Regarding change in UGC Regulation 2018.

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1. DRAFT UGC REGULATIONS ON MINIMUM QUALIFICATIONS FOR APPOINTMENT OF TEACHERS AND OTHER ACADEMIC STAFF IN UNIVERSITIES AND COLLEGES AND MEASURES FOR THE MAINTENANCE OF STANDARDS IN HIGHER EDUCATION 2018 का बिन्दु 3.0 जिसका शीर्षक `भर्त्ती और योग्यता’ है; इसके सन्दर्भ में हमारी मांग है कि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर सीधी भर्त्ती के लिए; स्नातकोत्तर परीक्षा और NET/SLET/SET परीक्षा के अलावा अभ्यर्थी से पीएचडी या अन्य किसी दूसरी योग्यता की अपेक्षा न की जाए|

2. ड्राफ्ट का बिन्दु 3.8 असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर नियुक्ति के लिए; दिनांक 01. 07. 2021 और इसके बाद होने वाली नियुक्तियों के लिए पीएचडी की डिग्री को अनिवार्य बनाने की बात करता है|
इस बिन्दु पर हमारा कड़ा एतराज है; क्योंकि इससे आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तबके के विद्यार्थियों के ऊपर पीएचडी की डिग्री हासिल करने में लगने वाले वक्त और आर्थिक व्यय का बोझ बढ़ जाएगा| यदि पीएचडी की डिग्री वाला यह प्रावधान अमल में आया तो इससे सामाजिक रूप से कमजोर तबके के लोगों का असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर पहुंच पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा|
3. ड्राफ्ट का बिन्दु 4.0 जिसका शीर्षक `सीधी भर्त्ती’ है| इसके तहत बिन्दु B में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर भर्त्ती के लिए; शीर्ष 500 रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों/संस्थानों से पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को NET/SLET/SET की अर्हता से मुक्त रखा गया है|
हम बिन्दु B को पूरी तरह से ख़त्म करके NET/SLET/SET की अर्हता को हर हाल अनिवार्य बनाये रखने की मांग करते हैं| अब तक का अनुभव बताता है कि रैंकिंग प्रणाली के मानक कत्तई भरोसे काबिल नहीं हैं| रैंकिंग का कारोबार शिक्षा के क्षेत्र में न सिर्फ देशी-विदेशी कारपोरेट एजेंसियों के अनावश्यक हस्तक्षेप को बढ़ावा देता है, बल्कि रैंकिंग प्रणाली की आड़ लेकर देश के बहुसंख्यक शिक्षा संस्थानों की उपेक्षा की कीमत पर मुट्ठी भर अभिजात्य शिक्षा संस्थानों को फलते-फूलने का अवसर मुहैया कराया जाता है| रैंकिंग प्रणाली; शिक्षा के बाजारीकरण और निजीकरण का वाहक बनती जा रही है|
यदि बिन्दु B को लागू किया गया तो असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर भर्त्ती के इच्छुक बहुसंख्यक अभ्यर्थियों की आबादी के उपर; मुट्ठी भर अभिजात्य शिक्षा संस्थानों के अभ्यर्थियों को अपने आप वरीयता मिल जाएगी जो कि न्याय भावना के विरुद्ध होगा। 



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