लखनऊ के ऐतिहासिक रिफ़ा-ए-आम क्लब को बचा लीजिए

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मेरे शहर लखनऊ ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक बड़ा किरदार निभाया है। उसके साहस और संघर्ष की निशानियां अभी भी शहर के हर कोने में मौजूद हैं।

जब अंग्रेज़ों ने अपने क्लबों के बाहर "डॉग्स एंड इंडियंस नॉट अलाउड" का साइन लगाया था तब लखनऊ में रिफ़ा-ए-आम क्लब से भी इसके विरोध की आवाज़ उठी और ये भारतीयों की एकता का प्रतीक भी बना। 

ये क्लब प्रगतिशील लेखक आंदोलन का भी गवाह रहा है। 1936 में क्लब के एक संबोधन में मुंशी प्रेमचंद जी ने अंग्रेज़ी हुक़ूमत के अत्याचारों के खिलाफ़ लिखने और बोलने के लिए हुंकार भरी थी।

देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इस क्लब का भी एक रोल रहा। ये क्लब ऐतिहासिक लखनऊ संधि का गवाह रहा जहाँ लोगों ने हस्ताक्षर कर, एकजुट होकर अंग्रेज़ी हुक़ूमत पर सामूहिक रूप से दबाव बनाया। क्लब के भीतर से भारतवासियों के लिए अधिक स्वायत्तता और अधिकारों की मांग उठाई गई।

मेरे लखनऊ की ये अनमोल इमारत अब कूड़ा-घर बन चुकी है। लोगों ने इसपर क़ब्ज़ा जमा लिया है। दीवारों पर लोगों ने तरह बेतरह की चीज़ें उकेर दी हैं। इमारत की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं, उनमें लगी दरारों से झाड़ियाँ उगने लगी हैं।

रिफ़ा-ए-आम क्लब की ये हालत देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ। लखनऊ का निवासी होने के नाते मैं हमारे लखनऊ की एक ऐतिहासिक धरोहर को ऐसे बर्बाद नहीं होने दूँगा।

इसी लिए मैंने ये पेटिशन शुरू की है।
प्लीज़ मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि सरकार -
- रिफ़ा-ए-आम की खस्ताहाल का संज्ञान लेकर उसकी मरम्मत का आदेश दे।
- हो सके तोह इसे प्रोटेक्टेड मोन्यूमेंट का दर्जा दे

मेरा साथ दीजिये ताकि लखनऊ शहर की एक धरोहर को बचाया जा सके।