Petition updateरीगा चीनी मील बचाओ अभियान : संजय संघर्ष सिंह

आपने पिटीशन साइन किया है अपने मित्रों से भी कराएं उन तक भी संदेश पहुंचाएं

Sanjay Sangharsh singhSheohar, India
25 Aug 2020

#रीगा_मिल_बचाना_है_किसान_का_पैसा_दिलाना_है
#हस्ताक्षर_अभियान
1933 अमेरिकी कंपनी जेम्स फैनल द्वारा स्थापित की गई रीगा चीनी मिल अब बंद होने के कगार पर
कभी बिहार में 29 चीनी मिल हुआ करता था आज केवल 11 चल रहे हैं उसमें से भी एक बंद करने पर उतारू है बिहार सरकार
मोतिहारी मिल बंद होने के बाद मिल प्रबंधन लगातार कहती रही #अदौरी_खोरी_पाकर_पुल निर्मित किया जाए ताकि बागमती पार का गन्ना आसानी से आ सके
#मोतिहारी_शिवहर_सीतामढ़ी_रेल लाइन अति शीघ्र बिछाई जाए ताकि गन्ना आपूर्ति हो पाए
लेकिन सरकार है कि अपने उदासीन रवैया से कैसे भी मिल बंद कराने में लगी है
ऐसा लगता है जैसे सत्ता में बैठे की गिद्ध निगाहें मिल के जमीन के बंदरबांट के इंतजार में है
जमा पूंजी किसान को भुगतान होने वाली राशि तथा बैंक से मोटा कर्ज लेकर जिस डिस्टलरी का निर्माण किया गया था इस उम्मीद में कि और बेहतर आर्थिक स्थिति हो जाएगी मील की
तभी अचानक से बिहार सरकार जो कि चौक चौराहे तक भी शराब दुकान खुलवा चुकी थी लगने लगा शराब से बड़ी कोई चीज नहीं और बंद हो जाना चाहिए
जबकि होना यह चाहिए था की शराब बनता रहता और उन राज्यों में बेचा जाता जहां शराबबंदी नहीं थी तो आज किसान को पेमेंट के लिए दर-दर भटकना नहीं होता और मिल की आर्थिक स्थिति जर्जर नहीं होती
30 सितंबर 2018 को मिल एनपीए हो चुका है अब इसे किसी भी बैंक से सीधे-सीधे सहायता प्राप्त नहीं हो सकती चाहे इसके पास तीन सौ तीन करोड़ की संपत्ति है
केंद्र सरकार द्वारा एनपीए प्रतिष्ठान को मिलने वाले 40 करोड़ के बेलआउट पैकेज सॉफ्ट लोन जिसे मिल प्रबंधन चाहती है सीधा किसान के खाते में भुगतान किया जाए महज राज्य सरकार के उदासीनता के कारण संभव नहीं हो पा रहा
कई वर्षों से गन्ना पर राज्य से मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी राज्य सरकार की तरफ बकाया है अगर सीधे इसको किसान के खाते में ट्रांसफर किया जाए तो मिल प्रबंधन अनापत्ति प्रमाण पत्र दे चुकी है लेकिन राज्य सरकार उदासीन हैं
वर्तमान में चीनी का विक्रय सरकार के प्रतिनिधि द्वारा ही होता है जिसका पचासी परसेंट हिस्सा किसान को और 15 परसेंट में बैंक ब्याज समेत मिल प्रबंधन को जाता है लेकिन इसे भी रोक रोक कर किस्तों में बेचा जा रहा है ताकि किसान के खाते में पैसा लेट से पहुंचे और किसान गन्ना उप जाना बंद कर मिल को बंदी के कगार पर लाएं इसे एक साथ अगर राज्य सरकार परचेस कर लेती है तो फटाफट पचासी परसेंट हिस्सा किसान के खाते में चले जाएगा
एथेनॉल प्लांट के लिए अगर राज्य सरकार सहायता प्रदान कर दे तो उसके इस असफल शराबबंदी के दौर में भी एथेनॉल उत्पादन से मिल की आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है और किसानों को ससमय भुगतान हो सकता है
यही मिल जो कभी किसान को एडवांस भी दे दिया करती थी आज 3 वर्षों का बकाया रखी हुई है
हमें निर्णय करना होगा हम उस मिल को बचाने में खड़े हैं जैसे लाखों चूल्हे प्रभावित हैं या फिर उस सरकार के साथ खड़े हैं जिसकी प्राथमिकता एक-एक कर तमाम मिलो को बंद करना है
हमारा मुहिम है किसान का पाई पाई दिलाना लेकिन मिल को भी बचाना एक बार तो अपनी संपत्ति बेच कर भी मिल पेमेंट कर सकता है लेकिन यह कोई निदान नहीं क्योंकि गन्ना और मेल दोनों इस क्षेत्र के पहचान और चूल्हे जलने का कारण भी है किसानों के लिए
इस मुहिम में हम लोग गांव गांव पहुंचकर हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाला जाएगा अगर राजनीतिक समाधान नहीं निकला तो
आप ऑनलाइन भी इस पिटिशन को साइन कर सकते हैं लिंक है
https://www.change.org/riga_mills
#संजय संघर्ष सिंह
Sudhir Kumar Singh

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