मुंबई का पर्यावरण खतरे में है !

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सपनों की नगरी मुंबई चकाचौंध से तो भरी है पर यहां खुली जगहों की बहुत बड़ी कमी है। इस भीड़भाड़ भरे शहर को सिर्फ़ संजय गाँधी नॅशनल पार्क और आरे जंगल राहत पहुँचाते हैं। मुंबई के ये हरियालीवाले क्षेत्र मुंबई को बढ़ते प्रदूषण और बाढ़ की समस्या से तो बचाते ही हैं पर साथ ही शहर का तापमान  कम करने में भी सहायता करते हैं।

पर दुर्भाग्य से मुंबई शहर के ये बहुमूल्य क्षेत्र आनेवाले इनफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स की भेट चढ़नेवाले हैं.

इनमें से पहला प्रॉजेक्ट जो की मुंबई के इन हरे क्षे‌‌त्रो को व्यावसायीकरण के लिए खोल देगा, वह हैं मुंबई मेट्रो-3 के लिए बनाया जानेवाला कार शेड।  यह कार शेड  आरे के जंगल में बनाया जानेवाला है,  जिसकी फंडिंग जापान की एक कंपनी जापान इंटरनॅशनल कोऑपरेशन एजेन्सी (JICA) कर रही है।  यह कंपनी  प्रॉजेक्ट कॉस्ट का ५७ % देगी जोकि करीब 2036 मिलियन डॉलर होता हैं.। कार शेड मेट्रो ट्रेन की पार्किंग और सर्विस की  जगह होती है।

JICA

साथियों !  जिस समय पूरा विश्व ग्लोबल वॉरमिंग के भयानक परिणाम भुगत रहा है, ऐसी स्थिति में  पार्किंग  के लिए एक जंगल बर्बाद करना  कहां की समझदारी है?

इस कार शेड के लिए करीब 3500 पेड़ काटे जाएँगे। हम चाहते हैं की सरकार कार शेड इस इकलौते बचे जंगल में बनाने की बजाय कोई और विकल्प ढूँढे ।सरकार की खुद की स्टडीस में कार शेड के लिए ऐसे अन्यविकल्पों का जिक्र किया गया है , जिनसे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है।

NEET और IIT के एक्सपर्ट्स ने कार शेड के  लिए 7  और विकल्प दिए हैं।  उन्होंने चेतावनी  भी दी है कि यदि कार शेड के लिए जंगल नष्ट किया जाएगा तो मुंबई को भयानक परिणामों का सामना करना पड़ेगा जैसे बाढ़, खुली जगहो का अभाव, बढ़ता प्रदूषण, वन्यजीवन की हानि इत्यादि.

सरकार की रिपोर्ट्स के मुताबिक आरे , संजय गाँधी नॅशनल पार्क का अभिन्न हिस्सा हैं और यह जंगल के अधिकारों के तहत सुरक्षित रखा गया है। आरे वन में करीब ५ लाख पेड़, ९ तेंदुए और अन्य वनस्पति, जीव्जंतु और पशुवर्ग  हैं।  यहाँ बरसों से आदिवासियों की बस्ती हैं जोकि इस जंगल के स्थानीय निवासी हैं।  इनके 27 खेडे हैं औ।  आरे वन  मुंबई शहर के निवासियों के लिए एक वरदान है।

सेव आरे की मुहिम के तहत हम सरकार से विनती कर रहे हैं कि कार शेड को जंगल से बाहर लेकर जाए। हम मेट्रो के विरोधी नहीं हैं। हम भी चाहते हैं की हमारा शहर विकास करे पर विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाए रखना भी बहुत ज़रूरी है।  कार शेड को जंगल से बाहर लेकर जाने से मेट्रो के काम में कोई व्याधि नहीं आएगी। इस मुहिम को सभी वर्गो का समर्थन मिल रहा है।

इसके बावजूद महाराष्ट्रा सरकार कार शेड को जंगल में ही बनाने पर तुली है।

अपने इस मकसद को सिद्ध करने के लिए सरकार ने JICA को  झूठ बोला। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) ने JICA को यह बताया कि जिस स्थान पर कार शेड बनाया जा रहा हैं वह शहर का ही हिस्सा है,  इसमें किसी भी वन्य जीवन को नुकसान नहीं पहुँचेगा।  जबकि वास्तविकता यह हैं कि आरे एक जंगल हैं जिसमें 76 पक्षियों की प्रजातियाँ, 80 तरह की तितलियाँ, 16 स्तनधारी प्राणियों की प्रजातियाँ, 38 रेंगनेवाले पशुओं की प्रजातियाँ, 9 तेंदुए और 0.4 मिलियन पेड़ हैं.

इस याचिका पर हस्ताक्षर करके आप JICA से यह माँग कर रहे हैं की वह इस प्रॉजेक्ट के तहत दिए जानेवाले अपने फंडिंग की समीक्षा करे। JICA के पर्यावरण और सामाजिक मापदंडों के आधार पर यह प्रॉजेक्ट कई नियमों का उलंघन कर रहा हैं।  मेट्रो के कार शेड को आरे जंगल से स्थानांतरण करने से मुंबई को अपनी मेट्रो भी मिल जाएगी और मुंबई के कीमती ग्रीन लंग्ज़ को भी हानि नहीं पहुँचेगी। हम यह उम्मीद करते हैं की JICA भविष्य में अपने छोटे बड़े सभी प्रॉजेक्ट्स , जोकि आरे वन में प्रस्तावित किए जाएँगे , उनपर भी रोक लगाएगी.

Help #SaveAareyForest.