ऐसे कंटेंट बनाएं कि पुरुष भी महिला सुरक्षा की मशाल जलाएं


ऐसे कंटेंट बनाएं कि पुरुष भी महिला सुरक्षा की मशाल जलाएं
समस्या
अंजलि* (बदला हुआ नाम) को किशोरी होने से पहले ही उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे लड़कों से निपटना पड़ा। अभी भी जब वह इस घटना के बारे में सोचती है तो काँप जाती है । उसके माता-पिता ने इसी डर से उन्हें स्कूल नहीं भेजा। यह डर अंजलि के साथ हमेशा रहेगा। न उस समय किसी ने मदद की, और न अब कोई भी उसकी मदद कर रहा है I
अंजलि अकेली नहीं है। हर 5 मिनट में, भारत में एक महिला ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी न किसी तरह की मारपीट, शोषण या हिंसा का सामना करती है।
अब तो फिर भी लिंग आधारित हिंसा की बातचीत शुरू हो गयी है, लेकिन फिर भी काफी लंबे समय से उठती हुई आवाज़ें केवल महिलाओं की ही होती हैं I क्या पीड़ितों के भाग्य में अकेले लड़ना लिखा है?
इसका एक बड़ा कारण आसपास की बातचीत की कमी है और मुख्यधारा की सामग्री में सक्रियतावाद और सहयोगी किरदारों के चित्रण की कमी है। हमारे व्यवहार पॉपुलर मीडिया से प्रभावित होते हैं I
यदि हम सहयोगी और अएलीशिप किरदारों को OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाएं तो व्यवहार बदलने की सम्भावना बढ़ जाएगी I इससे समाज को ये सन्देश मिलेगा की सहयोगी होना और एक दूसरे के लिए खड़े रहना हमारी प्रकृति का एक अहम हिस्सा हैं और महिला सुरक्षा केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है I
मेरी पेटीशन साइन करें और ओटीटी प्लेटफार्मों जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम, हॉटस्टार, सोनी लिव, वूट और अल्ट-बालाजी से अधिक सहयोगी सक्रियता सामग्री तैयार करने की मांग करें I
महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, हिंसा और शोषण के मुद्दों पर पुरुषों को मूकदर्शक बनना बंद करन होगा I चाहे ऑफलाइन हो या ऑनलाइन I यह ख़ामोशी हमारी लड़ाई को धीमा करती है I
यदि हम 'सुरक्षित स्थान' (सेफ स्पेस) के भीतर हर इंसान के योगदान के बारे में बात नहीं करेंगे, तो सुरक्षित स्थान को सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है। पुरुषों का साथ महत्वपूर्ण है, उनकी आवाज़ महत्वपूर्ण है I जितना अधिक हम उन्हें पीछे छोड़ते हैं, उतना ही हमारी लड़ाई महिला बनाम पुरुष हो जाती है। ये लड़ाई हज़ारों सालों से चलती पितृसत्ता के खिलाफ एकजुट होकर ही जीती जा सकती है I
पुरुषों को अपने साथ जोड़कर हम इस लड़ाई का एक सबसे बड़ा रोड़ा पार कर सकेंगे I वह इस लड़ाई में जुड़ने से से वर्षों पुरानी सीखी हुई कुरीतियों और आदतों को भुला पाएंगे I
मेरी पेटीशन साइन करें और #AllyUpForHer अभियान को भी अपना समर्थन दें। हमारा उद्देश्य समाज की सामूहिक चेतना से अपील करना है कि वे इस व्यवहारगत बदलाव को लाएं और महिलाओं पर पड़ने वाले बोझ को उठाएं।वह लोग जो काफी हद्द तक महिलाओं पर हो रही हिंसा और उनके हालात के ज़िम्मेदार हैं, अब समय है की वह भी इस बड़े बदलाव में अपना योगदान दें I
यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म अपनी जबरदस्त पहुंच और प्रभाव के साथ सहयोगिता और अलाईशिप पर सार्थक सामग्री बनाने में सक्षम जो जाएं और सभी लिंग के लोग पृतसत्ता के खिलाफ साथ आजायें, तो यह मुख्यधारा के प्रवचन का हिस्सा बन जाएगा और अधिक पुरुषों को सहयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा I और फिर कोई भी हिंसा का केवल मूकदर्शक नहीं रहेगा I
यदि आप, मेरी तरह, यह मानते हैं कि महिलाओं का मानवाधिकार और केवल महिलाओं के लिए एक मुद्दा नहीं है, बल्कि सभी के लिए है, तो मेरी पेटीशन पर साइन करें। आइए सभी रूढ़ियों को तोड़ें और समाज में पिछड़े और पृतसत्तात्मक विचारों को चुनौती दें। क्योंकि वास्तविक परिवर्तन सामूहिक आक्रोश से नहीं आएगा, यह हृदय के व्यक्तिगत परिवर्तन से आएगा।
*व्यक्तियों की गोपनीयता की रक्षा के लिए नाम और पहचान का विवरण बदल दिया गया है।
समस्या
अंजलि* (बदला हुआ नाम) को किशोरी होने से पहले ही उसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहे लड़कों से निपटना पड़ा। अभी भी जब वह इस घटना के बारे में सोचती है तो काँप जाती है । उसके माता-पिता ने इसी डर से उन्हें स्कूल नहीं भेजा। यह डर अंजलि के साथ हमेशा रहेगा। न उस समय किसी ने मदद की, और न अब कोई भी उसकी मदद कर रहा है I
अंजलि अकेली नहीं है। हर 5 मिनट में, भारत में एक महिला ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी न किसी तरह की मारपीट, शोषण या हिंसा का सामना करती है।
अब तो फिर भी लिंग आधारित हिंसा की बातचीत शुरू हो गयी है, लेकिन फिर भी काफी लंबे समय से उठती हुई आवाज़ें केवल महिलाओं की ही होती हैं I क्या पीड़ितों के भाग्य में अकेले लड़ना लिखा है?
इसका एक बड़ा कारण आसपास की बातचीत की कमी है और मुख्यधारा की सामग्री में सक्रियतावाद और सहयोगी किरदारों के चित्रण की कमी है। हमारे व्यवहार पॉपुलर मीडिया से प्रभावित होते हैं I
यदि हम सहयोगी और अएलीशिप किरदारों को OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाएं तो व्यवहार बदलने की सम्भावना बढ़ जाएगी I इससे समाज को ये सन्देश मिलेगा की सहयोगी होना और एक दूसरे के लिए खड़े रहना हमारी प्रकृति का एक अहम हिस्सा हैं और महिला सुरक्षा केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं है I
मेरी पेटीशन साइन करें और ओटीटी प्लेटफार्मों जैसे नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन प्राइम, हॉटस्टार, सोनी लिव, वूट और अल्ट-बालाजी से अधिक सहयोगी सक्रियता सामग्री तैयार करने की मांग करें I
महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, हिंसा और शोषण के मुद्दों पर पुरुषों को मूकदर्शक बनना बंद करन होगा I चाहे ऑफलाइन हो या ऑनलाइन I यह ख़ामोशी हमारी लड़ाई को धीमा करती है I
यदि हम 'सुरक्षित स्थान' (सेफ स्पेस) के भीतर हर इंसान के योगदान के बारे में बात नहीं करेंगे, तो सुरक्षित स्थान को सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है। पुरुषों का साथ महत्वपूर्ण है, उनकी आवाज़ महत्वपूर्ण है I जितना अधिक हम उन्हें पीछे छोड़ते हैं, उतना ही हमारी लड़ाई महिला बनाम पुरुष हो जाती है। ये लड़ाई हज़ारों सालों से चलती पितृसत्ता के खिलाफ एकजुट होकर ही जीती जा सकती है I
पुरुषों को अपने साथ जोड़कर हम इस लड़ाई का एक सबसे बड़ा रोड़ा पार कर सकेंगे I वह इस लड़ाई में जुड़ने से से वर्षों पुरानी सीखी हुई कुरीतियों और आदतों को भुला पाएंगे I
मेरी पेटीशन साइन करें और #AllyUpForHer अभियान को भी अपना समर्थन दें। हमारा उद्देश्य समाज की सामूहिक चेतना से अपील करना है कि वे इस व्यवहारगत बदलाव को लाएं और महिलाओं पर पड़ने वाले बोझ को उठाएं।वह लोग जो काफी हद्द तक महिलाओं पर हो रही हिंसा और उनके हालात के ज़िम्मेदार हैं, अब समय है की वह भी इस बड़े बदलाव में अपना योगदान दें I
यदि ओटीटी प्लेटफॉर्म अपनी जबरदस्त पहुंच और प्रभाव के साथ सहयोगिता और अलाईशिप पर सार्थक सामग्री बनाने में सक्षम जो जाएं और सभी लिंग के लोग पृतसत्ता के खिलाफ साथ आजायें, तो यह मुख्यधारा के प्रवचन का हिस्सा बन जाएगा और अधिक पुरुषों को सहयोगी बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा I और फिर कोई भी हिंसा का केवल मूकदर्शक नहीं रहेगा I
यदि आप, मेरी तरह, यह मानते हैं कि महिलाओं का मानवाधिकार और केवल महिलाओं के लिए एक मुद्दा नहीं है, बल्कि सभी के लिए है, तो मेरी पेटीशन पर साइन करें। आइए सभी रूढ़ियों को तोड़ें और समाज में पिछड़े और पृतसत्तात्मक विचारों को चुनौती दें। क्योंकि वास्तविक परिवर्तन सामूहिक आक्रोश से नहीं आएगा, यह हृदय के व्यक्तिगत परिवर्तन से आएगा।
*व्यक्तियों की गोपनीयता की रक्षा के लिए नाम और पहचान का विवरण बदल दिया गया है।
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14 दिसंबर 2020 पर पेटीशन बनाई गई