

संसद में काम नहीं तो वेतन क्यों?


संसद में काम नहीं तो वेतन क्यों?
समस्या
संसद का शीतकालीन सत्र हाल ही में संपन्न हो गया। पिछले कुछ सत्र की तरह इस सत्र भी कोई ख़ास काम नहीं हुअा। कई महत्वपूर्ण विधेयक रखे रह गए। हंगामे में ही पूरा सत्र निकल गया। हमारे सांसद भले ही संसद की कार्यवाही के प्रति गंभीर न हों लेकिन खुद का वेतन-भत्ता बढ़वाने के मामले में खासे सक्रिय रहते हैं। दिल्ली के विधायकों का वेतन बढ़ने के बाद ख़बरें आने लगी की सांसदों का वेतन भी बढ़ाया जायेगा। क्या यही उनकी प्राथमकिता है ? भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। देश का विकास, नये क़ानून का निर्माण, बजट निर्माण, जैसे महत्वपूर्ण काम संसद से संचालित किये जाते हैं। इन सब कार्यों के लिए संसद का बिना हंगामे के सुचारु रूप से चलना आवश्यक है। चाहे वह शीतकालीन सत्र हो या मॅानसून सत्र या बजट सत्र। इस हंगामे की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को नुक़सान होता है। संसद के संचालन के लिए लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट ख़र्च अाता है। इतने रुपयों से 30 बच्चों की शिक्षा का ख़र्च वहन किया जा सकता है। संसद में हंगामे के कारण अगर काम नहीं होता है तो माननीय सांसदों से गुज़ारिश है कि उस सत्र का वेतन और भत्ते देश के विकास के लिए राजकोष को समर्पित करें। आप सभी इस मुद्दे पर हस्ताक्षर कर देश के विकास में अपना सहयोग प्रदान करें।

समस्या
संसद का शीतकालीन सत्र हाल ही में संपन्न हो गया। पिछले कुछ सत्र की तरह इस सत्र भी कोई ख़ास काम नहीं हुअा। कई महत्वपूर्ण विधेयक रखे रह गए। हंगामे में ही पूरा सत्र निकल गया। हमारे सांसद भले ही संसद की कार्यवाही के प्रति गंभीर न हों लेकिन खुद का वेतन-भत्ता बढ़वाने के मामले में खासे सक्रिय रहते हैं। दिल्ली के विधायकों का वेतन बढ़ने के बाद ख़बरें आने लगी की सांसदों का वेतन भी बढ़ाया जायेगा। क्या यही उनकी प्राथमकिता है ? भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। देश का विकास, नये क़ानून का निर्माण, बजट निर्माण, जैसे महत्वपूर्ण काम संसद से संचालित किये जाते हैं। इन सब कार्यों के लिए संसद का बिना हंगामे के सुचारु रूप से चलना आवश्यक है। चाहे वह शीतकालीन सत्र हो या मॅानसून सत्र या बजट सत्र। इस हंगामे की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को नुक़सान होता है। संसद के संचालन के लिए लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट ख़र्च अाता है। इतने रुपयों से 30 बच्चों की शिक्षा का ख़र्च वहन किया जा सकता है। संसद में हंगामे के कारण अगर काम नहीं होता है तो माननीय सांसदों से गुज़ारिश है कि उस सत्र का वेतन और भत्ते देश के विकास के लिए राजकोष को समर्पित करें। आप सभी इस मुद्दे पर हस्ताक्षर कर देश के विकास में अपना सहयोग प्रदान करें।

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