हिमाचल: ये नियम बदलकर और अधिक विधवा और एकल महिलाओं को दें पेंशन की सुरक्षा


हिमाचल: ये नियम बदलकर और अधिक विधवा और एकल महिलाओं को दें पेंशन की सुरक्षा
समस्या
27 साल की उम्र में मैंने अपने पति को खो दिया। समाज, यहाँ तक कि कुछ रिश्तेदार भी मुझे कहते कि मैं बदकिस्मत हूँ और आगे मेरा कोई सहारा नहीं होगा क्योंकि हमारा कोई बच्चा नहीं था। इस समाज और लोगों को जवाब देेने के लिए ही मैंने अपना घर छोड़ दिया।
27 साल की उस महिला ने घर ये सोचकर छोड़ा था कि कहीं जाकर झाड़ू-पोछा, मेहनत-मज़दूरी कर के जीवन काट लेगी। लेकिन 3 दशक बाद आज वही महिला ‘एकल नारी शक्ति संगठन’ की निदेशक है, जो विधवाओं और एकल महिलाओं के लिए हमेशा आवाज़ बुलंद करती है।
मेरी उम्र 56 साल हो गई है और मेरा संघर्ष अभी भी जारी है। मैंने ये पेटीशन इसलिए शुरू की है ताकि हमारे हिमाचल की और अधिक महिलाओं (विधवा व एकल) को सरकारी पेंशन की सुरक्षा मिल सके। कृपया इसे साइन करें और शेयर कर के सरकार तक हमारी बात पहुँचाएं।
दरअसल हमारे राज्य में किसी महिला को विभिन्न सरकारी पेंशन प्राप्त करने के लिए एक निर्धारित आय सीमा है, जो कि अभी 35,000 रुपये है। यदि किसी महिला की सालाना आय 35,000 से 1 रुपया भी ज़्यादा होती है तो वो कई कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाती है। इसलिए मैं सरकार से मांग कर रही हूँ कि इस आय सीमा को 35,000 से बढ़ाकर 60,000 कर दें और ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को पेंशन की सुरक्षा दें।
मैं ये पेटीशन माननीय मुख्यमंत्री जी, मुख्य सचिव, सामाजिक न्याय विभाग व महिला एवं बाल कल्याण विभाग को प्रेषित करूंगी। मैं आप सभी से दोनों हाथ जोड़कर अपील करती हूँ कि हमारी पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि जब हम ये पेटीशन सरकार के पास भेजें तो इसपर लाखों लोगों का समर्थन हो। कोरोना और बढ़ती मंहगाई तो देखते हुए ये फैसला जल्द से जल्द होगा तो लाखों महिलाओं के चेहरे पर खुशी आएगी।
मैं अपने जैसी कितनी विधवा व एकल महिलाओं को जानती हूँ, जिनके साथ हुए अन्याय की कहानी लिखूँ तो कागज़ कम पड़ जाएगा। पेंशन या कोई भी सरकारी योजना हमारे लिए न्याय और अधिकार का एकमात्र रास्ता होता है। कोरोना के बाद बहुत सारी महिलाओं ने अपना पति खोया या परिवार ने अकेला छोड़ा दिया, उनमें से बहुतों को आज तक पेंशन नहीं मिली। मैं कितनी ऐसी महिलाओं को जानती हूँ जिनकी 5-5 साल से पेंशन नहीं लगी। आप सोचिए इस महंगाई में वो कैसे जी रही होंगी?
1990 से लेकर आजतक विधवा, एकल महिलाओं को सशक्त करना मेरा मिशन रहा है। 2008 में मैंने विधवा एवं एकल महिलाओं की एक पदयात्रा भी निकाली थी, जिसमें 3500 महिलाओं ने भाग लिया। मेरी ये पेटीशन एक प्रकार की डिजिटल यात्रा ही है, जिसकी मंज़िल है हर विधवा और एकल महिला तक पेंशन की सुरक्षा को पहुँचाना।
आशा करती हूँ आप मेरी पेटीशन साइन और शेयर कर के बदलाव की इस यात्रा में हमारा साथ ज़रूर देंगे।
समस्या
27 साल की उम्र में मैंने अपने पति को खो दिया। समाज, यहाँ तक कि कुछ रिश्तेदार भी मुझे कहते कि मैं बदकिस्मत हूँ और आगे मेरा कोई सहारा नहीं होगा क्योंकि हमारा कोई बच्चा नहीं था। इस समाज और लोगों को जवाब देेने के लिए ही मैंने अपना घर छोड़ दिया।
27 साल की उस महिला ने घर ये सोचकर छोड़ा था कि कहीं जाकर झाड़ू-पोछा, मेहनत-मज़दूरी कर के जीवन काट लेगी। लेकिन 3 दशक बाद आज वही महिला ‘एकल नारी शक्ति संगठन’ की निदेशक है, जो विधवाओं और एकल महिलाओं के लिए हमेशा आवाज़ बुलंद करती है।
मेरी उम्र 56 साल हो गई है और मेरा संघर्ष अभी भी जारी है। मैंने ये पेटीशन इसलिए शुरू की है ताकि हमारे हिमाचल की और अधिक महिलाओं (विधवा व एकल) को सरकारी पेंशन की सुरक्षा मिल सके। कृपया इसे साइन करें और शेयर कर के सरकार तक हमारी बात पहुँचाएं।
दरअसल हमारे राज्य में किसी महिला को विभिन्न सरकारी पेंशन प्राप्त करने के लिए एक निर्धारित आय सीमा है, जो कि अभी 35,000 रुपये है। यदि किसी महिला की सालाना आय 35,000 से 1 रुपया भी ज़्यादा होती है तो वो कई कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाती है। इसलिए मैं सरकार से मांग कर रही हूँ कि इस आय सीमा को 35,000 से बढ़ाकर 60,000 कर दें और ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को पेंशन की सुरक्षा दें।
मैं ये पेटीशन माननीय मुख्यमंत्री जी, मुख्य सचिव, सामाजिक न्याय विभाग व महिला एवं बाल कल्याण विभाग को प्रेषित करूंगी। मैं आप सभी से दोनों हाथ जोड़कर अपील करती हूँ कि हमारी पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि जब हम ये पेटीशन सरकार के पास भेजें तो इसपर लाखों लोगों का समर्थन हो। कोरोना और बढ़ती मंहगाई तो देखते हुए ये फैसला जल्द से जल्द होगा तो लाखों महिलाओं के चेहरे पर खुशी आएगी।
मैं अपने जैसी कितनी विधवा व एकल महिलाओं को जानती हूँ, जिनके साथ हुए अन्याय की कहानी लिखूँ तो कागज़ कम पड़ जाएगा। पेंशन या कोई भी सरकारी योजना हमारे लिए न्याय और अधिकार का एकमात्र रास्ता होता है। कोरोना के बाद बहुत सारी महिलाओं ने अपना पति खोया या परिवार ने अकेला छोड़ा दिया, उनमें से बहुतों को आज तक पेंशन नहीं मिली। मैं कितनी ऐसी महिलाओं को जानती हूँ जिनकी 5-5 साल से पेंशन नहीं लगी। आप सोचिए इस महंगाई में वो कैसे जी रही होंगी?
1990 से लेकर आजतक विधवा, एकल महिलाओं को सशक्त करना मेरा मिशन रहा है। 2008 में मैंने विधवा एवं एकल महिलाओं की एक पदयात्रा भी निकाली थी, जिसमें 3500 महिलाओं ने भाग लिया। मेरी ये पेटीशन एक प्रकार की डिजिटल यात्रा ही है, जिसकी मंज़िल है हर विधवा और एकल महिला तक पेंशन की सुरक्षा को पहुँचाना।
आशा करती हूँ आप मेरी पेटीशन साइन और शेयर कर के बदलाव की इस यात्रा में हमारा साथ ज़रूर देंगे।
कामयाबी
इस पेटीशन को शेयर करें
फैसला लेने वाले

पेटीशन अपडेट
पेटीशन को शेयर करें
29 मई 2021 पर पेटीशन बनाई गई