जैन धर्म के क्षमापना पर्व को राष्ट्रीय क्षमापना दिवस के रुप में मनाना चाहिए

समस्या

जैन धर्म के मान्यता नुसार प्रतिवर्ष भाद्रपाद माह में एक दिन साल भर में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते है। चाहे वो बडा हो या छोटा, गरीब हो या अमीर, गुरु हो या शिष्य हर कोई एक दूसरों से साल भर में हुई गलतियों के लिए क्षमायाचना करते है। जिससे आपसी कटुता खत्म होकर प्यार और सौहार्द बढता है। मन की कटुता खत्म होती है।

आज के इस स्पर्धा के दौर में हर किसी से जाने अन्जाने में कोई ना कोई भूल होती है। अगर हम साल में एक दिन इन गलतियों के लिए माफी मांग ले तो पूरे देश में लोगों के बीच प्यार बढाने में सहाय्य होगा। हम अगर दूसरे देशों से मिली संस्कृति के व्हँलेंटाईन डे, मदर डे, फादर डे मना सकते है तो हमारी संस्कृति के नुसार होनेवाले त्यौहारों को राष्ट्रीय स्वरुप देकर क्यों ना मनाये...

अगर भारत सरकार इसे राष्ट्रीय क्षमापना दिवस के रुप में घोषित करे तो यह दिन पूरे देशवासियों के लिए खास दिन होगा।

- पारस जैन नासिक

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Paras Lohade Jainपेटीशन स्टार्टर
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जैन धर्म के मान्यता नुसार प्रतिवर्ष भाद्रपाद माह में एक दिन साल भर में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगते है। चाहे वो बडा हो या छोटा, गरीब हो या अमीर, गुरु हो या शिष्य हर कोई एक दूसरों से साल भर में हुई गलतियों के लिए क्षमायाचना करते है। जिससे आपसी कटुता खत्म होकर प्यार और सौहार्द बढता है। मन की कटुता खत्म होती है।

आज के इस स्पर्धा के दौर में हर किसी से जाने अन्जाने में कोई ना कोई भूल होती है। अगर हम साल में एक दिन इन गलतियों के लिए माफी मांग ले तो पूरे देश में लोगों के बीच प्यार बढाने में सहाय्य होगा। हम अगर दूसरे देशों से मिली संस्कृति के व्हँलेंटाईन डे, मदर डे, फादर डे मना सकते है तो हमारी संस्कृति के नुसार होनेवाले त्यौहारों को राष्ट्रीय स्वरुप देकर क्यों ना मनाये...

अगर भारत सरकार इसे राष्ट्रीय क्षमापना दिवस के रुप में घोषित करे तो यह दिन पूरे देशवासियों के लिए खास दिन होगा।

- पारस जैन नासिक

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