

वं. राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज को भारतरत्न प्रदान किया जाए
The Issue
सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार एवं संबंधित केंद्रीय प्राधिकरण
## मानवता, ग्रामविकास, विश्वशांति और राष्ट्रसेवा का सम्मान
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज (30 अप्रैल 1909 – 11 ऑक्टोबर 1968) महाराष्ट्र के महान संत, कवि, समाजसुधारक, राष्ट्रसेवी और मानवतावादी विचारक थे। उन्होंने भजन, कीर्तन, साहित्य और प्रत्यक्ष सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने, जातिभेद एवं अंधविश्वास का विरोध करने तथा मानवता, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने का कार्य किया।
उनकी प्रसिद्ध कृति ग्रामगीता में ग्रामविकास, आत्मनिर्भरता, श्रम की प्रतिष्ठा, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामूहिक प्रगति के विचार प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने ग्रामस्वच्छता, ग्रामीण नेतृत्व, सर्वधर्मसमभाव और मानवसेवा पर विशेष बल दिया।
##स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रनिर्माता
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का योगदान केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय सहभागिता की और इसके लिए उन्हें कारावास भी भुगतना पड़ा। उन्हें रायपुर और नागपुर की जेलों में रखा गया था। उनका यह संघर्ष प्रमाणित करता है कि वे केवल संत और समाजसुधारक ही नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी भी थे।
## अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व और विश्वशांति का संदेश
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने अपने विचारों और भजनों के माध्यम से भारत की मानवतावादी एवं आध्यात्मिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। वर्ष 1955 में वे जापान के शिमिजू शहर में आयोजित पाँचवीं विश्वधर्म एवं विश्वशांति परिषद में शामिल हुए। उन्होंने अपने प्रसिद्ध भजन “हर देश में तू, हर भेष में तू, तेरे नाम अनेक, तू एक ही है” के माध्यम से एकता, सार्वभौमिक मानवता और विश्वबंधुत्व का संदेश दिया। उनकी यह मान्यता थी कि मानवता सभी संकीर्ण भेदभावों से ऊपर है और विभिन्न धर्मों के लोगों को परस्पर सम्मान, प्रेम तथा शांति के साथ रहना चाहिए। उनके विचार आज भी वैश्विक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए प्रासंगिक हैं।
## डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा ‘राष्ट्रसंत’ के रूप में सम्मान
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के सामाजिक, राष्ट्रीय और ग्रामीण जनजागरण संबंधी कार्यों को व्यापक सम्मान मिला। उपलब्ध ऐतिहासिक जीवनवृत्तों के अनुसार, गुरुकुंज आश्रम में आयोजित गांधी स्मृति दिवस के कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें ‘राष्ट्रसंत’ कहकर सम्मानित किया। यह सम्मान उनके कार्यों के राष्ट्रीय महत्त्व और समाज के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
उनका कार्य ग्रामीण भारत से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक विस्तृत था। उन्होंने ग्रामविकास को राष्ट्रविकास का आधार माना और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रनिर्माण में सहभागी बनने की प्रेरणा दी।
## हमारी प्रमुख माँगें
1. भारत सरकार राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के सामाजिक, राष्ट्रीय, साहित्यिक, आध्यात्मिक और ग्रामविकास संबंधी योगदान का समग्र मूल्यांकन करे। उनके जीवनभर के राष्ट्रसेवा, मानवता, ग्रामीण उत्थान और विश्वशांति के कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की माँग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
2. उनकी कालजयी कृति ग्रामगीता तथा उसमें निहित ग्रामविकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचारों का देशव्यापी प्रसार किया जाए।
3. उनकी मानवतावादी, सामाजिक सद्भाव और सर्वधर्मसमभाव की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए शैक्षणिक एवं सामाजिक पहलों को प्रोत्साहित किया जाए।
4 . ग्रामीण विकास, ग्रामस्वच्छता, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक एकता से जुड़े कार्यक्रमों में उनके विचारों को अध्ययन, अनुसरण एवं अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
## यह माँग क्यों महत्त्वपूर्ण है?
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का जीवन मानवता, समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों को समर्पित था। उन्होंने ग्रामविकास को केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, नैतिक उत्तरदायित्व, सामूहिक श्रम और मानवीय संबंधों के विकास से जोड़ा। भारत रत्न की माँग उनके जीवनकार्य, राष्ट्रसेवा और मानवता के प्रति योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की एक सार्वजनिक अपील है। इस अभियान का उद्देश्य भारत सरकार का ध्यान उनके समग्र योगदान की ओर आकर्षित करना है।
## नागरिकों से अपील
देश के नागरिकों, ग्रामगीता के अध्येताओं, गुरुदेव सेवा मंडल के अनुयायियों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और मानवतावादी विचारों में विश्वास रखने वाले सभी लोगों से अनुरोध है कि इस याचिका पर स्वेच्छा से हस्ताक्षर करें और इसे अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाएँ।
यह राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के जीवनकार्य, सामाजिक योगदान और मानवतावादी विचारों के सम्मान हेतु अभियान तथा लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त की गई सार्वजनिक माँग है।
आज ही हस्ताक्षर करें और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज को भारत रत्न प्रदान करने की माँग का समर्थन करें!
धन्यवाद !
लोकसभा का आधिकारिक रिकॉर्ड — 13 दिसंबर 2021 सांसद श्री रामदास तडस द्वारा भारत रत्न देने की आवश्यकता का उल्लेख दर्ज है।
पूर्व कुलगुरु डॉ. एस. एन. पठाण ने तुकडोजी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न देने की माँग की थी
https://www.facebook.com/reel/1139459052359668/

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सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार एवं संबंधित केंद्रीय प्राधिकरण
## मानवता, ग्रामविकास, विश्वशांति और राष्ट्रसेवा का सम्मान
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज (30 अप्रैल 1909 – 11 ऑक्टोबर 1968) महाराष्ट्र के महान संत, कवि, समाजसुधारक, राष्ट्रसेवी और मानवतावादी विचारक थे। उन्होंने भजन, कीर्तन, साहित्य और प्रत्यक्ष सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने, जातिभेद एवं अंधविश्वास का विरोध करने तथा मानवता, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने का कार्य किया।
उनकी प्रसिद्ध कृति ग्रामगीता में ग्रामविकास, आत्मनिर्भरता, श्रम की प्रतिष्ठा, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामूहिक प्रगति के विचार प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने ग्रामस्वच्छता, ग्रामीण नेतृत्व, सर्वधर्मसमभाव और मानवसेवा पर विशेष बल दिया।
##स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रनिर्माता
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का योगदान केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय सहभागिता की और इसके लिए उन्हें कारावास भी भुगतना पड़ा। उन्हें रायपुर और नागपुर की जेलों में रखा गया था। उनका यह संघर्ष प्रमाणित करता है कि वे केवल संत और समाजसुधारक ही नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी भी थे।
## अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व और विश्वशांति का संदेश
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज ने अपने विचारों और भजनों के माध्यम से भारत की मानवतावादी एवं आध्यात्मिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। वर्ष 1955 में वे जापान के शिमिजू शहर में आयोजित पाँचवीं विश्वधर्म एवं विश्वशांति परिषद में शामिल हुए। उन्होंने अपने प्रसिद्ध भजन “हर देश में तू, हर भेष में तू, तेरे नाम अनेक, तू एक ही है” के माध्यम से एकता, सार्वभौमिक मानवता और विश्वबंधुत्व का संदेश दिया। उनकी यह मान्यता थी कि मानवता सभी संकीर्ण भेदभावों से ऊपर है और विभिन्न धर्मों के लोगों को परस्पर सम्मान, प्रेम तथा शांति के साथ रहना चाहिए। उनके विचार आज भी वैश्विक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए प्रासंगिक हैं।
## डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा ‘राष्ट्रसंत’ के रूप में सम्मान
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के सामाजिक, राष्ट्रीय और ग्रामीण जनजागरण संबंधी कार्यों को व्यापक सम्मान मिला। उपलब्ध ऐतिहासिक जीवनवृत्तों के अनुसार, गुरुकुंज आश्रम में आयोजित गांधी स्मृति दिवस के कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें ‘राष्ट्रसंत’ कहकर सम्मानित किया। यह सम्मान उनके कार्यों के राष्ट्रीय महत्त्व और समाज के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
उनका कार्य ग्रामीण भारत से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक विस्तृत था। उन्होंने ग्रामविकास को राष्ट्रविकास का आधार माना और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रनिर्माण में सहभागी बनने की प्रेरणा दी।
## हमारी प्रमुख माँगें
1. भारत सरकार राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के सामाजिक, राष्ट्रीय, साहित्यिक, आध्यात्मिक और ग्रामविकास संबंधी योगदान का समग्र मूल्यांकन करे। उनके जीवनभर के राष्ट्रसेवा, मानवता, ग्रामीण उत्थान और विश्वशांति के कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की माँग पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
2. उनकी कालजयी कृति ग्रामगीता तथा उसमें निहित ग्रामविकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक उत्तरदायित्व के विचारों का देशव्यापी प्रसार किया जाए।
3. उनकी मानवतावादी, सामाजिक सद्भाव और सर्वधर्मसमभाव की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए शैक्षणिक एवं सामाजिक पहलों को प्रोत्साहित किया जाए।
4 . ग्रामीण विकास, ग्रामस्वच्छता, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक एकता से जुड़े कार्यक्रमों में उनके विचारों को अध्ययन, अनुसरण एवं अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
## यह माँग क्यों महत्त्वपूर्ण है?
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का जीवन मानवता, समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों को समर्पित था। उन्होंने ग्रामविकास को केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, नैतिक उत्तरदायित्व, सामूहिक श्रम और मानवीय संबंधों के विकास से जोड़ा। भारत रत्न की माँग उनके जीवनकार्य, राष्ट्रसेवा और मानवता के प्रति योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की एक सार्वजनिक अपील है। इस अभियान का उद्देश्य भारत सरकार का ध्यान उनके समग्र योगदान की ओर आकर्षित करना है।
## नागरिकों से अपील
देश के नागरिकों, ग्रामगीता के अध्येताओं, गुरुदेव सेवा मंडल के अनुयायियों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और मानवतावादी विचारों में विश्वास रखने वाले सभी लोगों से अनुरोध है कि इस याचिका पर स्वेच्छा से हस्ताक्षर करें और इसे अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाएँ।
यह राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के जीवनकार्य, सामाजिक योगदान और मानवतावादी विचारों के सम्मान हेतु अभियान तथा लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त की गई सार्वजनिक माँग है।
आज ही हस्ताक्षर करें और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज को भारत रत्न प्रदान करने की माँग का समर्थन करें!
धन्यवाद !
लोकसभा का आधिकारिक रिकॉर्ड — 13 दिसंबर 2021 सांसद श्री रामदास तडस द्वारा भारत रत्न देने की आवश्यकता का उल्लेख दर्ज है।
पूर्व कुलगुरु डॉ. एस. एन. पठाण ने तुकडोजी महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न देने की माँग की थी
https://www.facebook.com/reel/1139459052359668/

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Petition created on 18 October 2026