प्रधानमंत्री जी : कैंसर देने वाले खरपतवार नाशक ग्लाईफोसेट पर रोक लगाकर देशवासियों की जान बचाएं

समस्या

उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले के एक छोटे से गाँव में 3-4 साल के भीतर 10 गाँववालों की मौत हो गई। और जैसा कि देश के गाँवों के साथ होता है, ना मीडिया में खबर आती है और ना कोई इसकी सुध लेता है।

इन मौतों को सामान्य समझा जाता है लेकिन जब सच्चाई सामने आती है तो हर कोई चौंक जाता है।

जिनकी भी जान गई, उन्होंने पहले शिकायत की कि उनकी गर्दन या शरीर के अन्य हिस्से में गांठ हुई। बाद में पता चला कि ये गांठ एक तरह का कैंसर है।

ये दुर्भाग्य है कि इतनी ज़िंदगियां बर्बाद होने के बाद लोगों को पता चला कि इन मौतों का असली कारण एक खरपतवार नाशक था। जिन 10 लोगों की जान गई वो सब ग्लाईफोसेट के संपर्क में आने से हुई।

ग्लाईफोसेट एक खरपतवार नाशक है, जो राउंडअप या ग्लाईसेल के नाम से बाज़ार में बिकता है। ये चाय और चावल की खेती में इस्तेमाल किया जाता है। केले और अनानास जैसे फलों को उगाने के लिए भी ग्लाईफोसेट का प्रयोग हो रहा है। और अब तो स्थिति ये है कि लोग अपने घरों में छोटा गार्डन भी बनाते हैं तो इसका इस्तेमाल करते हैं।

ये खरपतवार नाशक केवल खरपतवारों का नहीं बल्कि इंसानों के जीवन का भी नाश कर रहा है। ये साधारण लोगों की जान ले रहा है, जो इस खरपतवार नाशक के संपर्क में आ रहे हैं। ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश की कई प्रदेशों और दुनियाभर में ऐसे मामले देखे जा रहे हैं।

2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने कंफर्म किया कि ग्लाईफोसेट कैंसर का कारण है। साथ ही इससे लिंफोमा, डीएनए और क्रोमोसोमल डैमेज भी होता है।

इसके तुरंत बाद कई देशों ने ग्लाईफोसेट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई। मई महीने में अमरीका की एक कोर्ट ने राउंडअप बनाने वाली कंपनी बेयर-मॉन्सेंटो को एक युगल को लगभग 14,000 करोड़ का जुर्माना देने को कहा, जिन्हें इस खरपतवार नाशक के इस्तेमाल के बाद कैंसर हुआ था।

हमारे देश में पंजाब ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 2018 में ग्लाईफोसेट पर रोक लगाई। इसके बाद केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने भी इसपर रोक लगाई। महाराष्ट्र्र भी इसपर गंभीरता से विचार कर रहा है। पर इस खतरनाक खरपतवार नाशक पर एक राष्ट्र्रव्यापी रोक अभी तक नहीं लगाई गई है।

इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि अभी भी बहुत कम भारतीय, खासतौर पर हमारे देश के किसानों को ग्लाईफोसेट के खतरों के बारे में जानकारी है।

इसलिए मैैंने माननीय प्रधानमंत्री के नाम ये पेटीशन शुरू की है ताकि पूरे देश में ग्लाईफोसेट पर रोक लगे और लाखों-करोड़ों भारतीयों के जीवन की रक्षा हो सके। मैं इस अहम मुद्दे पर पूरे देश में जागरुकता लाना चाहता हूँ। कृपया मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें।

हमें तुंरत काम करना होगा क्योंकि जानकारी की कमी हमारी जान ले रही है। खरपतवार नाशक कंपनियां इसका फायदा उठा रही हैं। वो किसानों को लुभावने ऑफर देकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। किसान भी झांसे में आ रहे हैं क्योंकि उनसे कहा जा रहा है कि ये खरपतवार नाशक सबसे असरदार और किफायती है।

वो ये नहीं बताते कि कैसे इसके कारण देश के नागरिकों की जान जा रही है।

हमारे प्रधानमंत्री जी को किसानों और देश के नागरिकों की स्वास्थ्य की बहुत चिंता है। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए चलिए उनसे आग्रह करें कि वो ग्लाईफोसेट पर रोक लगाएं।

पेटीशन पर हस्ताक्षर करें साथ ही WhatsApp, Facebook, इत्यादि के माध्यम से इसे घर-घर पहुँचाएं। #GlyphosateParRok #BanGlyphosateInIndia

avatar of the starter
Ashwani Mahajanपेटीशन स्टार्टरAuthor, Columnist, Professor, PGDAV College, University of Delhi. National Co- convenor SwadeshiJagranManch <a href="http://www.facebook.com/ashwanimahajansjm/" rel="nofollow">http://www.facebook.com/ashwanimahajansjm/</a>
कामयाबी
2,02,000 समर्थकों के साथ इस पेटीशन ने बदलाव लाया!

समस्या

उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले के एक छोटे से गाँव में 3-4 साल के भीतर 10 गाँववालों की मौत हो गई। और जैसा कि देश के गाँवों के साथ होता है, ना मीडिया में खबर आती है और ना कोई इसकी सुध लेता है।

इन मौतों को सामान्य समझा जाता है लेकिन जब सच्चाई सामने आती है तो हर कोई चौंक जाता है।

जिनकी भी जान गई, उन्होंने पहले शिकायत की कि उनकी गर्दन या शरीर के अन्य हिस्से में गांठ हुई। बाद में पता चला कि ये गांठ एक तरह का कैंसर है।

ये दुर्भाग्य है कि इतनी ज़िंदगियां बर्बाद होने के बाद लोगों को पता चला कि इन मौतों का असली कारण एक खरपतवार नाशक था। जिन 10 लोगों की जान गई वो सब ग्लाईफोसेट के संपर्क में आने से हुई।

ग्लाईफोसेट एक खरपतवार नाशक है, जो राउंडअप या ग्लाईसेल के नाम से बाज़ार में बिकता है। ये चाय और चावल की खेती में इस्तेमाल किया जाता है। केले और अनानास जैसे फलों को उगाने के लिए भी ग्लाईफोसेट का प्रयोग हो रहा है। और अब तो स्थिति ये है कि लोग अपने घरों में छोटा गार्डन भी बनाते हैं तो इसका इस्तेमाल करते हैं।

ये खरपतवार नाशक केवल खरपतवारों का नहीं बल्कि इंसानों के जीवन का भी नाश कर रहा है। ये साधारण लोगों की जान ले रहा है, जो इस खरपतवार नाशक के संपर्क में आ रहे हैं। ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश की कई प्रदेशों और दुनियाभर में ऐसे मामले देखे जा रहे हैं।

2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) ने कंफर्म किया कि ग्लाईफोसेट कैंसर का कारण है। साथ ही इससे लिंफोमा, डीएनए और क्रोमोसोमल डैमेज भी होता है।

इसके तुरंत बाद कई देशों ने ग्लाईफोसेट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई। मई महीने में अमरीका की एक कोर्ट ने राउंडअप बनाने वाली कंपनी बेयर-मॉन्सेंटो को एक युगल को लगभग 14,000 करोड़ का जुर्माना देने को कहा, जिन्हें इस खरपतवार नाशक के इस्तेमाल के बाद कैंसर हुआ था।

हमारे देश में पंजाब ने लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 2018 में ग्लाईफोसेट पर रोक लगाई। इसके बाद केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने भी इसपर रोक लगाई। महाराष्ट्र्र भी इसपर गंभीरता से विचार कर रहा है। पर इस खतरनाक खरपतवार नाशक पर एक राष्ट्र्रव्यापी रोक अभी तक नहीं लगाई गई है।

इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि अभी भी बहुत कम भारतीय, खासतौर पर हमारे देश के किसानों को ग्लाईफोसेट के खतरों के बारे में जानकारी है।

इसलिए मैैंने माननीय प्रधानमंत्री के नाम ये पेटीशन शुरू की है ताकि पूरे देश में ग्लाईफोसेट पर रोक लगे और लाखों-करोड़ों भारतीयों के जीवन की रक्षा हो सके। मैं इस अहम मुद्दे पर पूरे देश में जागरुकता लाना चाहता हूँ। कृपया मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें।

हमें तुंरत काम करना होगा क्योंकि जानकारी की कमी हमारी जान ले रही है। खरपतवार नाशक कंपनियां इसका फायदा उठा रही हैं। वो किसानों को लुभावने ऑफर देकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। किसान भी झांसे में आ रहे हैं क्योंकि उनसे कहा जा रहा है कि ये खरपतवार नाशक सबसे असरदार और किफायती है।

वो ये नहीं बताते कि कैसे इसके कारण देश के नागरिकों की जान जा रही है।

हमारे प्रधानमंत्री जी को किसानों और देश के नागरिकों की स्वास्थ्य की बहुत चिंता है। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए चलिए उनसे आग्रह करें कि वो ग्लाईफोसेट पर रोक लगाएं।

पेटीशन पर हस्ताक्षर करें साथ ही WhatsApp, Facebook, इत्यादि के माध्यम से इसे घर-घर पहुँचाएं। #GlyphosateParRok #BanGlyphosateInIndia

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Ashwani Mahajanपेटीशन स्टार्टरAuthor, Columnist, Professor, PGDAV College, University of Delhi. National Co- convenor SwadeshiJagranManch <a href="http://www.facebook.com/ashwanimahajansjm/" rel="nofollow">http://www.facebook.com/ashwanimahajansjm/</a>

फैसला लेने वाले

Rajendra Agrawal
Member of Parliament (BJP), Meerut, Uttar Pradesh
रिस्पोंस दिया गया
प्रिय नागरिकों, इसमें कोई संदेह नहीं कि डॉ अश्विनी महाजन जी ने Change.org हिंदी पर एक गंभीर मुद्दे पर पेटीशन शुरू किया है। मैं ग्लाईफोसेट पर रोक लगाए जाने की उनकी पेटीशन का पूरा समर्थन करता हूँ। अपनी पेटीशन में अश्विनी महाजन जी ने सही ही लिखा है कि “अभी भी बहुत कम भारतीय, खासतौर पर हमारे देश के किसानों को ग्लाईफोसेट के खतरों के बारे में जानकारी है।” मैं इस बात से भी प्रसन्न हूँ कि Change.org हिंदी पर डॉ अश्विनी महाजन जी की पेटीशन को जनता का अपार समर्थन प्राप्त हो रहा है। अश्विनी जी ने जनता की भलाई का मुद्दा उठाया है। जैसा कि डॉ अश्विनी महाजन जी ने लिखा है कि कई देशों में इस खतरनाक खरपतवार-नाशक पर रोक लगाई जा चुकी है तो हमारे देश में भी इस विषय में निश्चित ही ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यक्ता है। एक जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की बात करना मेरा दायित्व और कर्तव्य है। मैं जनता के मुद्दे उठाने और उनका समर्थन करने के लिए तत्पर और प्रतिबद्ध हूँ। मैं आशा करता हूँ कि श्री महाजन जी द्वारा उठाए गए मुद्दे पर गंभीरता से विचार होगा और हर भारतीय के हितों की रक्षा होगी। सादर, राजेंद्र अग्रवाल सांसद (भारतीय जनता पार्टी) मेरठ, उत्तर प्रदेश
Shri K. C. Tyagi
Secretary General & National Spokesperson, JD(U)
रिस्पोंस दिया गया
प्रिय नागरिकों, मैं Change.org हिंदी पर श्री अश्विनी महाजन की पेटीशन जो कि कैंसर-कारक खरपतवार-नाशक, ग्लाईफोसेट पर रोक लगाने को लेकर है, उसका पूरा समर्थन करता हूँ। ये घातक केमिकल हमारे किसानों के लिए बहुत बड़ा खतरा है। मैं अश्विनी महाजन जी की बात से सहमत हूँ कि खेतीबाड़ी में इसके प्रयोग को लेकर भारत को गंभीरता से दुबारा विचार करना होगा। श्री महाजन ने देश की खाद्य सुरक्षा पर असर डालने वाले गंभीर मुद्दे उठाए हैं। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि इस पेटीशन को जनता का अपार समर्थन प्राप्त हो रहा है। कई जांच के बाद प्रमाणित हुआ है कि ग्लाईफोसेट कैंसर का कारण है, कई देशों ने इसपर रोक लगाने का फैसला लिया है। इस मुद्दे पर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है क्योंकि पेस्टीसाइड कंपनियां हमारी जानकारी की कमी का लाभ उठा रही हैं। एक राजनेता के तौर पर भारतीयों और भारत के हितों की रक्षा मेरा कर्तव्य है। इसलिए, मैं उस दिशा में काम करने की प्रतिज्ञा लेता हूँ। मेरा विश्वास है कि हम मिलकर ग्लाईफोसेट के खतरों पर जागरुकता ला सकते हैं, और एक सुरक्षित और कैंसर-मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं। सादर, के सी त्यागी प्रधान महासचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, जनता दल (यूनाइटेड)
Ministry of Agriculture and Farmers Welfare
Ministry of Agriculture and Farmers Welfare
Krishi Bhawan, New Delhi
Sh. Narendra Modi
Sh. Narendra Modi
Hon'ble Prime Minister of India
Minister of Environment, Forest & Climate Change
Minister of Environment, Forest & Climate Change
Ministry of Environment, Forests and Climate Change

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12 जून 2019 पर पेटीशन बनाई गई