ट्विटर द्वारा जातिवाद भेदभाव के खिलाफ

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प्रिय मित्रों नमस्कार!

मैं दिनेश पुरोहित आप सभी को ट्विटर इण्डिया के जातिवादी चेहरे से अवगत कराना चाहता हूँ। ट्विटर इण्डिया के मैनेजिंग डॉयरेक्टर मनीष माहेश्वरी जी ने जब से ये जिम्मेदारी संभाली है तब से ट्विटर इण्डिया का दलित ,पिछड़ों ,आदिवासी ,मुसलमानों के प्रति व्यबहार बहुत ही ज्यादा खराब हुआ है। समतामूलक विचारों को रखने सामाजिक न्याय व बराबरी की बात करने व शोषण के खिलाफ मुखर आवाज उठाने बाले बहुजनों की आवाज को ट्विटर इण्डिया ने मजबूती से दबाने का काम किया है। आवाज उठाने बाले दिलीप मण्डल, हंसराज मीणा, प्रो.रत्न लाल, संजय हेगड़े जैसे तमाम एक्टविस्ट के ट्विटर खातों को सस्पेंड करने का काम किया है। हालाँकि बाद में विरोध बढता देख अकाउंट रिस्टोर किया। इसी तरह बहुजनों को ब्लू टिक देने में भी ट्विटर इण्डिया भेदभाव करता है कई ऐसे अपर कास्ट के व्यक्तियों को ब्लू टिक दिया गया जो सामाजिक माहौल बिगाड़ने, समाज बिशेष को गाली देने का काम करते हैं। अजीब तो ये है कि उनमें से ज्यादतर वो लोग हैं जिनके 1k, 2k या 5k फ़ॉलोअर्स ही हैं व जिनको जमीन पर कोई नहीं जानता है। मै पिछले 5 साल से कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ हूँ और कई प्रकार की जवाबदारी पूर्वक कांग्रेस पार्टी के पदों पर काम करता हूँ, कई कांग्रेस पार्टी के बड़े बड़े नेताओं द्वारा मुझे फोलो भी किया हुआ है एवं मैं पार्टी की जमीनी मजबूतीी केे लिए लड़ रहा हूँ पिछले 2 साल में 5 वार अपना खाता @Imdineshpurohit को सत्यापित करने के लिए आवेदन कर चुका हूँ फिर भी मुझे सत्यापित नहीं किया। मैं संगठन मंत्री - गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी, को-इंचार्ज एवं को-ओर्डिनेटर, सुरत शहर कांग्रेस सोसिअल मीडिया डिपार्टमेंट एवं सुरत शहर कांग्रेस आईटी सेल मे जनरल सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हूँ। मेरे 78k से अधिक फ़ॉलोअर्स है। हालाँकि ट्विटर इण्डिया ने विरोध बढता देख प्रो.दिलीप मण्डल, चन्द्र शेखर आजाद ,कुश अम्बेडकरवादी व हँसराज मीणा का ही अकाउंट ब्लू टिक किया है। जबकि हमारी माँग 500 गैर राजनीतिक दलित पिछडो आदिवासी मुसलमानों के खाते ब्लू टिक करने की थी ताकि हम भी इस प्लेटफार्म के जरिये अपनी आवाज उठा सकें। तो क्या ट्विटर को मेरा खाता व अन्य साथियों का खाता सत्यापित कर ब्लू टिक नहीं देना चाहिए? क्या ये ट्विटर इण्डिया का जातीय भेदभाव नहीं है? या फिर ट्विटर इंडिया चाहता है कि बहुजन उसके कार्यालय पर आकर प्रदर्शन करें?