2200 पेड़ों को कटने से बचाएँ: सहस्त्रधारा रोड, देहरादून सड़क चौड़ीकरण पर दुबारा विचार करें


2200 पेड़ों को कटने से बचाएँ: सहस्त्रधारा रोड, देहरादून सड़क चौड़ीकरण पर दुबारा विचार करें
समस्या
आदरणीय महोदय,
सहस्त्रधारा रोड, देहरादून में जोगी वाला से पैसिफिक गोल्फ एस्टेट तक 2200 पेड़ों को कटने से बचा लें!
देहरादून की हरियाली और पर्यावरण का अस्तित्व खतरे में है।
सहस्त्र का अर्थ होता है 1000, धारा का अर्थ है झरने, 1000 झरने। कल्पना कीजिए कि एक शहर में सिर्फ एक क्षेत्र में 1000 झरने हैं। आज केवल कुछ झरने दिखाई दे रहे हैं जबकि अन्य सूख गए हैं या निर्माण के नीचे दब गए हैं।
2200 पेड़ों को हटाकर एक फोर लेन रोड के लिए 77 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। जल्द ही निर्माण के लिए टेंडर निकलेंगे।
प्रशासन का कहना है कि इससे पर्यटकों को मसूरी जाने में आसानी होगी और देहरादून में जाम को कम किया जा सकेगा।
हम स्थानीय निवासी क्यों इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं:
1) बढ़ती आबादी के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी तब प्रशासन क्या करेगा? क्या वे पूरे उत्तराखंड से पेड़ों व जंगलों को हटा देंगे?
2) राजधानी बनने से अबतक देहरादून ने अपना 70% वन क्षेत्र खो दिया है। क्लाइमेट चेंज के कारण हम बार-बार भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, कम सर्दी, अत्यधिक गर्मी की लहरों जैसे आक्रामक जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहे हैं जो सीधे हमारे कृषि क्षेत्रों, हमारे भूजल और झरनों को भी प्रभावित कर रहे हैं।
3) सहस्त्रधारा, जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों द्वारा दोनों किनारों पर पेड़ों की सुंदरता के लिए जाना जाता है वो अपनी सुंदरता खो देगा। इसके साथ-साथ पर्यटकों के प्रवाह को भी खो देगा, जो केवल पीपल, आम, लीची आदि की ठंडी ठंडी हवा के लिए इस क्षेत्र में आते हैं। अगर पेड़ कटते हैं तो कई सालों से चल रही खानपान की दुकानों के व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
4) हमने हाल ही में देखा कि कैसे सिर्फ 1 या 2 घंटे की बारिश से सहस्त्रधारा रोड स्थित आईटी पार्क में बाढ़ आई थी। कई घंटे तक लोग वहां फंसे रहे। पेड़ों की कटाई से स्थिति और बुरी और भायवह होगी। बारिश के दिनों में लोग बाहर निकलने में डर रहे हैं।
5) पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड और संभावित हानिकारक गैसों, जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड को सोख कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
6) अनुमानित है कि एक पेड़ चार लोगों के परिवार के लिए एक दिन की ऑक्सीजन प्रदान करता है।
5) पेड़ पृथ्वी पर गिरने वाली बारिश के पानी को धीमा करके और मिट्टी में सोखने में मदद करके पानी की गुणवत्ता व जलस्तर में सुधार करते हैं।
हम अपने आसपास जलवायु परिवर्तन होते देख रहे हैं। यह वह समय है जब हमें पेड़ों, जंगलों, नदियों, पहाड़ों, झीलों का संरक्षण करना चाहिए और स्थायी पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण वाली रणनीति या विकास परियोजनाएं बनानी चाहिए। अन्यथा हम पहले से ही अपने उत्तराखंड के पहाड़ों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन, बार-बार भूकंप और बाढ़ से होने वाली क्षति को देख सकते हैं।
हम प्रशासन से इस परियोजना को रोकने और इसके अन्य विकल्प खोजने का विनम्र आग्रह करते हैं।
डॉ आंचल शर्मा
द अर्थ एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव

समस्या
आदरणीय महोदय,
सहस्त्रधारा रोड, देहरादून में जोगी वाला से पैसिफिक गोल्फ एस्टेट तक 2200 पेड़ों को कटने से बचा लें!
देहरादून की हरियाली और पर्यावरण का अस्तित्व खतरे में है।
सहस्त्र का अर्थ होता है 1000, धारा का अर्थ है झरने, 1000 झरने। कल्पना कीजिए कि एक शहर में सिर्फ एक क्षेत्र में 1000 झरने हैं। आज केवल कुछ झरने दिखाई दे रहे हैं जबकि अन्य सूख गए हैं या निर्माण के नीचे दब गए हैं।
2200 पेड़ों को हटाकर एक फोर लेन रोड के लिए 77 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। जल्द ही निर्माण के लिए टेंडर निकलेंगे।
प्रशासन का कहना है कि इससे पर्यटकों को मसूरी जाने में आसानी होगी और देहरादून में जाम को कम किया जा सकेगा।
हम स्थानीय निवासी क्यों इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं:
1) बढ़ती आबादी के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी तब प्रशासन क्या करेगा? क्या वे पूरे उत्तराखंड से पेड़ों व जंगलों को हटा देंगे?
2) राजधानी बनने से अबतक देहरादून ने अपना 70% वन क्षेत्र खो दिया है। क्लाइमेट चेंज के कारण हम बार-बार भूस्खलन, बाढ़, बादल फटना, कम सर्दी, अत्यधिक गर्मी की लहरों जैसे आक्रामक जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहे हैं जो सीधे हमारे कृषि क्षेत्रों, हमारे भूजल और झरनों को भी प्रभावित कर रहे हैं।
3) सहस्त्रधारा, जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों द्वारा दोनों किनारों पर पेड़ों की सुंदरता के लिए जाना जाता है वो अपनी सुंदरता खो देगा। इसके साथ-साथ पर्यटकों के प्रवाह को भी खो देगा, जो केवल पीपल, आम, लीची आदि की ठंडी ठंडी हवा के लिए इस क्षेत्र में आते हैं। अगर पेड़ कटते हैं तो कई सालों से चल रही खानपान की दुकानों के व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
4) हमने हाल ही में देखा कि कैसे सिर्फ 1 या 2 घंटे की बारिश से सहस्त्रधारा रोड स्थित आईटी पार्क में बाढ़ आई थी। कई घंटे तक लोग वहां फंसे रहे। पेड़ों की कटाई से स्थिति और बुरी और भायवह होगी। बारिश के दिनों में लोग बाहर निकलने में डर रहे हैं।
5) पेड़ हवा से कार्बन डाइऑक्साइड और संभावित हानिकारक गैसों, जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड को सोख कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
6) अनुमानित है कि एक पेड़ चार लोगों के परिवार के लिए एक दिन की ऑक्सीजन प्रदान करता है।
5) पेड़ पृथ्वी पर गिरने वाली बारिश के पानी को धीमा करके और मिट्टी में सोखने में मदद करके पानी की गुणवत्ता व जलस्तर में सुधार करते हैं।
हम अपने आसपास जलवायु परिवर्तन होते देख रहे हैं। यह वह समय है जब हमें पेड़ों, जंगलों, नदियों, पहाड़ों, झीलों का संरक्षण करना चाहिए और स्थायी पर्यावरण के अनुकूल दृष्टिकोण वाली रणनीति या विकास परियोजनाएं बनानी चाहिए। अन्यथा हम पहले से ही अपने उत्तराखंड के पहाड़ों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन, बार-बार भूकंप और बाढ़ से होने वाली क्षति को देख सकते हैं।
हम प्रशासन से इस परियोजना को रोकने और इसके अन्य विकल्प खोजने का विनम्र आग्रह करते हैं।
डॉ आंचल शर्मा
द अर्थ एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव

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