
प्रयोगशालाओं में बेजुबान जानवरों पर अत्याचार बंद करो
समस्या
प्रयोगशालाओं में बेजुबान जानवरों पर अत्याचार बंद करो! भारत के प्रस्तावित Animal Testing Rules 2026 में तत्काल बदलाव किया जाए।
हमारी मांग: पशु क्रूरता को बढ़ावा देने वाले किसी भी कमजोर नियामक ढांचे को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत सरकार के प्रस्तावित Prevention of Cruelty to Animals (Control and Supervision of Experiment, Breeding and Trading of Laboratory Animals) Rules, 2026 ने पशु कल्याण और वैज्ञानिक अनुसंधान की नैतिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमारा देश भगवान महावीर की अहिंसा, करुणा और जीव दया की परंपरा का वाहक रहा है। जिस देश में हर जीव के जीवन का सम्मान करना हमारी सांस्कृतिक और नैतिक पहचान है, वहां बेजुबान प्राणियों को प्रयोगशालाओं में पीड़ा सहने के लिए छोड़ देना किसी भी परिस्थिति में सामान्य बात नहीं मानी जा सकती।
जानवर इंसानों की तरह अपनी पीड़ा के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते। इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें पीड़ा देने का अधिकार इंसानों को मिल जाता है।
प्रस्तावित नियमों पर हमारी गंभीर आपत्तियां
1. स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए।
ड्राफ्ट के Rule 11 के अनुसार, Mild और Moderate श्रेणी के प्रयोगों को संस्थागत Animal Ethics Committees (IAEC) स्वयं मंजूरी दे सकती हैं। ऐसे मामलों को केंद्रीय समिति CCSEA के पास स्वीकृति के लिए भेजना अनिवार्य नहीं होगा।
जब प्रयोग करने वाली संस्था की अपनी समिति ही प्रयोगों को मंजूरी देगी, तो स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी?
हम मांग करते हैं कि सभी प्रयोगों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष निगरानी की मजबूत व्यवस्था हो।
2. आवारा और जंगली जानवरों के इस्तेमाल पर कठोर प्रतिबंध हो।
सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्ते, बिल्लियां और अन्य सामुदायिक जानवर भी इस देश के जीव हैं। उनका जीवन किसी प्रयोगशाला की संपत्ति नहीं है।
ड्राफ्ट में कुछ विशेष परिस्थितियों में आवारा, जंगली और अन्य संरक्षित श्रेणियों के जानवरों के प्रयोग की अनुमति के अपवाद मौजूद हैं।
हम मांग करते हैं कि ऐसे अपवादों को अत्यंत सीमित किया जाए और सामुदायिक जानवरों को पकड़कर प्रयोगों में इस्तेमाल करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
3. जानवरों पर प्रयोग के विकल्प अनिवार्य किए जाएं।
आज विज्ञान के पास कई आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे:
Organ-on-Chip Technology
Human Cell-Based Testing
Advanced Computer Modelling
Artificial Intelligence-Based Research
3D Human Tissue Models
जहां भी वैज्ञानिक रूप से मान्य विकल्प उपलब्ध हों, वहां जीवित जानवरों पर प्रयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
4. गंभीर पीड़ा और लंबे समय तक चलने वाली यातना पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
किसी भी जानवर को अनावश्यक दर्द, मानसिक तनाव, भय और लंबे समय तक शारीरिक पीड़ा सहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
सिर्फ प्रयोगों को Mild, Moderate या Severe श्रेणियों में बांट देने से पशुओं की पीड़ा समाप्त नहीं हो जाती।
5. विदेशी कंपनियों के लिए भारत को आसान प्रयोगशाला न बनने दिया जाए।
भारत को ऐसी जगह नहीं बनना चाहिए जहां कमजोर निगरानी या ढीले नियमों का लाभ उठाकर विदेशी अथवा घरेलू संस्थान ऐसे प्रयोग करें जिन पर अन्य देशों में अधिक कठोर नियामक नियंत्रण हो।
वैज्ञानिक अनुसंधान के नाम पर भारत में पशु कल्याण के मानकों से समझौता नहीं होना चाहिए।
6. प्रत्येक प्रयोग की सार्वजनिक जवाबदेही हो।
हम मांग करते हैं कि:
प्रयोगों की मंजूरी और उनके वैज्ञानिक औचित्य का सार्वजनिक रिकॉर्ड रखा जाए।
प्रयोग में इस्तेमाल किए जाने वाले जानवरों की संख्या सार्वजनिक हो।
स्वतंत्र निरीक्षण और ऑडिट अनिवार्य हों।
नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर दंड लगाया जाए।
पशु कल्याण संगठनों को शिकायत और निगरानी का प्रभावी अधिकार मिले।
हमारी 7 सूत्रीय मांगें
भारत सरकार और संबंधित मंत्रालयों से हमारी मांग है:
प्रस्तावित 2026 के ड्राफ्ट नियमों को मौजूदा स्वरूप में अंतिम मंजूरी न दी जाए।
सभी पशु प्रयोगों के लिए स्वतंत्र और प्रभावी नियामक निगरानी सुनिश्चित की जाए।
आवारा और सामुदायिक जानवरों को प्रयोगों में इस्तेमाल करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
जहां वैज्ञानिक विकल्प उपलब्ध हों, वहां पशु प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित हों।
गंभीर पीड़ा, लंबे समय तक चलने वाले दर्द और अनावश्यक प्रयोगों पर कठोर प्रतिबंध लगाया जाए।
विदेशी और घरेलू शोध संस्थानों के लिए समान रूप से सख्त पशु कल्याण मानक लागू हों।
पशु कल्याण संगठनों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और आम नागरिकों से व्यापक परामर्श के बाद ही नए नियम तैयार किए जाएं।
अंत में एक सवाल...
क्या वैज्ञानिक प्रगति की कीमत उन बेजुबान जीवों को अपनी जिंदगी और दर्द से चुकानी चाहिए, जो अपनी रक्षा के लिए इंसानों की तरह आवाज तक नहीं उठा सकते?
क्या भारत की वैज्ञानिक तरक्की करुणा, नैतिकता और अहिंसा को पीछे छोड़कर होनी चाहिए?
विज्ञान मानवता की सेवा के लिए है, किसी भी जीव को अनावश्यक यातना देने का लाइसेंस नहीं।
भारत को वैज्ञानिक अनुसंधान में आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन पशु क्रूरता की कीमत पर नहीं।
हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि इस प्रस्तावित ड्राफ्ट की गंभीर समीक्षा की जाए और पशु कल्याण के मजबूत, पारदर्शी तथा कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रावधान लागू किए जाएं।
बेजुबान हैं, बेअधिकार नहीं!
STOP ANIMAL CRUELTY. PROTECT EVERY LIFE.
इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इस आवाज को भारत सरकार तक पहुंचाने में हमारा साथ दें।
एक हस्ताक्षर भी बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
ऐसे में, मैं भारत सरकार से विनम्र निवेदन करता हूँ कि प्रस्तावित Animal Testing Rules 2026 का विस्तृत रूप से पुनः मूल्यांकन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हमारे नियम अधिकतम मानवीय दृष्टिकोण को अपनाते हुए तैयार किए गए हों। आइए हम मिलकर इस अत्याचार को रोकें और इन बेजुबान जानवरों के पक्ष में आवाज उठाएं। आपकी एक हस्ताक्षर से बड़ा बदलाव आ सकता है, कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें।

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समस्या
प्रयोगशालाओं में बेजुबान जानवरों पर अत्याचार बंद करो! भारत के प्रस्तावित Animal Testing Rules 2026 में तत्काल बदलाव किया जाए।
हमारी मांग: पशु क्रूरता को बढ़ावा देने वाले किसी भी कमजोर नियामक ढांचे को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत सरकार के प्रस्तावित Prevention of Cruelty to Animals (Control and Supervision of Experiment, Breeding and Trading of Laboratory Animals) Rules, 2026 ने पशु कल्याण और वैज्ञानिक अनुसंधान की नैतिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमारा देश भगवान महावीर की अहिंसा, करुणा और जीव दया की परंपरा का वाहक रहा है। जिस देश में हर जीव के जीवन का सम्मान करना हमारी सांस्कृतिक और नैतिक पहचान है, वहां बेजुबान प्राणियों को प्रयोगशालाओं में पीड़ा सहने के लिए छोड़ देना किसी भी परिस्थिति में सामान्य बात नहीं मानी जा सकती।
जानवर इंसानों की तरह अपनी पीड़ा के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते। इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें पीड़ा देने का अधिकार इंसानों को मिल जाता है।
प्रस्तावित नियमों पर हमारी गंभीर आपत्तियां
1. स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था कमजोर नहीं होनी चाहिए।
ड्राफ्ट के Rule 11 के अनुसार, Mild और Moderate श्रेणी के प्रयोगों को संस्थागत Animal Ethics Committees (IAEC) स्वयं मंजूरी दे सकती हैं। ऐसे मामलों को केंद्रीय समिति CCSEA के पास स्वीकृति के लिए भेजना अनिवार्य नहीं होगा।
जब प्रयोग करने वाली संस्था की अपनी समिति ही प्रयोगों को मंजूरी देगी, तो स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी?
हम मांग करते हैं कि सभी प्रयोगों के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष निगरानी की मजबूत व्यवस्था हो।
2. आवारा और जंगली जानवरों के इस्तेमाल पर कठोर प्रतिबंध हो।
सड़कों पर रहने वाले आवारा कुत्ते, बिल्लियां और अन्य सामुदायिक जानवर भी इस देश के जीव हैं। उनका जीवन किसी प्रयोगशाला की संपत्ति नहीं है।
ड्राफ्ट में कुछ विशेष परिस्थितियों में आवारा, जंगली और अन्य संरक्षित श्रेणियों के जानवरों के प्रयोग की अनुमति के अपवाद मौजूद हैं।
हम मांग करते हैं कि ऐसे अपवादों को अत्यंत सीमित किया जाए और सामुदायिक जानवरों को पकड़कर प्रयोगों में इस्तेमाल करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
3. जानवरों पर प्रयोग के विकल्प अनिवार्य किए जाएं।
आज विज्ञान के पास कई आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे:
Organ-on-Chip Technology
Human Cell-Based Testing
Advanced Computer Modelling
Artificial Intelligence-Based Research
3D Human Tissue Models
जहां भी वैज्ञानिक रूप से मान्य विकल्प उपलब्ध हों, वहां जीवित जानवरों पर प्रयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
4. गंभीर पीड़ा और लंबे समय तक चलने वाली यातना पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
किसी भी जानवर को अनावश्यक दर्द, मानसिक तनाव, भय और लंबे समय तक शारीरिक पीड़ा सहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
सिर्फ प्रयोगों को Mild, Moderate या Severe श्रेणियों में बांट देने से पशुओं की पीड़ा समाप्त नहीं हो जाती।
5. विदेशी कंपनियों के लिए भारत को आसान प्रयोगशाला न बनने दिया जाए।
भारत को ऐसी जगह नहीं बनना चाहिए जहां कमजोर निगरानी या ढीले नियमों का लाभ उठाकर विदेशी अथवा घरेलू संस्थान ऐसे प्रयोग करें जिन पर अन्य देशों में अधिक कठोर नियामक नियंत्रण हो।
वैज्ञानिक अनुसंधान के नाम पर भारत में पशु कल्याण के मानकों से समझौता नहीं होना चाहिए।
6. प्रत्येक प्रयोग की सार्वजनिक जवाबदेही हो।
हम मांग करते हैं कि:
प्रयोगों की मंजूरी और उनके वैज्ञानिक औचित्य का सार्वजनिक रिकॉर्ड रखा जाए।
प्रयोग में इस्तेमाल किए जाने वाले जानवरों की संख्या सार्वजनिक हो।
स्वतंत्र निरीक्षण और ऑडिट अनिवार्य हों।
नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कठोर दंड लगाया जाए।
पशु कल्याण संगठनों को शिकायत और निगरानी का प्रभावी अधिकार मिले।
हमारी 7 सूत्रीय मांगें
भारत सरकार और संबंधित मंत्रालयों से हमारी मांग है:
प्रस्तावित 2026 के ड्राफ्ट नियमों को मौजूदा स्वरूप में अंतिम मंजूरी न दी जाए।
सभी पशु प्रयोगों के लिए स्वतंत्र और प्रभावी नियामक निगरानी सुनिश्चित की जाए।
आवारा और सामुदायिक जानवरों को प्रयोगों में इस्तेमाल करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
जहां वैज्ञानिक विकल्प उपलब्ध हों, वहां पशु प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित हों।
गंभीर पीड़ा, लंबे समय तक चलने वाले दर्द और अनावश्यक प्रयोगों पर कठोर प्रतिबंध लगाया जाए।
विदेशी और घरेलू शोध संस्थानों के लिए समान रूप से सख्त पशु कल्याण मानक लागू हों।
पशु कल्याण संगठनों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और आम नागरिकों से व्यापक परामर्श के बाद ही नए नियम तैयार किए जाएं।
अंत में एक सवाल...
क्या वैज्ञानिक प्रगति की कीमत उन बेजुबान जीवों को अपनी जिंदगी और दर्द से चुकानी चाहिए, जो अपनी रक्षा के लिए इंसानों की तरह आवाज तक नहीं उठा सकते?
क्या भारत की वैज्ञानिक तरक्की करुणा, नैतिकता और अहिंसा को पीछे छोड़कर होनी चाहिए?
विज्ञान मानवता की सेवा के लिए है, किसी भी जीव को अनावश्यक यातना देने का लाइसेंस नहीं।
भारत को वैज्ञानिक अनुसंधान में आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन पशु क्रूरता की कीमत पर नहीं।
हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि इस प्रस्तावित ड्राफ्ट की गंभीर समीक्षा की जाए और पशु कल्याण के मजबूत, पारदर्शी तथा कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रावधान लागू किए जाएं।
बेजुबान हैं, बेअधिकार नहीं!
STOP ANIMAL CRUELTY. PROTECT EVERY LIFE.
इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इस आवाज को भारत सरकार तक पहुंचाने में हमारा साथ दें।
एक हस्ताक्षर भी बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
ऐसे में, मैं भारत सरकार से विनम्र निवेदन करता हूँ कि प्रस्तावित Animal Testing Rules 2026 का विस्तृत रूप से पुनः मूल्यांकन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हमारे नियम अधिकतम मानवीय दृष्टिकोण को अपनाते हुए तैयार किए गए हों। आइए हम मिलकर इस अत्याचार को रोकें और इन बेजुबान जानवरों के पक्ष में आवाज उठाएं। आपकी एक हस्ताक्षर से बड़ा बदलाव आ सकता है, कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें।

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1 नवंबर 2026 पर पेटीशन बनाई गई