मेरे लापता ऑटिस्टिक बच्चे को घर लाने के लिए उच्च प्राथमिकता वाला सर्च ऑपरेशन शुरू किया जाए

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मेरे लापता ऑटिस्टिक बच्चे को घर लाने के लिए उच्च प्राथमिकता वाला सर्च ऑपरेशन शुरू किया जाए

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क्या सरकार और प्रशासन को जगाने के लिए मैं अपनी जान दे दूँ? मेरा बेटा 50 दिनों से लापता है और अब उसे दुबारा पाने की मेरी उम्मीद भी लापता हो रही है। मेरा बेटा तरुण, 16 साल का है और वो ऑटिस्टिक है, उसे बोलने में दिक्कत होती है और उसे कम दिखाई देता है।

1 अक्टूबर, 2019 को वो मुंबई में हमारे घर के पास स्थित गुब्बारे की दुकान के पास खेल रहा था। उसके पास से एक एलेक्शन रैली गुज़री जिसके गाने और ड्रम की आवाज़ में वो भीड़ में कहीं खो गया। CCTV फुटेज में वो नाचता हुआ देखा जा सकता है। रैली तो CST रेलवे स्टेशन पर खत्म हो गई पर मेरा बेटा मुझसे बिछड़ गया।

वो तो अकेले रोड पार करने में भी डरता है, मैं नहीं जानता इस वक्त मेरा बेटा किस हाल में होगा, उसपर क्या गुज़र रही होगी।

मैंने उसी दिन पुलिस थाने जाकर उसके लापता होने की FIR दर्ज कराई थी। स्थानीय पुलिस और आम लोगों ने CCTV फुटेज देकर मेरी मदद की पर हम अभी भी तरुण को नहीं खोज पाए हैं। कुछ CCTV फुटेज में मेरा बेटा रोता-बिलखता देखा जा सकता है, लोगों से खाना और पानी मांगते हुए देखा जा सकता है।

मेरे बेटे के लापता होने के दो दिन बाद मुझे सूचित किया गया कि उसे पनवेल रेलवे स्टेशन के पास देखा गया था। मेरा तरुण दो दिन तक रेलवे पुलिस के सामने भटकता रहा और किसी ने उसकी मदद नहीं की! स्टेशन पहुँचकर मुझे और भी चौंकाने वाली बातें पता चलीं।

एक रेलवे अफ़सर से मेरे बेटे ने जब बार-बार पानी मांगा तो वो उससे तंग आ गया और उसने मेरे बेटे को ज़बरदस्ती गोआ की एक ट्रेन में बिठा दिया। आखिर एक ऑटिस्टिक बच्चे के प्रति एक पुलिस अफ़सर इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है। चाइल्ड लाइन को सूचित करने के बजाए, उसने मेरे बेसहारा बेटे को मुझसे और दूर कर दिया!

मैंने मुंबई का एक-एक कोना छान लिया, गोवा की कोई गली नहीं छोड़ी जहाँ मैंने अपने बेटे को नहीं खोजा। मैंने पोस्टर और साइन लगाए, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में ऐड भी दिया...और अब मैं हिम्मत हार रहा हूँ। मैं एक डर के साए में जी रहा हूँ, मुझे डर है कि मेरा बेटा कहाँ, किस हालत में होगा। वो बेचारा तो दूसरों से मदद भी नहीं मांग सकता है।

मैंने माननीय प्रधानमंत्री के नाम भी ट्वीट भी किया है। हर गुज़रता दिन मेरे बेटे को और खतरे में डाल रहा है।

जो खुद किसी बच्चे के माता-पिता हैं, उन्हें इस अभागे पिता की तकलीफ़ और डर का अंदाज़ा होगा।

आप सबसे हाथ जोड़कर गुज़ारिश है कि मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि पीएमओ, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय और महाराष्ट्र पुलिस मेरे बेटे तरुण को खोजने के लिए एक उच्च प्राथमिकता वाली खोज (High Priority Search) शुरू करे।

हम आम नागरिकों के दबाव से ही प्रशासन कोई कदम उठाएगा।

प्लीज़ इस पेटीशन को जितना हो सके, जिससे हो सके शेयर करें। शायद आपके शेयर करने से मेरे बेटे का कुछ पता चल जाए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मेरे बेटे की जान को खतरे में डालने के आरोप में रेलवे पुलिस ने अपने अफ़सर के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। हमें ऐसे मामलों में अफ़सरों की ट्रेनिंग करनी चाहिए ताकि वो ऑटिस्टिक बच्चों तथा स्पेशल नीड वाले बच्चों के मामलों में थोड़ी संवेदनशीलता दिखाएं।

मेरे बेटे को वापस घर लाने में मेरी मदद करें। वो मेरी दुनिया है। मैं उसके बिना नहीं जी सकता। प्लीज़ मेरी मदद करें।

#TarunKoWapasLao