भारत बने भारत अभियान

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संभवत भारत विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जिसे भारत में और भारतीय भाषाओं में तो "भारत" नाम से जाना जाता है लेकिन विदेश में और विदेशी भाषाओं में अन्य  नाम से जाना जाता है। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा, चीन, पाकिस्तान, श्रीलंका या बांग्लादेश देशी और विदेशी सभी भाषाओं में एक ही नाम से जाने जाते हैं लेकिन भारत हिंदी और भारतीय भाषाओं में तो भारत नाम से लेकिन अंग्रेजी और विदेशी भाषाएं में इंडिया नाम से जाना जाता है। भारत नाम तेजी से विलुप्त होता रहा है। यही हाल रहा तो दस-बीस साल बाद "भारत" नाम इतिहास के पन्नों में उसी तरह दबकर रह जाएगा जैसे किसी की याद में किताबों में दबा कर रखा गया गुलाब का सुखा फूल। किसी भी भारतीय को यह स्थिति स्वीकार्य  नहीं हो सकती क्योंकि "भारत" नाम में समाहित है हमारा स्वर्णिम इतिहास, जब देश विश्वगुरु और सोने की चिड़िया जैसे विशेषणों से जाना जाता था। 

भारत का शाब्दिक अर्थ है-

भा = प्रकाश, तेज, आभा।

रत = निमग्न, युक्त।

भारत अर्थात प्रकाशमय, आभावान, तेजस्वी।

इतने सुंदर नाम को भूल कर हम उन नामों को अपनाते चले जा रहे हैं जो विदेशी आक्रांताओं के द्वारा हम पर तब थोपे गए थे जब उनका अधिकार था लेकिन अब हम एक स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र हैं। फिर क्यों हम "भारत" के अतिरिक्त किसी अन्य ऐसे नाम को ढोए जा रहे हैं जो हमारी गुलामी का प्रतीक है? सोचिए कि क्या कोई भी समझदार व्यक्ति बुरे सपने को जीवन भर याद रखना चाहता है? या क्या दुर्घटना  की तस्वीरों से घर की दीवारें सजाई जाती हैं?

"भारत" सिर्फ एक नाम नहीं अपितु यह नाम हमारी स्वतंत्रता का जय घोष है। वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से ओतप्रोत एक समग्र जीवन पद्धति है, एक समग्र जीवन दर्शन है। अतः क्यों न हम अपने देश के लिए गौरवमयी, पारंपरिक "भारत" नाम को फिर से स्थापित करें? 

भारत नाम की पुनर्स्थापना के लिए हमने भारत बने  भारत अभियान प्रारंभ  किया है। इस अभियान में हम प्रत्येक भारतवासी से यह संकल्प धारण करने की अपेक्षा करते हैं कि जहां भी देश के नाम का उल्लेख करने की आवश्यकता हो अपने देश के लिए केवल भारत/Bharat नाम का ही उपयोग करें चाहे भाषा कोई भी हो देशी या विदेशी हो। यदि आप इससे सहमत हैं तो कृपया आप भी तत्काल यह संकल्प धारण करें।

भारत बने भारत अभियान के तहत हम एक पत्र पर हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं जो प्रधानमंत्री भारत सरकार को संबोधित है। इस पत्र के माध्यम से हम चाहते हैं कि-

1) भारत की संसद, सभी भारतीय राज्यों की विधानसभाओं, सभी भारतीय न्यायालयों , सभी भारतीय कार्यालयों, संस्थानों में कार्यवाही की भाषा चाहे जो भी हो लेकिन जहां भी देश के नाम का उल्लेख करने की आवश्यकता हो "भारत" नाम ही प्रयोग किया जाए।

२) विदेशी सरकारों से व्यवहार में भी, भाषा चाहे कोई भी हो लेकिन देश के लिए "भारत" नाम का ही प्रयोग किया जाए और विदेशी सरकारों से भी अपेक्षा की जाए कि वे भी आपसी व्यवहार में हमारे देश के लिए "भारत" नाम का ही उपयोग करें।

३) सभी शासकीय / अशासकीय स्थान, संस्थान, जिनके नाम में भारत शब्द का प्रयोग हुआ है, उन्हें संशोधित कर सभी भाषाओं में "भारत" नाम का प्रयोग प्रचलित  किया जाए जैसे इंडिया गेट की जगह "भारत द्वार", गेटवे ऑफ इंडिया  की जगह "भारत प्रवेश द्वार" पार्लियामेंट ऑफ़ इंडिया  की जगह "पार्लियामेंट ऑफ  भारत", रिजर्व  बैंक ऑफ़ इंडिया की जगह "रिजर्व बैंक ऑफ  भारत", भारतीय स्टेट बैंक की जगह  "स्टेट बैंक ऑफ  भारत", बैंक ऑफ़ इंडिया की जगह" बैंक ऑफ़ भारत", इंडियन रेल की जगह "भारतीय रेल", इंडियन ऑयल की जगह "भारतीय तेल" क्लीन इंडिया की जगह     "क्लीन भारत" मेक इन इंडिया की जगह "मेक इन भारत" मेड इन इंडिया की जगह "मेड इन भारत" न्यू इंडिया की जगह "नवभारत" आदि।

४) दृश्य, श्रव्य  और पाठ्य  सभी संचार माध्यमों में, फिल्मों में, विज्ञापनों में भी भाषा चाहे कोई भी हो देश के लिए भारत नाम का ही उपयोग किया जाए।

५) भारत नाम को अधिक से अधिक दृश्य मान, श्रव्यमान बनाया जाए।

यदि आप इस अभियान से सहमत हैं तो मेरी इस पिटीशन पर हस्ताक्षर कर अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करें ताकि हम सभी भारतवासी और भारत सरकार देश के लिए गौरवमयी "भारत" नाम को अपनाने के लिए तत्पर हों।

मैं आपको यह भी अवगत करा देना चाहती हूं कि इस परिवर्तन के लिए न तो देश के संविधान या किसी कानून में संशोधन की आवश्यकता है, न ही कोई नया कानून बनाने की जरूरत है। आवश्यकता है केवल यह सार्वजनिक/सरकारी संकल्प लेने और उसे कार्यान्वित करने की, कि अपने देश के लिए देशी या विदेशी किसी भी भाषा में "भारत" नाम का ही प्रयोग करेंगे।

निवेदक

ब्र. विजयलक्ष्मी जैन

आचार्य श्री विद्यासागर अहिंसक रोजगार प्रशिक्षण केंद्र, विजयनगर, इन्दौर