

कोरोना मृतकों का सम्मान: अस्थायी श्मशान घाट व दफ्न के लिए ज़्यादा जगह मुहैया कराएं


कोरोना मृतकों का सम्मान: अस्थायी श्मशान घाट व दफ्न के लिए ज़्यादा जगह मुहैया कराएं
समस्या
भारत में कोरोना की दूसरी लहर का भयावह साया हर नागरिक को डरा रहा है। इस लहर में ना केवल लाखों की संख्या में केस मिल रहे हैं बल्कि पहले से कहीं ज़्यादा मौतें हो रही हैं। मौत का आंकड़ा इतना बड़ा होता जा रहा है कि श्मशान घाटों में लकड़ियां और कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ने लगी है।
माननीय, आप नींद से कब जागेंगे? आखिर आपके कोरोना के प्लान में श्मशान, कब्रिस्तान और मुर्दाघर की हालत को सुधारना कब शामिल होगा? आखिर कितनी महामारियों के बाद आप सीख लेंगे और कदम उठाएंगे?
पिछले साल ‘टाइम्स नाऊ’ चैनल दिन रात उन भयावह तस्वीरों को जनता के सामने चलाता रहा। प्राइमटाइम डिबेट में मैंने चीख-चीखकर बताया था कि कैसे मुंबई में कोरोना की दस्तक से पहले ही मुर्दाघरों और श्मशानों की हालत खस्ता थी। अब कोरोना के बाद हालात क्या होंगे, सोचकर ही दिल बैठ जाता है।
इसके बावजूद, ना राज्य सरकार और ना केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। सेंट जॉर्ज अस्पताल में नए मुर्दाघर के निर्माण का अभी तक टेंडर भी नहीं निकला। शायद इसलिए क्योंकि इसकी घोषणा को अभी चार साल ही तो हुए हैं!!!
मेरी उम्र 65 साल है और एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं मृतकों का सम्मान सुनिश्चित कराए जाने के लिए सालों से आवाज़ उठाती रही हूँ। दफ्तर, अधिकारी, नेता, मैंने कहाँ नहीं गई ताकि महाराष्ट्र सरकार नींद से जागे। मैं मुंबई में एक मुर्दाघर के निर्माण के लिए लड़ती रही ताकि जो ये दुनिया छोड़ने वालों को उनके अपने सम्मान के साथ विदा कर सकें।
माननीय, आज ये आपदा केवल एक शहर में नहीं बल्कि पूरे भारत में है। कोरोना से जि़ंदगी गंवाने वालों के संदर्भ में तत्काल तीन कदम उठाने होंगे: सम्मान से उनका अंतिम संस्कार, इस काम में उनके अपनों की जान जोखिम में ना पड़े और इसकी प्रक्रिया में ज़रूरी सभी संसाधनों की मौजूदगी सुनिश्चित हो।
पूरा देश देख रहा है कि कैसे लोग अपनों की लाश को लेकर श्मशान और कब्रिस्तान के बाहर लाइन में खड़े हैं। इस काम में जुट रही भीड़ के कारण परिजनों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। फिर सवाल श्मशान और कब्रिस्तान में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा का भी है, जिनके पास पीपीई किट तक नहीं हैं।
मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि भारत सरकार सभी राज्यों को अस्थायी इलेक्ट्रिक श्मशान घाट स्थापित करने और मुर्दों को दफ्न करने के लिए ज़्यादा जगह देने का आदेश जारी करे।
हम में से कोई नहीं जानता कि आगे क्या होगा। कोरोना से मरने वाला कोई भी व्यक्ति केवल एक नंबर नहीं है, एक संख्या नहीं है। वो भारत का नागरिक है, जिसकी अंतिम यात्रा सम्मान से भरी होनी चाहिए।
आज कल बहुत कम लोग ज़िंदा लोगों के अधिकार की बात करते हैं। उससे कहीं गुना गम वो लोग हैं जो किसी मृतक के अधिकार की बात करते हैं। इस नेक काम के लिए प्लीज़ अपना समर्थन ज़रूर दें।
जब ज़्यादा लोग ये मांग उठाएंगे तो शासन-प्रशासन को कदम उठाना ही पड़ेगा। कृपया जितने लोगों से हो सके इस पेटीशन को शेयर करें।

समस्या
भारत में कोरोना की दूसरी लहर का भयावह साया हर नागरिक को डरा रहा है। इस लहर में ना केवल लाखों की संख्या में केस मिल रहे हैं बल्कि पहले से कहीं ज़्यादा मौतें हो रही हैं। मौत का आंकड़ा इतना बड़ा होता जा रहा है कि श्मशान घाटों में लकड़ियां और कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ने लगी है।
माननीय, आप नींद से कब जागेंगे? आखिर आपके कोरोना के प्लान में श्मशान, कब्रिस्तान और मुर्दाघर की हालत को सुधारना कब शामिल होगा? आखिर कितनी महामारियों के बाद आप सीख लेंगे और कदम उठाएंगे?
पिछले साल ‘टाइम्स नाऊ’ चैनल दिन रात उन भयावह तस्वीरों को जनता के सामने चलाता रहा। प्राइमटाइम डिबेट में मैंने चीख-चीखकर बताया था कि कैसे मुंबई में कोरोना की दस्तक से पहले ही मुर्दाघरों और श्मशानों की हालत खस्ता थी। अब कोरोना के बाद हालात क्या होंगे, सोचकर ही दिल बैठ जाता है।
इसके बावजूद, ना राज्य सरकार और ना केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। सेंट जॉर्ज अस्पताल में नए मुर्दाघर के निर्माण का अभी तक टेंडर भी नहीं निकला। शायद इसलिए क्योंकि इसकी घोषणा को अभी चार साल ही तो हुए हैं!!!
मेरी उम्र 65 साल है और एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं मृतकों का सम्मान सुनिश्चित कराए जाने के लिए सालों से आवाज़ उठाती रही हूँ। दफ्तर, अधिकारी, नेता, मैंने कहाँ नहीं गई ताकि महाराष्ट्र सरकार नींद से जागे। मैं मुंबई में एक मुर्दाघर के निर्माण के लिए लड़ती रही ताकि जो ये दुनिया छोड़ने वालों को उनके अपने सम्मान के साथ विदा कर सकें।
माननीय, आज ये आपदा केवल एक शहर में नहीं बल्कि पूरे भारत में है। कोरोना से जि़ंदगी गंवाने वालों के संदर्भ में तत्काल तीन कदम उठाने होंगे: सम्मान से उनका अंतिम संस्कार, इस काम में उनके अपनों की जान जोखिम में ना पड़े और इसकी प्रक्रिया में ज़रूरी सभी संसाधनों की मौजूदगी सुनिश्चित हो।
पूरा देश देख रहा है कि कैसे लोग अपनों की लाश को लेकर श्मशान और कब्रिस्तान के बाहर लाइन में खड़े हैं। इस काम में जुट रही भीड़ के कारण परिजनों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। फिर सवाल श्मशान और कब्रिस्तान में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा का भी है, जिनके पास पीपीई किट तक नहीं हैं।
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हम में से कोई नहीं जानता कि आगे क्या होगा। कोरोना से मरने वाला कोई भी व्यक्ति केवल एक नंबर नहीं है, एक संख्या नहीं है। वो भारत का नागरिक है, जिसकी अंतिम यात्रा सम्मान से भरी होनी चाहिए।
आज कल बहुत कम लोग ज़िंदा लोगों के अधिकार की बात करते हैं। उससे कहीं गुना गम वो लोग हैं जो किसी मृतक के अधिकार की बात करते हैं। इस नेक काम के लिए प्लीज़ अपना समर्थन ज़रूर दें।
जब ज़्यादा लोग ये मांग उठाएंगे तो शासन-प्रशासन को कदम उठाना ही पड़ेगा। कृपया जितने लोगों से हो सके इस पेटीशन को शेयर करें।

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19 अप्रैल 2021 पर पेटीशन बनाई गई