50 से ज़्यादा: जानवरों के खिलाफ़ क्रूरता के जुर्माने को बढ़ाया जाए

50 से ज़्यादा: जानवरों के खिलाफ़ क्रूरता के जुर्माने को बढ़ाया जाए

समस्या

प्रिय नागरिकों,

पीपुल्स फॉर ऐनिमल्स, पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन और ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल/इंडिया, देश के इन सबसे बड़े पशु संरक्षण संगठनों की ओर से हम माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन करते हैं कि वे पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) के अंतर्गत पशुओं पर क्रूरता के अपराध के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने को बढ़ाएं।

हमारे देश में आए दिन किसी न किसी मासूम, बेज़ुबान जानवर को क्रूरता एवं बर्बरता का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर, पालतू पशुओं के व्यापार में, प्रयोगशालाओं में, सर्कस में, परिवहन के लिए और न जाने कहाँ कहाँ और कितने प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं ये बेज़ुबान। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि जानवरों के खिलाफ अपराध के आरोपियों में इंसानों के प्रति भी हिंसक अपराधों के लिए एक चौंकाने वाली प्रवृत्ति होती है। इस कारण से भारत में पशु क्रूरता और दुर्व्यवहार के अनगिनत उदाहरणों को एक पूर्वाभास के रूप में देखा जाना चाहिए।

ये दुर्भाग्य है कि जो अपराध क्रूरता के श्रेणी में आते हैं वो मौजूदा कानून के हिसाब से संज्ञेय (Cognizable) अपराध नहीं होता (जानवरों को खेल के लिए लड़ाना, उन्हें गोली मारना एवं उन्हें हानिकारक केमिकल देना को छोड़कर)। इसके अतिरिक्त, अपराधियों को केवल 50 रुपये का जुर्माना देकर छोड़ दिया जाता है क्योंकि पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) के तहत ये सबसे अधिक जुर्माना होता है। इस अधिनियम के तहत पहली बार अपराध करने वाले को 10 रुपये से 50 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। और दूसरी बार अपराध करने पर 100 रुपये का।

इस अधिनियम को पिछले 60 वर्षों में संशोधित नहीं किया गया है और ये लंबे समय से पशु क्रूरता को रोकने में बिलकुल कारगर नहीं है। कम जुर्माना लोगों को पशुओं को हानि पहुँचाने से रोकने में बिल्कुल कारगर नहीं है।

दशकों पुराने कमज़ोर हो चुके कानून का फायदा अपराधी उठाते हैं। वो जानवरों को मार देते हैं, उन्हें अपाहिज बना देते हैं, उनके साथ बर्बरता की हदें पार कर देते हैं और अंत में कमज़ोर कानून के सहारे बच निकलते हैं। इसका नतीजा है कि पुलिस और कानूनी एजेंसियाँ जानवरों के खिलाफ जघन्य से जघन्य अपराध के मामले में भी कड़ी कार्रवाई करने का उत्साह नहीं दिखाते। 

60 साल से ना जाने कितने मासूम जानवरों के गुनहगार बिना किसी दंड के आज़ाद घूम रहे हैं और इस अधिनियम में कोई संशोधन नहीं हुआ है। इतने दशकों बाद भी संसद ने इस कानून में संशोधन करने का कदम नहीं उठाया है। इसका नतीजा है कि जानवरों के साथ खुले आम हिंसा होती है, कुत्ते-बिल्लियों की खाल उधेड़ दी जाती है, उन्हें ज़िंदा फंदे ले लटकाकर मार दिया जाता है, ज़िंदा जला दिया जाता है, और तो और उनके साथ अप्राकृतिक सेक्स और यौन हिंसा भी की जाती है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद होते हैं कि वो सोशल मीडिया पर इन घटनाओं का वीडियो भी डालते हैं ताकि वो नाम कमा सकें क्योंकि उनके अंदर कानून का कोई डर होता ही नहीं है।

जब पशुओं को क्रूरता से बचाने के लिए कड़े कानून ही नहीं होंगे तो लोग डरेंगे भी कैसे?

इस संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी कर मौजूदा कानून में जुर्माने और सज़ा के प्रावधानों में संशोधन की बात कही है।

अहिंसा और दया हमारी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था, “किसी राष्ट्र की महानता इस बात से समझी जा सकती है कि वो राष्ट्र अपने जानवरों के प्रति कैसा व्यवहार करता है।”

जानवरों पर भयावह हिंसा कर के बिना किसी सज़ा के घूमने वाले अपराधी हमारे भारत की अहिंसा और दया की संस्कृति के पथ में एक बाधा हैं। ऐसे कैसे हमारा देश महान बनेगा? इसलिए ज़रूरी है कि हम सब मिलकर पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) में संशोधन के लिए मिलकर आवाज़ उठाएं।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और पशु-पालन एवं डेयरी मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी को संबोधित ये पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) में संशोधन किया जाए।

भारत के एक नागरिक के रूप में हम सबके पास एक सुनहरा मौका है करोड़ों बेज़ुबान जानवरों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाने का, उन्हें हिंसा से बचाने का।

कृपया इस मौके को जाने ना दें, पेटीशन साइन करें और इसे भारत के हर घर तक पहुँचाने में हमारी सहायता करें।

धन्यवाद,

गौरी मुलेखी
ट्रस्टी
पीपल फॉर ऐनिमल्स - पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन

आलोकपर्ण सेनगुप्ता
मैनेजिंग डायरेक्टर
ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशलन/इंडिया

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Gauri Maulekhiपेटीशन स्टार्टर

4,06,442

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प्रिय नागरिकों,

पीपुल्स फॉर ऐनिमल्स, पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन और ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल/इंडिया, देश के इन सबसे बड़े पशु संरक्षण संगठनों की ओर से हम माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन करते हैं कि वे पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) के अंतर्गत पशुओं पर क्रूरता के अपराध के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने को बढ़ाएं।

हमारे देश में आए दिन किसी न किसी मासूम, बेज़ुबान जानवर को क्रूरता एवं बर्बरता का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर, पालतू पशुओं के व्यापार में, प्रयोगशालाओं में, सर्कस में, परिवहन के लिए और न जाने कहाँ कहाँ और कितने प्रकार के दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं ये बेज़ुबान। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि जानवरों के खिलाफ अपराध के आरोपियों में इंसानों के प्रति भी हिंसक अपराधों के लिए एक चौंकाने वाली प्रवृत्ति होती है। इस कारण से भारत में पशु क्रूरता और दुर्व्यवहार के अनगिनत उदाहरणों को एक पूर्वाभास के रूप में देखा जाना चाहिए।

ये दुर्भाग्य है कि जो अपराध क्रूरता के श्रेणी में आते हैं वो मौजूदा कानून के हिसाब से संज्ञेय (Cognizable) अपराध नहीं होता (जानवरों को खेल के लिए लड़ाना, उन्हें गोली मारना एवं उन्हें हानिकारक केमिकल देना को छोड़कर)। इसके अतिरिक्त, अपराधियों को केवल 50 रुपये का जुर्माना देकर छोड़ दिया जाता है क्योंकि पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) के तहत ये सबसे अधिक जुर्माना होता है। इस अधिनियम के तहत पहली बार अपराध करने वाले को 10 रुपये से 50 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। और दूसरी बार अपराध करने पर 100 रुपये का।

इस अधिनियम को पिछले 60 वर्षों में संशोधित नहीं किया गया है और ये लंबे समय से पशु क्रूरता को रोकने में बिलकुल कारगर नहीं है। कम जुर्माना लोगों को पशुओं को हानि पहुँचाने से रोकने में बिल्कुल कारगर नहीं है।

दशकों पुराने कमज़ोर हो चुके कानून का फायदा अपराधी उठाते हैं। वो जानवरों को मार देते हैं, उन्हें अपाहिज बना देते हैं, उनके साथ बर्बरता की हदें पार कर देते हैं और अंत में कमज़ोर कानून के सहारे बच निकलते हैं। इसका नतीजा है कि पुलिस और कानूनी एजेंसियाँ जानवरों के खिलाफ जघन्य से जघन्य अपराध के मामले में भी कड़ी कार्रवाई करने का उत्साह नहीं दिखाते। 

60 साल से ना जाने कितने मासूम जानवरों के गुनहगार बिना किसी दंड के आज़ाद घूम रहे हैं और इस अधिनियम में कोई संशोधन नहीं हुआ है। इतने दशकों बाद भी संसद ने इस कानून में संशोधन करने का कदम नहीं उठाया है। इसका नतीजा है कि जानवरों के साथ खुले आम हिंसा होती है, कुत्ते-बिल्लियों की खाल उधेड़ दी जाती है, उन्हें ज़िंदा फंदे ले लटकाकर मार दिया जाता है, ज़िंदा जला दिया जाता है, और तो और उनके साथ अप्राकृतिक सेक्स और यौन हिंसा भी की जाती है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद होते हैं कि वो सोशल मीडिया पर इन घटनाओं का वीडियो भी डालते हैं ताकि वो नाम कमा सकें क्योंकि उनके अंदर कानून का कोई डर होता ही नहीं है।

जब पशुओं को क्रूरता से बचाने के लिए कड़े कानून ही नहीं होंगे तो लोग डरेंगे भी कैसे?

इस संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी कर मौजूदा कानून में जुर्माने और सज़ा के प्रावधानों में संशोधन की बात कही है।

अहिंसा और दया हमारी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने कहा था, “किसी राष्ट्र की महानता इस बात से समझी जा सकती है कि वो राष्ट्र अपने जानवरों के प्रति कैसा व्यवहार करता है।”

जानवरों पर भयावह हिंसा कर के बिना किसी सज़ा के घूमने वाले अपराधी हमारे भारत की अहिंसा और दया की संस्कृति के पथ में एक बाधा हैं। ऐसे कैसे हमारा देश महान बनेगा? इसलिए ज़रूरी है कि हम सब मिलकर पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) में संशोधन के लिए मिलकर आवाज़ उठाएं।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और पशु-पालन एवं डेयरी मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी को संबोधित ये पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 ( Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 ) में संशोधन किया जाए।

भारत के एक नागरिक के रूप में हम सबके पास एक सुनहरा मौका है करोड़ों बेज़ुबान जानवरों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाने का, उन्हें हिंसा से बचाने का।

कृपया इस मौके को जाने ना दें, पेटीशन साइन करें और इसे भारत के हर घर तक पहुँचाने में हमारी सहायता करें।

धन्यवाद,

गौरी मुलेखी
ट्रस्टी
पीपल फॉर ऐनिमल्स - पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन

आलोकपर्ण सेनगुप्ता
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Shri Narendra Modi
Prime Minister of India

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