Save ground water, recharge it : Say No to plastic, use alternatives - Sukanya Kadyan
Save ground water, recharge it : Say No to plastic, use alternatives - Sukanya Kadyan
The Issue
Ground water is a natural source and people suck it for personnel gains and profit, it should be banned now, Ground water recharging shall be mandatory for every one, only farmers be allowed for cultivation.
Say No to plastic, promote alternatives like paper, jute and cloth begs.
Use and promote glass bottles instead of plastic, make mandatory for mineral water, juice and all kinds of drinks manufacturers to give preference and priority to glass bottles and introduce buy back policy for their plastic bottles after use, don't allow them to promote crushing and throwing in open. Introduce legislation to penalize the manufactures, consumers as well.
Protest Rally / March on 8th June, 2010...........please arrange a demonstration in your locality, aware people and motivate them to say bye plastic / promote alternatives -
http://www.facebook.com/event.php?eid=120076828012605&index=1
Kadyan Khap International convener Naresh Kadyan, founder chairman, PFA Haryana / Rep. of OIPA in India moved a campaign.............
भोपाल. गिरते भू-जलस्तर के बावजूद प्रदेश में अंधाधुंध बोर खनन हो रहा है। यही वजह है कि बीते दो साल में अधिकांश जिलों में भू-जलस्तर 29 से 39 फीट तक नीचे चला गया। हालत यह है कि कहीं-कहीं तो अब 600 से 900 फीट खुदाई करने के बाद भी पानी नहीं निकल रहा है।
प्रदेश में जमीन के अंदर के पानी ने खतरे की घंटी बजा दी है। पिछले दो वर्षो में इंदौर सहित आठ जिलों में भू-जलस्तर 29 से 39 फीट नीचे चला गया है। औसतन नौ फीट की गिरावट तो अमूमन सभी जिलों में हुई है। भू-जलस्तर में यह गिरावट मई 2007 से मई 2009 के बीच दर्ज हुई है। भू-जल सर्वेक्षण मंडल द्वारा हाल ही में तैयार रिपोर्ट के अनुसार मालवा में भू-जल सबसे ज्यादा नीचे गया है।
अधीक्षण भूजलविद् अशोक कुमार केसरवानी के मुताबिक भू-जल के मामले में मालवा की स्थिति पहले से ही खराब रही है। अब स्थिति और बिगड़ गई है। रीचार्ज की तुलना में दोहन अधिक होने से यह हो रहा है। ऐसी स्थिति वर्ष 2001-2003 के बीच भी हुई थी जब बारिश कम होने से भू-जल स्तर इसी हिसाब से नीचे गया था। बड़वानी, धार, इंदौर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर व उज्जैन जिलों के 20 ब्लाक में भू-जलस्तर 39 फीट तक नीचे चला गया है।
सबसे ज्यादा पांच ब्लाक धार जिले के हैं। देवास, इंदौर, खरगोन, खंडवा, नीमच, शाजापुर जिले सात ब्लाक में 20 से 30 फीट भू-जल नीचे गया है। 41 ब्लाक में पानी 9 से 19 फीट नीचे गया है।
धरती के सीने पर लाखों छेद
विदिशा जिले में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 6क् हजार से ज्यादा हैंडपंप और बोरवेल हैं। पिछले तीन साल मंे ही करीब २१क्क् हैंडपंप और नलकूप सरकारी स्तर पर खोदे गए हैं। होशंगाबाद जिले में लगातार भूजल स्तर गिर रहा है। बावजूद अंधाधुंध बोर खनन पर अंकुश नहीं लग रहा। शहर का भूजल स्तर 10.72 है।
कहीं-कहीं इससे भी कम नापा गया है। इस साल भूजल स्तर में लगभग 1 फीट की गिरावट दर्ज की गई है। बैतूल जिले में 85 हजार हैंडपंप और टच्यूबवेल हैं। इस साल मई में जिले का औसत जलस्तर 22.29 मीटर नीचे पहुंच गया।
़ जबकि पिछले साल 25.60 मीटर नीचे खिसका था। जलस्तर नीचे खिसकने से 667 हैंडपंप व दो दर्जन टच्यूबवेलों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। मुरैना जिले में लगभग 50 हजार बोर हैं। यहां तीन साल में ही तकरीबन ११ हजार बोरिंग खनन हुए। भूजल स्तर तकरीबन चार मीटर प्रति वर्ष गिर रहा है।
उज्जैन जिले में सरकारी और निजी बोरिंग की संख्या 45 हजार से ऊपर पहुंच गई है। घर के आंगन से लेकर कॉलोनियों के चौराहों, गलियों और खेत तक सभी जगह टच्यूबवेल और हैंडपंप दिखाई दे रहे हैं। इससे जमीन में जल का भंडारण खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। हालत यह है कि उज्जैन जिले में ही कई स्थानों पर 500 फीट की गहराई तक भी पानी नहीं मिल रहा है।
सागर जिले में निजी और सरकारी मिलाकर लगभग डेढ़ लाख हैंडपंप और बोरिंग हैं। छतरपुर जिले में जलस्तर में लगतार गिरावट देखने को मिल रही है। पेयजल की समस्या से जूझ रहे लोगों ने अंधाधुंध बोरिंग कराई है। 21 हजार बोर पूरे जिले में हैं। वर्ष 2008 में भूजल स्तर 23 मीटर नीचे लतक चला गया था।
मंदसौर जिले में लगभग 15000 से भी ज्यादा बोरवेल हैं। जलस्तर नीचे जाने से 35 फीसदी सूख चुके हैं। भू-जल सर्वेक्षण विभाग शहर के तालाब व बोरिंगों की स्थिति पर चिंता जताकर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने की सलाह देता है। प्रशासन द्वारा गर्मी में जलसंकट को देखते हुए बोरिंग खनन पर प्रतिबंध भी लगाया गया है जिसका आज तक पालन तो नहीं हुआ।
रतलाम जिले में सरकारी और निजी बोरिंग की संख्या मिलाई जाए तो शहर के सीने पर लगभग २५ हजार से भी ज्यादा छेद हैं। भूमिगत जलस्तर अत्यधिक नीचे जाने से इसमें से 35 फीसदी सूख चुके हैं। जिले में भूमिगत जलस्तर तेजी से गिरता जा रहा है। सात माह में जलस्तर में 6.03 मीटर की गिरावट आई है।
10 साल पहले 100 फीट अब 400
दस साल पहले 2000-01 में स्थित यह थी कि बोरिंग खनन करने पर 90 से 100 फीट पर ही पानी निकल जाता था जबकि वर्तमान स्थित में पानी के लिए 400 फीट से ज्यादा नीचे तक बोरिंग करना पड़ रहा है। इसमें भी शहर के कुछ बाहरी क्षेत्रों में 500 फीट तक पानी निकल रहा है। हालात यह हैं कि कई जगह ६क्क् फीट पर भी पानी नहीं निकलने से इससे भी ज्यादा गहराई तक खनन शुरू हो गया है। जावद विकासखंड के कुछ क्षेत्रों जैसे सिंगोली एवं डिकेन सहित कई गांवों में ६क्क् फीट की खुदाई पर भी पानी नहीं आ रहा है।
एक उदाहरण
शिवपुरी शहर में पिछले हफ्ते हुए बोर खनन में 800 फीट पर भी पानी की एक बूंद नहीं मिली। वहीं 18 मई को वार्ड नंबर 28 में 925 फीट गहराई पर भी एक बूंद पानी नहीं मिला। इसी प्रकार शिवपुरी के वार्ड नंबर 4 में मंडी कॉम्प्लेक्स
के पास कराए गए बोर में
900 फीट की गहराई पर
भी पानी नहीं निकला।

The Issue
Ground water is a natural source and people suck it for personnel gains and profit, it should be banned now, Ground water recharging shall be mandatory for every one, only farmers be allowed for cultivation.
Say No to plastic, promote alternatives like paper, jute and cloth begs.
Use and promote glass bottles instead of plastic, make mandatory for mineral water, juice and all kinds of drinks manufacturers to give preference and priority to glass bottles and introduce buy back policy for their plastic bottles after use, don't allow them to promote crushing and throwing in open. Introduce legislation to penalize the manufactures, consumers as well.
Protest Rally / March on 8th June, 2010...........please arrange a demonstration in your locality, aware people and motivate them to say bye plastic / promote alternatives -
http://www.facebook.com/event.php?eid=120076828012605&index=1
Kadyan Khap International convener Naresh Kadyan, founder chairman, PFA Haryana / Rep. of OIPA in India moved a campaign.............
भोपाल. गिरते भू-जलस्तर के बावजूद प्रदेश में अंधाधुंध बोर खनन हो रहा है। यही वजह है कि बीते दो साल में अधिकांश जिलों में भू-जलस्तर 29 से 39 फीट तक नीचे चला गया। हालत यह है कि कहीं-कहीं तो अब 600 से 900 फीट खुदाई करने के बाद भी पानी नहीं निकल रहा है।
प्रदेश में जमीन के अंदर के पानी ने खतरे की घंटी बजा दी है। पिछले दो वर्षो में इंदौर सहित आठ जिलों में भू-जलस्तर 29 से 39 फीट नीचे चला गया है। औसतन नौ फीट की गिरावट तो अमूमन सभी जिलों में हुई है। भू-जलस्तर में यह गिरावट मई 2007 से मई 2009 के बीच दर्ज हुई है। भू-जल सर्वेक्षण मंडल द्वारा हाल ही में तैयार रिपोर्ट के अनुसार मालवा में भू-जल सबसे ज्यादा नीचे गया है।
अधीक्षण भूजलविद् अशोक कुमार केसरवानी के मुताबिक भू-जल के मामले में मालवा की स्थिति पहले से ही खराब रही है। अब स्थिति और बिगड़ गई है। रीचार्ज की तुलना में दोहन अधिक होने से यह हो रहा है। ऐसी स्थिति वर्ष 2001-2003 के बीच भी हुई थी जब बारिश कम होने से भू-जल स्तर इसी हिसाब से नीचे गया था। बड़वानी, धार, इंदौर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर व उज्जैन जिलों के 20 ब्लाक में भू-जलस्तर 39 फीट तक नीचे चला गया है।
सबसे ज्यादा पांच ब्लाक धार जिले के हैं। देवास, इंदौर, खरगोन, खंडवा, नीमच, शाजापुर जिले सात ब्लाक में 20 से 30 फीट भू-जल नीचे गया है। 41 ब्लाक में पानी 9 से 19 फीट नीचे गया है।
धरती के सीने पर लाखों छेद
विदिशा जिले में सरकारी और निजी मिलाकर करीब 6क् हजार से ज्यादा हैंडपंप और बोरवेल हैं। पिछले तीन साल मंे ही करीब २१क्क् हैंडपंप और नलकूप सरकारी स्तर पर खोदे गए हैं। होशंगाबाद जिले में लगातार भूजल स्तर गिर रहा है। बावजूद अंधाधुंध बोर खनन पर अंकुश नहीं लग रहा। शहर का भूजल स्तर 10.72 है।
कहीं-कहीं इससे भी कम नापा गया है। इस साल भूजल स्तर में लगभग 1 फीट की गिरावट दर्ज की गई है। बैतूल जिले में 85 हजार हैंडपंप और टच्यूबवेल हैं। इस साल मई में जिले का औसत जलस्तर 22.29 मीटर नीचे पहुंच गया।
़ जबकि पिछले साल 25.60 मीटर नीचे खिसका था। जलस्तर नीचे खिसकने से 667 हैंडपंप व दो दर्जन टच्यूबवेलों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। मुरैना जिले में लगभग 50 हजार बोर हैं। यहां तीन साल में ही तकरीबन ११ हजार बोरिंग खनन हुए। भूजल स्तर तकरीबन चार मीटर प्रति वर्ष गिर रहा है।
उज्जैन जिले में सरकारी और निजी बोरिंग की संख्या 45 हजार से ऊपर पहुंच गई है। घर के आंगन से लेकर कॉलोनियों के चौराहों, गलियों और खेत तक सभी जगह टच्यूबवेल और हैंडपंप दिखाई दे रहे हैं। इससे जमीन में जल का भंडारण खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। हालत यह है कि उज्जैन जिले में ही कई स्थानों पर 500 फीट की गहराई तक भी पानी नहीं मिल रहा है।
सागर जिले में निजी और सरकारी मिलाकर लगभग डेढ़ लाख हैंडपंप और बोरिंग हैं। छतरपुर जिले में जलस्तर में लगतार गिरावट देखने को मिल रही है। पेयजल की समस्या से जूझ रहे लोगों ने अंधाधुंध बोरिंग कराई है। 21 हजार बोर पूरे जिले में हैं। वर्ष 2008 में भूजल स्तर 23 मीटर नीचे लतक चला गया था।
मंदसौर जिले में लगभग 15000 से भी ज्यादा बोरवेल हैं। जलस्तर नीचे जाने से 35 फीसदी सूख चुके हैं। भू-जल सर्वेक्षण विभाग शहर के तालाब व बोरिंगों की स्थिति पर चिंता जताकर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने की सलाह देता है। प्रशासन द्वारा गर्मी में जलसंकट को देखते हुए बोरिंग खनन पर प्रतिबंध भी लगाया गया है जिसका आज तक पालन तो नहीं हुआ।
रतलाम जिले में सरकारी और निजी बोरिंग की संख्या मिलाई जाए तो शहर के सीने पर लगभग २५ हजार से भी ज्यादा छेद हैं। भूमिगत जलस्तर अत्यधिक नीचे जाने से इसमें से 35 फीसदी सूख चुके हैं। जिले में भूमिगत जलस्तर तेजी से गिरता जा रहा है। सात माह में जलस्तर में 6.03 मीटर की गिरावट आई है।
10 साल पहले 100 फीट अब 400
दस साल पहले 2000-01 में स्थित यह थी कि बोरिंग खनन करने पर 90 से 100 फीट पर ही पानी निकल जाता था जबकि वर्तमान स्थित में पानी के लिए 400 फीट से ज्यादा नीचे तक बोरिंग करना पड़ रहा है। इसमें भी शहर के कुछ बाहरी क्षेत्रों में 500 फीट तक पानी निकल रहा है। हालात यह हैं कि कई जगह ६क्क् फीट पर भी पानी नहीं निकलने से इससे भी ज्यादा गहराई तक खनन शुरू हो गया है। जावद विकासखंड के कुछ क्षेत्रों जैसे सिंगोली एवं डिकेन सहित कई गांवों में ६क्क् फीट की खुदाई पर भी पानी नहीं आ रहा है।
एक उदाहरण
शिवपुरी शहर में पिछले हफ्ते हुए बोर खनन में 800 फीट पर भी पानी की एक बूंद नहीं मिली। वहीं 18 मई को वार्ड नंबर 28 में 925 फीट गहराई पर भी एक बूंद पानी नहीं मिला। इसी प्रकार शिवपुरी के वार्ड नंबर 4 में मंडी कॉम्प्लेक्स
के पास कराए गए बोर में
900 फीट की गहराई पर
भी पानी नहीं निकला।

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Petition created on 16 May 2010