Dr. Ambedkar सम्पूर्ण वाङ्मय को University के UG & PG उपाधि में सम्मिलित किया जाये

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एक व्यक्ति जिस धर्म का वह अनुसरण और अनुपालन कर रहा है, लेकिन अन्य किसी धर्म को वह मान्यता नहीं देता या उसका अनुसरण नहीं करता, तब क्या उसके साथ अनहोनी होती है। सोचने की बात है कि जैसे कोई मूर्ति पूजा करता, लेकिन वह निरकार को नहीं मानता, तब क्या उसके साथ अनहोनी हो रही है। कोई मूर्ति पूजा नहीं कर रहा वह निरकार ईश्वर की आराधना कर रहा है, तब क्या उसे साथ अनहोनी हो रही है। तीसरा एक नास्तिक हैं जो किसी भगवान को नहीं मान रहे, तब क्या उनके साथ भी कोई भगवान अनहोनी करवा रहा है, बिलकुल नहीं। पर क्या बिडम्बना है एक भगवान को खुश करने के लिए, लोग दूसरे भगवान की आराधना करने वाले को मार रहें हैं, उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके भगवान खुश होंगे। जब नमाज पढ़ने वाले लोग, मूर्ति पूजा नहीं करते, तब क्या उनके साथ कोई भगवान अनहोनी नहीं करवाता है। जब मूर्ति पूजा करने वाले, नमाज को नहीं मानते, आराधना पद्धित को नहीं मानते, तब क्या कोई भगवान उनके साथ भी अनहोनी करवाता है। निष्कर्ष यहाँ व्यक्ति की अपनी आत्मसंतुष्टि ज्यादा महत्व रखती है। इसलिए डॉ अम्बेडकर भगवान से पहले मानव को मानवता के दायरे में रहने की प्रेरणा देते हैं ।

‘डॉ. अम्बेडकर के चिन्तन को वाद कहना इसलिए सटीक व सार्थक है कि यह दर्शन व्यक्ति तके रूप में उनकी वैचारिक अवधारणाओं का एकीकृत ढांचा ही न होकर भारतीय सन्दर्भ में उस महान चेतना का निचोड़ है जिसे हम भौतिकवादी दर्शन परम्परा कहते हैं और जिसके केन्द्र में सदैव मनुष्य रहा है। यह दर्शन परम्परा चार्वाक-लोकायत, बुद्ध, नाथ-सिद्ध एवं भक्तिकालीन संत-सूफियों के महान अवदान को आधुनिक काल से जोड़ती है। लोहियावादी समाजवाद, गांधीवाद मानवतावाद एवं वर्गविहीन-शोषणविहीन समाज का स्पप्न देखने वाले मार्क्सवाद की जड़ें प्रत्यक्ष व पराक्ष रूप से इस भारतीय दर्शन परम्परा से जुड़ी हुई हैं, फिर भी अम्बेडकरवाद इन तीनों विचारधारों से स्वयं को पृथक रखता है। इसकी मूल वजह यह है कि लोहिया, गांधी एवं भारतीय मार्क्सवादी कहीं-न-कहीं अंततः सवर्ण मानसिकता के प्रभाव में दिखाई देते हैं।’ 1 हरिराम मीणा, युद्धरत आम आदमी, पृ.-56, अप्रैल-जून 2003,

डॉ. अम्बेडकरवाद तर्क पर आधारित है, जो समानता एवं समता की बात करता है। मानव सभ्यता को सुचारू रूप से और सही दिशा में चलने के लिए जरुरत है डॉ. अम्बेडकर को छात्र पूरा पढ़े.   

 



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