बन्धवारी लैंडफिल को अरावली से हटाएँ & प्रस्तावित कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट को रोकें


बन्धवारी लैंडफिल को अरावली से हटाएँ & प्रस्तावित कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट को रोकें
समस्या
“जब से बन्धवारी लैंडफिल हमारे गाँव के पास आई है, कई निवासियों को कैंसर, हृदय की समस्याएं और सांस की बीमारियाँ हो रही हैं। लगभग 60 लोग कैंसर से मर चुके हैं” ये गुरुग्राम, हरियाणा के पास स्थित बन्धवारी गांव निवासी तेजपाल हरसाना के शब्द हैं।
अरावली जंगल में स्थित इस लैंडफिल ने आसपास के गांवों में एक बहुत बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। यहां के अधिकांश निवासी या तो आस पास के किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो कैंसर से पीड़ित है या कैंसर से उसकी मृत्यु हो चुकी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) जैसी प्रतिष्ठित सरकारी एजेंसियों द्वारा किए गए परीक्षण के अनुसार लैंडफिल के आसपास के कई स्थानों पर भूजल जहरीले रसायनों से दूषित है। इस क्षेत्र के कई जानवर और पक्षी जैसे सियार, मोर आदि और आसपास के गांवों के मवेशी इस जहरीले पानी को पीने के बाद मर रहे हैं। बन्धवारी लैंडफिल 250 फीट गहरे खनन वाले गड्ढे पर स्थित है, जिसके कारण भूजल प्रदूषण ज़्यादा आसानी से हो रहा है| यह विषैला पानी, जिसने आस पास के गांवों और जंगल में मौत और बीमारियाँ फैलाई हुई हैं, जल्द ही गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली के निवासियों के घरों तक पहुंच जाएगा।
इस जले पर नमक छिड़कते हुए हरियाणा सरकार अब बँधवारी लैंडफिल पर एक कूड़े से बिजली बनाने वाला प्लांट लगाने जा रही है । जबकि सरकार ये जानती है कि ऐसे कोई भी प्लांट भारत में कामयाब नहीं हुए हैं।
भारत में अब तक स्थापित किए गए लगभग 11 ऐसे प्लांटों में से अधिकांश बंद हो गए हैं। जो कुछ काम कर भी रहे हैं, वे आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट को सितंबर 2020 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें बताया गया था कि दिल्ली के ओखला, बवाना और गाजीपुर क्षेत्रों में स्थित ऐसे प्लांट कैंसर पैदा करने वाले कई रसायनों का एक विषैला मिश्रण वातावरण में छोड़ रहे हैं जैसे कि डाइऑक्सिन, फुरेंस, पीएम 2.5 और बॉटम ऐश आदि ।
सीपीसीबी ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बन्धवारी लैंडफिल का कूड़ा जलने के लिए अयोग्य है, क्योंकि इसमें नमी की मात्रा अधिक है। ये मिश्रित कूड़ा है, जिसमें गीला कूड़ा काफी मात्रा में है, इसलिए बिजली का उत्पादन करने के लिए यह सही नहीं है।
लेकिन हरियाणा सरकार इस कचरे से ऊर्जा बनाने वाले प्लांट को स्थापित करने के लिए आगे बढ़ रही है, जो न केवल करोड़ों रुपये की बर्बादी है, बल्कि पर्यावरण की बरबादी की ओर एक और कदम है। अरावली NCR क्षेत्र में ताज़ी हवा का स्त्रोत, जल संरक्षण क्षेत्र, थार रेगिस्तान से आने वाले धूल के तूफान के खिलाफ अवरोध और तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के लिए एक प्रमुख निवास स्थान है।
कचरे से ऊर्जा बनाने वाला प्लांट हमारी समस्याओं का समाधान नहीं है।
कृपया इस पेटीशन पर साइन करके हमारे सुझावों और मांगों का समर्थन करें:
- गुरुग्राम नगर निगम ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट में गलत जानकारी प्रस्तुत करके इस कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट की अनुमति ली है। इसे रद्द किया जाये ।
- बन्धवारी लैंडफिल में फैले 30 लाख से अधिक टन कचरे को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर बायोरेमेडिएशन जैसी तकनीकों को लागू किया जाए और 30 एकड़+ अरावली वन भूमि को पुनः जीवित करने के लिए देशी प्रजातियों का वृक्षारोपण किया जाए।
- गुरुग्राम और फरीदाबाद से निकलने वाले 2000 टन मिश्रित कचरे को बन्धवारी लैंडफिल और दोनों शहरों के आसपास के 200+ स्थानों पर फेंकना बंद किया जाए और निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:
- दोनों शहरों में कचरे को स्रोत (source) पर अलग करने पर ज़ोर दिया जाए और सौलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम (SWM Rules) 2016 को सख्ती से लागू किया जाए।
- दोनों शहरों के सभी बल्क वेस्ट जेनरेटर के लिए खाद या बायो गैस प्लांट लगाना अनिवार्य किया जाए। ऐसा करने से दोनों शहरों का 55% से अधिक गीला और बागवानी कचरा सोर्स पर ही का ठीक ढंग से निपट जाएगा। गुरुग्राम की 100 से अधिक RWA's इस तरह से अपना कचरा प्रबंधन आसानी से और सफलता पूर्वक कर रही हैं ।
- सौलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों (SWM Rules) को लागू नहीं करने वाले व्यक्तियों और बल्क वेस्ट जनरेटर पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
- घरों, दुकानों और अन्य व्यक्तिगत वेस्ट जनरेटर द्वारा उत्पन्न खाद्य और बागवानी कचरे को ठीक ढंग से निपटाने के लिए सेक्टर / वार्ड / क्लस्टर स्तर पर कम्पोस्टिंग और बायो-गैस प्लांट लगाए जायें।
- दोनों शहरों के सभी वार्डों में सूखा कचरा और इलेक्ट्रॉनिक कचरा केंद्र स्थापित किए जाएं। इन केंद्रों से दोनों शहरों के 20% रिसाइकिल योग्य कचरे का ठीक ढंग से निपटारन होगा।
- बचे हुए लगभग 15% कचरे को, जिससे न खाद बनायी जा सकती है और न रिसाइकिल किया जा सकता है, पहले से ही काम कर रहे सीमेंट संयंत्र में कोप्रोसस्सिंग के लिए भेजा जाए। यह तकनीक बहुत अधिक तापमान पर सूखा कचरा जलाती है इसलिए प्रदूषण होने की संभावना कम होती है।
- दोनों शहरों के 10% बायोमेडिकल और सैनिटरी कचरे से निपटने के लिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों और मानव निवास क्षेत्रों से दूर एक सैनिटरी लैंडफिल और बायोमेडिकल सुविधा बनायी जाए।
इस देश के नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपनी आवाज उठाएं । इस पेटीशन पर साइन करके और इसे दूसरों के साथ शेयर करके आप यह छोटा सा योगदान दे सकते हैं। हम सब जब मिलकर आवाज उठाएंगे तो सरकार को हमारी बात सुननी ही होगी।ये हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए है।
ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अरावली बचाओ सिटीजन मूवमेंट को फॉलो करके हमारे साथ जुड़े। हमारा हैंडल @AravalliBachao है।
#RemoveBandhwariLandfill
#EnforceSWMrules
#NoWTEinAravallis
#AravalliBachao

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समस्या
“जब से बन्धवारी लैंडफिल हमारे गाँव के पास आई है, कई निवासियों को कैंसर, हृदय की समस्याएं और सांस की बीमारियाँ हो रही हैं। लगभग 60 लोग कैंसर से मर चुके हैं” ये गुरुग्राम, हरियाणा के पास स्थित बन्धवारी गांव निवासी तेजपाल हरसाना के शब्द हैं।
अरावली जंगल में स्थित इस लैंडफिल ने आसपास के गांवों में एक बहुत बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। यहां के अधिकांश निवासी या तो आस पास के किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो कैंसर से पीड़ित है या कैंसर से उसकी मृत्यु हो चुकी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) जैसी प्रतिष्ठित सरकारी एजेंसियों द्वारा किए गए परीक्षण के अनुसार लैंडफिल के आसपास के कई स्थानों पर भूजल जहरीले रसायनों से दूषित है। इस क्षेत्र के कई जानवर और पक्षी जैसे सियार, मोर आदि और आसपास के गांवों के मवेशी इस जहरीले पानी को पीने के बाद मर रहे हैं। बन्धवारी लैंडफिल 250 फीट गहरे खनन वाले गड्ढे पर स्थित है, जिसके कारण भूजल प्रदूषण ज़्यादा आसानी से हो रहा है| यह विषैला पानी, जिसने आस पास के गांवों और जंगल में मौत और बीमारियाँ फैलाई हुई हैं, जल्द ही गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली के निवासियों के घरों तक पहुंच जाएगा।
इस जले पर नमक छिड़कते हुए हरियाणा सरकार अब बँधवारी लैंडफिल पर एक कूड़े से बिजली बनाने वाला प्लांट लगाने जा रही है । जबकि सरकार ये जानती है कि ऐसे कोई भी प्लांट भारत में कामयाब नहीं हुए हैं।
भारत में अब तक स्थापित किए गए लगभग 11 ऐसे प्लांटों में से अधिकांश बंद हो गए हैं। जो कुछ काम कर भी रहे हैं, वे आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट को सितंबर 2020 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें बताया गया था कि दिल्ली के ओखला, बवाना और गाजीपुर क्षेत्रों में स्थित ऐसे प्लांट कैंसर पैदा करने वाले कई रसायनों का एक विषैला मिश्रण वातावरण में छोड़ रहे हैं जैसे कि डाइऑक्सिन, फुरेंस, पीएम 2.5 और बॉटम ऐश आदि ।
सीपीसीबी ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बन्धवारी लैंडफिल का कूड़ा जलने के लिए अयोग्य है, क्योंकि इसमें नमी की मात्रा अधिक है। ये मिश्रित कूड़ा है, जिसमें गीला कूड़ा काफी मात्रा में है, इसलिए बिजली का उत्पादन करने के लिए यह सही नहीं है।
लेकिन हरियाणा सरकार इस कचरे से ऊर्जा बनाने वाले प्लांट को स्थापित करने के लिए आगे बढ़ रही है, जो न केवल करोड़ों रुपये की बर्बादी है, बल्कि पर्यावरण की बरबादी की ओर एक और कदम है। अरावली NCR क्षेत्र में ताज़ी हवा का स्त्रोत, जल संरक्षण क्षेत्र, थार रेगिस्तान से आने वाले धूल के तूफान के खिलाफ अवरोध और तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के लिए एक प्रमुख निवास स्थान है।
कचरे से ऊर्जा बनाने वाला प्लांट हमारी समस्याओं का समाधान नहीं है।
कृपया इस पेटीशन पर साइन करके हमारे सुझावों और मांगों का समर्थन करें:
- गुरुग्राम नगर निगम ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट में गलत जानकारी प्रस्तुत करके इस कचरे से बिजली बनाने वाले प्लांट की अनुमति ली है। इसे रद्द किया जाये ।
- बन्धवारी लैंडफिल में फैले 30 लाख से अधिक टन कचरे को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर बायोरेमेडिएशन जैसी तकनीकों को लागू किया जाए और 30 एकड़+ अरावली वन भूमि को पुनः जीवित करने के लिए देशी प्रजातियों का वृक्षारोपण किया जाए।
- गुरुग्राम और फरीदाबाद से निकलने वाले 2000 टन मिश्रित कचरे को बन्धवारी लैंडफिल और दोनों शहरों के आसपास के 200+ स्थानों पर फेंकना बंद किया जाए और निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:
- दोनों शहरों में कचरे को स्रोत (source) पर अलग करने पर ज़ोर दिया जाए और सौलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम (SWM Rules) 2016 को सख्ती से लागू किया जाए।
- दोनों शहरों के सभी बल्क वेस्ट जेनरेटर के लिए खाद या बायो गैस प्लांट लगाना अनिवार्य किया जाए। ऐसा करने से दोनों शहरों का 55% से अधिक गीला और बागवानी कचरा सोर्स पर ही का ठीक ढंग से निपट जाएगा। गुरुग्राम की 100 से अधिक RWA's इस तरह से अपना कचरा प्रबंधन आसानी से और सफलता पूर्वक कर रही हैं ।
- सौलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों (SWM Rules) को लागू नहीं करने वाले व्यक्तियों और बल्क वेस्ट जनरेटर पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
- घरों, दुकानों और अन्य व्यक्तिगत वेस्ट जनरेटर द्वारा उत्पन्न खाद्य और बागवानी कचरे को ठीक ढंग से निपटाने के लिए सेक्टर / वार्ड / क्लस्टर स्तर पर कम्पोस्टिंग और बायो-गैस प्लांट लगाए जायें।
- दोनों शहरों के सभी वार्डों में सूखा कचरा और इलेक्ट्रॉनिक कचरा केंद्र स्थापित किए जाएं। इन केंद्रों से दोनों शहरों के 20% रिसाइकिल योग्य कचरे का ठीक ढंग से निपटारन होगा।
- बचे हुए लगभग 15% कचरे को, जिससे न खाद बनायी जा सकती है और न रिसाइकिल किया जा सकता है, पहले से ही काम कर रहे सीमेंट संयंत्र में कोप्रोसस्सिंग के लिए भेजा जाए। यह तकनीक बहुत अधिक तापमान पर सूखा कचरा जलाती है इसलिए प्रदूषण होने की संभावना कम होती है।
- दोनों शहरों के 10% बायोमेडिकल और सैनिटरी कचरे से निपटने के लिए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों और मानव निवास क्षेत्रों से दूर एक सैनिटरी लैंडफिल और बायोमेडिकल सुविधा बनायी जाए।
इस देश के नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपनी आवाज उठाएं । इस पेटीशन पर साइन करके और इसे दूसरों के साथ शेयर करके आप यह छोटा सा योगदान दे सकते हैं। हम सब जब मिलकर आवाज उठाएंगे तो सरकार को हमारी बात सुननी ही होगी।ये हमारे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए है।
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