राजनीति की नूरा कुश्ती के शिकार MCD के शिक्षक 6 महीने से वेतन पेंशन के लिए तरसे

समस्या

जिस शहर में देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश, दिल्ली हाईकोर्ट, संसद, देश की तमाम मीडिया एजेंसियों, मानवाधिकार आयोग, जैसे शक्तिशाली लोग रहते हों, वहाँ सामाजिक मूल्यों में सर्वोच्च पदेन शिक्षकों को पाई पाई के लिए मोहताज़ कर दिया है। 6 महीनों का वक़्त बहुत बड़ा होता है, समझ नहीं आता कि कैसे जीवन यापन किया जाए। हर मंच पर आवाज़ उठाई है।महामहिम राष्ट्रपति से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सब जगह गुहार लगाई है। सड़क से लेकर राजघाट तक प्रदर्शन के मंच बने हैं, मगर कहीं से उफ़्फ़ की आवाज तक नहीं।

जिस देश, राज्य में संवेदनाओं को अपनी सत्ता के निहितार्थ इस्तेमाल किया जा रहा हो, जहां शासक का उद्देश्य सिर्फ अपने वोटर तैयार करना हो, जहाँ समस्याओं का समाधान ढूंढने की अपेक्षा आपसी आरोप प्रत्यारोप ही किया जाए, वहाँ मानवीय मूल्यों, संवेदनाओ के लिए कोई स्थान नहीं है। दिल्ली नगर निगम की सत्ता में काबिज होने या रहने के लिए शतरंज की बिसात पर मोहरे बनाकर चाल चली जा रही है। और मोहरे भी वो लोग बनाए गए हैं जो कोविड में राशन बांटने, अस्पतालों, डिस्पेंसरियों में जिम्मेदारी निभाने, मोर्चरी में कोविड से मरे हुए इंसानों की गिनती करने, घर घर जाकर सर्वे करने जैसी न जाने कितनी जिम्मेदारियों को चुपचाप देशहित में निभाते रहे। जिन्होंने जब स्कूल बंद थे तो अपने फोन और नेट से दिल्ली के गरीब बच्चों को गूगल मीट के माध्यम से शिक्षा देने के साथ साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी निभाया।

हम दिल्ली नगर निगम के शिक्षक समाज के हर मंच, हर जिम्मेदार नागरिक से आशा करते हैं कि इस पीड़ा में आप हमारा साथ दें। हमारी इस समस्या का समाधान जिस तरह से भी ही सके, उसमें हमारी मदद करें।

जय शिक्षक

जय भारत।

निवेदक:- सतेन्द्र कुमार नागर

एवं समस्त पीड़ित नगर निगम शिक्षक

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Satendra Nagarपेटीशन स्टार्टर
यह पेटीशन 10,826 हस्ताक्षर जुट गई

समस्या

जिस शहर में देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश, दिल्ली हाईकोर्ट, संसद, देश की तमाम मीडिया एजेंसियों, मानवाधिकार आयोग, जैसे शक्तिशाली लोग रहते हों, वहाँ सामाजिक मूल्यों में सर्वोच्च पदेन शिक्षकों को पाई पाई के लिए मोहताज़ कर दिया है। 6 महीनों का वक़्त बहुत बड़ा होता है, समझ नहीं आता कि कैसे जीवन यापन किया जाए। हर मंच पर आवाज़ उठाई है।महामहिम राष्ट्रपति से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सब जगह गुहार लगाई है। सड़क से लेकर राजघाट तक प्रदर्शन के मंच बने हैं, मगर कहीं से उफ़्फ़ की आवाज तक नहीं।

जिस देश, राज्य में संवेदनाओं को अपनी सत्ता के निहितार्थ इस्तेमाल किया जा रहा हो, जहां शासक का उद्देश्य सिर्फ अपने वोटर तैयार करना हो, जहाँ समस्याओं का समाधान ढूंढने की अपेक्षा आपसी आरोप प्रत्यारोप ही किया जाए, वहाँ मानवीय मूल्यों, संवेदनाओ के लिए कोई स्थान नहीं है। दिल्ली नगर निगम की सत्ता में काबिज होने या रहने के लिए शतरंज की बिसात पर मोहरे बनाकर चाल चली जा रही है। और मोहरे भी वो लोग बनाए गए हैं जो कोविड में राशन बांटने, अस्पतालों, डिस्पेंसरियों में जिम्मेदारी निभाने, मोर्चरी में कोविड से मरे हुए इंसानों की गिनती करने, घर घर जाकर सर्वे करने जैसी न जाने कितनी जिम्मेदारियों को चुपचाप देशहित में निभाते रहे। जिन्होंने जब स्कूल बंद थे तो अपने फोन और नेट से दिल्ली के गरीब बच्चों को गूगल मीट के माध्यम से शिक्षा देने के साथ साथ अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी निभाया।

हम दिल्ली नगर निगम के शिक्षक समाज के हर मंच, हर जिम्मेदार नागरिक से आशा करते हैं कि इस पीड़ा में आप हमारा साथ दें। हमारी इस समस्या का समाधान जिस तरह से भी ही सके, उसमें हमारी मदद करें।

जय शिक्षक

जय भारत।

निवेदक:- सतेन्द्र कुमार नागर

एवं समस्त पीड़ित नगर निगम शिक्षक

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फैसला लेने वाले

Manish Sisodia
Deputy Chief Minister, Delhi
Atishi
MLA, Kalkaji Constituency, Delhi. Member, PAC, Aam Aadmi Party
Gautam Gambhir
Member of Parliament from East Delhi, BJP
Delhi BJP
Delhi BJP

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