क्या हम कसाई है ? जनता की अदालत में ?

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The Issue

समाज में चिकित्साकर्मियों के ख़िलाफ़ बढ़ता असंतोष और बढ़ती हिंसा । आज कुछ अपवादों को छोड़ दे तो अधिकतर मामलों में चिकित्सक अपनी समुचित कोशिश के बावजूद यदि मरीज को नहीं बचा पाते तो  परिजन आक्रोशित हो जाते हैं और हिंसा पर आमादा हो जाते है । इल्जाम वहीं की डॉक्टर्स की लापरवाही थी । गलत इंजेक्शन लगा दिया । कानून का पालन करने की बजाय दादागिरी से अपनी बात रखी जाती है । 

इसी बात को लेकर आ रही  फ़िल्म में सन्नी देओल डॉक्टर्स को मारते पीटते नजर आ रहे है . इस तरह ए चित्रण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नामपर केवल और केवल अपना व्यापारिक लाभ कमाना है  ।

 १. इसने  अपने बाप की अंत समय में सेवा करने की बजाय डॉक्टरों के पास छोड़ दिया था की आप सेवा करो । 

२. यह विलासिता का जीवन जीते है , पूरी तरह से अनैतिक और डॉक्टर्स से सन्यासी की तरह रहने को कहते है । 

३. अमिताभ की कितनी बार जान डॉक्टर्स ने बचाई या इन भांडों ने । 

जनता यह सुनिश्चित करे की आईएएस तरह की फ़िल्म क्या समाज का भला करेंगी ? 

आने वाला कल क्या - आपसे आपकी जिम्मेदारी नहीं पूछेगा . 

जनता जनार्दन की अदालत में ? 

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Manoj GuptaPetition Starter

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