

घुनघुटी जंगल बचाओ, बाघ बचाओ: 15 कोयला खदानों से हमारे जंगल और जीवन की रक्षा करें!
The Issue
मध्य प्रदेश के शहडोल और उमरिया जिलों की 'प्राणवायु' कहे जाने वाले घने घुनघुटी जंगल आज भारी खतरे में हैं। विकास के नाम पर यहाँ 15 नई कोयला खदानें खोलने की तैयारी है। अगर इन खदानों को मंजूरी मिली, तो इसके परिणाम बेहद भयानक होंगे:
विनाशकारी दुष्प्रभाव:
लाखों पेड़ों की बलि और जल संकट: खदानों के लिए लाखों पेड़ काटे जाएंगे और कई प्राकृतिक नदियां व जलधाराएं सूख जाएंगी। इससे इलाके का ईको-सिस्टम बिगड़ेगा, भयंकर प्रदूषण फैलेगा और पीने के पानी का संकट पैदा होगा।
बाघों का घर उजड़ेगा: यह जंगल बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर का मुख्य हिस्सा है। यहाँ वर्तमान में 40 बाघ, तेंदुए, और पैंगोलिन जैसे दुर्लभ वन्यजीव बसते हैं। खदानें इनका घर हमेशा के लिए मिटा देंगी।
शहरों की तरफ बढ़ेंगे बाघ (मानव-पशु संघर्ष): आने वाले समय में यहाँ बाघों की संख्या 200 तक पहुँच सकती है। जब धमाकों से जंगल उजड़ेंगे, तो बेघर होकर ये बाघ और जंगली जानवर सीधे शहडोल, पाली और उमरिया के शहरी व रिहायशी इलाकों में घुसेंगे। इससे इंसानों और जानवरों के बीच खौफनाक संघर्ष होगा।
हम घुनघुटी को दूसरा 'हसदेव' नहीं बनने दे सकते। इस विनाशकारी फैसले के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में अपील (संख्या 18/2026) दायर कर कानूनी लड़ाई शुरू कर दी गई है, लेकिन अब हमें आपके साथ की सख्त ज़रूरत है।
हमारी मांग: घुनघुटी में प्रस्तावित सभी 15 कोयला खदानों की मंजूरी तुरंत रद्द की जाए!
अपनी प्राकृतिक धरोहर और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए, कृपया इस याचिका पर अपना डिजिटल हस्ताक्षर करें और इसे शेयर करें।

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मध्य प्रदेश के शहडोल और उमरिया जिलों की 'प्राणवायु' कहे जाने वाले घने घुनघुटी जंगल आज भारी खतरे में हैं। विकास के नाम पर यहाँ 15 नई कोयला खदानें खोलने की तैयारी है। अगर इन खदानों को मंजूरी मिली, तो इसके परिणाम बेहद भयानक होंगे:
विनाशकारी दुष्प्रभाव:
लाखों पेड़ों की बलि और जल संकट: खदानों के लिए लाखों पेड़ काटे जाएंगे और कई प्राकृतिक नदियां व जलधाराएं सूख जाएंगी। इससे इलाके का ईको-सिस्टम बिगड़ेगा, भयंकर प्रदूषण फैलेगा और पीने के पानी का संकट पैदा होगा।
बाघों का घर उजड़ेगा: यह जंगल बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर का मुख्य हिस्सा है। यहाँ वर्तमान में 40 बाघ, तेंदुए, और पैंगोलिन जैसे दुर्लभ वन्यजीव बसते हैं। खदानें इनका घर हमेशा के लिए मिटा देंगी।
शहरों की तरफ बढ़ेंगे बाघ (मानव-पशु संघर्ष): आने वाले समय में यहाँ बाघों की संख्या 200 तक पहुँच सकती है। जब धमाकों से जंगल उजड़ेंगे, तो बेघर होकर ये बाघ और जंगली जानवर सीधे शहडोल, पाली और उमरिया के शहरी व रिहायशी इलाकों में घुसेंगे। इससे इंसानों और जानवरों के बीच खौफनाक संघर्ष होगा।
हम घुनघुटी को दूसरा 'हसदेव' नहीं बनने दे सकते। इस विनाशकारी फैसले के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में अपील (संख्या 18/2026) दायर कर कानूनी लड़ाई शुरू कर दी गई है, लेकिन अब हमें आपके साथ की सख्त ज़रूरत है।
हमारी मांग: घुनघुटी में प्रस्तावित सभी 15 कोयला खदानों की मंजूरी तुरंत रद्द की जाए!
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Petition created on 7 October 2026