुँचे तो जाना की वहाँ लाइन इतनी लम्बी है की उसका नम्बर 3 दिन बाद आएगा। आर्थिक रूप से कमज़ोर उसके परिवार के पास प्राइवेट अस्पताल में जाने का विकल्प नहीं था। प्राइवेट अस्पतालों में तो डॉक्टर से मिलने के लिए भी हज़ारों देने पड़ते हैं डिलीवरी करवाना तो तो दूर की बात थी।

इस बीच मेरी दोस्त का दर्द असहनीय हो गया। घर वाले भागे-भागे उसे पास के नर्सिंग होम में ले गए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए मेरी दोस्त ने एक बेटी को जन्म तो दिया पर जन्म लेते ही वो बच्ची इस दुनिया से रुखसत हो गई। आँख भर आती है सोचकर कि उसपर क्या बीती होगी? 

जो तकलीफ़ और तनाव मेरी दोस्त को सहना पड़ा वो देश की किसी और महिला को ना सहनी पड़े इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है। मेरा साथ दें और मेरी पेटीशन साइन करें।  

बड़े सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधा का आभाव है। डॉक्टर की इतनी कमी है कि उनसे मिलने के लिए महिलाओं को घंटों इंतेज़ार करना पड़ता है। काम के बोझ में दबी सिस्टर ठीक से बात तक नहीं करती हैं। प्रसूति (डिलीवरी) वार्ड में तो दर्द में लिपट रही महिला को लेटने के लिए एक ख़ाली बिस्तर तक नहीं मिल पाता।

हाल ही में दिल्ली सरकार ने शहर में 100 महिला मोहल्ला क्लिनिक खोलने की घोषणा की है। अपनी पेटीशन द्वारा मैं दिल्ली सरकार से निवेदन कर रही हूँ की वे ख़ास गर्भवती महिलाओं के लिए जच्चा बच्चा केंद्र भी खोले, जहां गरीब वर्ग की महिलाएँ गर्भावस्था, डिलीवरी व उसके बाद की स्वास्थ्य सेवाएँ आसानी से प्राप्त कर पाएँ। 

सोचिए कि अगर दिल्ली के हर वॉर्ड में एक जच्चा-बच्चा केंद्र हो तो शायद माँ बनने का सुख, दुख में ना बदले। देरी के कारण महिला व शिशु की जान को खतरा नहीं होगा। मैं चाहती हूँ कि हमारी दिल्ली पूरे देश के लिए मॉडल बने।

मैं आशा करती हूँ की इस मुहिम में आप मेरा साथ देंगे और हमारी दिल्ली को महिलाओं व बच्चों के लिए बेहतर बनाएँगे।

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Tabassum Fatima Siddiqueपेटीशन स्टार्टर
यह पेटीशन 6,425 हस्ताक्षर जुट गई

समस्या

सदियों से महिलाओं के दर्द व तकलीफ़ को समाज यह कहकर अनसुना कर देता है-

“थोड़ा बर्दाश्त कर लो!”

पर अब बर्दाश्त करने का नहीं, बदलाव का समय आ गया है। 

गर्भावस्था के दौरान सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के अनुभव में मौजूद है लाखों महिलाओं की ये तकलीफ - सही समय पर इलाज ना मिल पाने की, डॉक्टर से 5 मिनट मिलने के लिए 5 घंटे तक लाइन में खड़ा रहने की, प्राइवेट अस्पतालों का खर्च ना उठा पाने की तकलीफ़।

दिल्ली में रहने वाली मेरी दोस्त को अपनी गर्भावस्था के 9 महीनो में इन सभी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ा। चेक अप के लिए वो सरकारी अस्पताल सुबह 8 बजे पहुँचती और दवाई लेकर 4 बजे लौटती। ना बैठने की जगह, पैरों में सूजन लिए वो खड़ी रहती। जब डिलीवरी का समय आया तो डॉक्टर ने कहा की बड़े अस्पताल में लेकर जाना होगा। 

दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक सफदरजंग अस्पताल पहुँचे तो जाना की वहाँ लाइन इतनी लम्बी है की उसका नम्बर 3 दिन बाद आएगा। आर्थिक रूप से कमज़ोर उसके परिवार के पास प्राइवेट अस्पताल में जाने का विकल्प नहीं था। प्राइवेट अस्पतालों में तो डॉक्टर से मिलने के लिए भी हज़ारों देने पड़ते हैं डिलीवरी करवाना तो तो दूर की बात थी।

इस बीच मेरी दोस्त का दर्द असहनीय हो गया। घर वाले भागे-भागे उसे पास के नर्सिंग होम में ले गए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए मेरी दोस्त ने एक बेटी को जन्म तो दिया पर जन्म लेते ही वो बच्ची इस दुनिया से रुखसत हो गई। आँख भर आती है सोचकर कि उसपर क्या बीती होगी? 

जो तकलीफ़ और तनाव मेरी दोस्त को सहना पड़ा वो देश की किसी और महिला को ना सहनी पड़े इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है। मेरा साथ दें और मेरी पेटीशन साइन करें।  

बड़े सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधा का आभाव है। डॉक्टर की इतनी कमी है कि उनसे मिलने के लिए महिलाओं को घंटों इंतेज़ार करना पड़ता है। काम के बोझ में दबी सिस्टर ठीक से बात तक नहीं करती हैं। प्रसूति (डिलीवरी) वार्ड में तो दर्द में लिपट रही महिला को लेटने के लिए एक ख़ाली बिस्तर तक नहीं मिल पाता।

हाल ही में दिल्ली सरकार ने शहर में 100 महिला मोहल्ला क्लिनिक खोलने की घोषणा की है। अपनी पेटीशन द्वारा मैं दिल्ली सरकार से निवेदन कर रही हूँ की वे ख़ास गर्भवती महिलाओं के लिए जच्चा बच्चा केंद्र भी खोले, जहां गरीब वर्ग की महिलाएँ गर्भावस्था, डिलीवरी व उसके बाद की स्वास्थ्य सेवाएँ आसानी से प्राप्त कर पाएँ। 

सोचिए कि अगर दिल्ली के हर वॉर्ड में एक जच्चा-बच्चा केंद्र हो तो शायद माँ बनने का सुख, दुख में ना बदले। देरी के कारण महिला व शिशु की जान को खतरा नहीं होगा। मैं चाहती हूँ कि हमारी दिल्ली पूरे देश के लिए मॉडल बने।

मैं आशा करती हूँ की इस मुहिम में आप मेरा साथ देंगे और हमारी दिल्ली को महिलाओं व बच्चों के लिए बेहतर बनाएँगे।

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Tabassum Fatima Siddiqueपेटीशन स्टार्टर

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फैसला लेने वाले

Delhi Deputy Chief Minister
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satyendra jain
satyendra jain
Rajendra Pal Gautam
Rajendra Pal Gautam
Delhi LG
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7 जुलाई 2021 पर पेटीशन बनाई गई