‘दी लल्लनटॉप’, पत्रकारिता के नाम पर अश्लीलता परोसना बंद करें!

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  • 'छोटा लिंग, निराश क्यों? हिटलर का भी छोटा था'
  • 'चुड़ैलें, जो पुरुषों के लिंग चुरातीं, फिर लिंगों को पालतू बना लेती थीं!'
  • ‘ये लड़का बता रहा है लिंग के साथ पैदा होने के फायदे’
  • ‘लड़िकयां अपनी टाँग केवल सेक्स के लिए नहीं खोलतीं’
  • ‘होली आ गई, भीगी लड़िकयों की 'हॉट तस्वीर' नहीं देखोगे?’
  • ‘सोती हुई महिला की छाती दबाई, जांघ पर हाथ फैरा और…’
  • 'आदमी से बदला लेना हो तो उसकी बहन का रेप कर दो'
  • ‘आलिया भट्ट ने अपनी फेवरेट सेक्स पोज़िशन बताई तो....’
  • ‘...गुप्तांग गोंद से चिपकाने की ख़बर झूठी है’
  • ‘दुकानदार ने बच्ची की छाती को निर्ममता से निचोड़ दिया’
  • ‘इिंडया-पाक मैच के पहले भारत माता का लिंग परिवर्तन…’
  • ‘औरत भी औरतों का रेप करती हैं, ये काननून अपराध नहीं होता’
  • ‘...जिन्होंने बूढी औरत की वेजाइना में बोतल ठूंस दी’
  • ‘अक्षय कुमार शूटिंग कर रहे थे और एक्ट्रेस को पीरियड हो गया’
  • ‘बच्चे ने माँ की तस्वीर बनाई, प्राइवेट पार्ट पर लाल निशान देखकर स्तब्ध रह गई’
  • ‘ये मशहूर एक्टर कौन है जिसने ढाई घंटे तक एक्ट्रेस का रेप करवा के वीडियो बनवाया’
  • ‘...बच्चे को स्तनपान कराना सेक्सी है... ’
  • ‘वीर्य का त्यौहार ख़त्म, अब भीगी हुई लड़िकयों की तस्वीर देखें’
  • ‘शराब खरीदकर निकली लड़कियों को दबोचा, पूछा कितना लेती है’
  • ‘हमें इस नए तरह के पोर्न की बेहद ज़रूरत है’

यकीं नहीं होगा लेकिन उपरोक्त शीर्षक देश के नामचीन 'इंडिया टुडे ग्रुप' की वेबसाइट 'दी लल्लनटॉप' से हैं. यहाँ मैंने नमूने के तौर पर केवल कुछ ही शीर्षक प्रस्तुत किये हैं लेकिन मैं यह कहते हुए गुरेज़ नहीं करता कि यही ‘दी लल्लनटॉप’ की पत्रकारिता का तरीका है जिसमे वेबसाइट के सरपंचो को सेक्सफोबिया की बीमारी है.

साफ़ समझा जा सकता है कि ये कोई पत्रकारिता नहीं हो रही! पत्रकारिता की आड़ में लिखित-पोर्न परोसा जा रहा है. लल्लनटॉप वालों को ऐसी भ्रान्ति हो गई है कि वे पत्रकारिता से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं. उनके संपादक अपनी तमाम सीमा लाँघ रहे हैं.

शुरु-शुरु में ‘दी लल्लनटॉप’ वालों ने पत्रकारिता के तरीकों, भाषा एवं शैली को बदलने की बातें कहीं थी लेकिन पत्रकारिता को मस्त करने की बजाय आज खुद ही ‘मस्तराम’ हो गए हैं!

मैं इस याचिका के ज़रिये सभी से अनुरोध करता हूँ कि लल्लनटॉप की इस ‘बलात्कारी पत्रकारिता’ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई जाए क्योंकि इससे पत्रकारिता जगत का ही नुकसान हो रहा है और आने वाले समय में ये हमारे समाज के लिए ख़तरनाक हो सकता है!

मैं ‘दी लल्लनटॉप’ के पाठकों, इंटरव्यू देने वाले सेलेब्रिटीज़ एवं नेताओं से निवेदन करूँगा कि वेबसाइट का तब तक बॉयकट किया जाए जब तक कि अश्लील सामग्री को वेबसाइट से हटा नहीं लिया जाता एवं भविष्य में ऐसा नहीं करने हेतु जनता को सुनिश्चित नहीं किया जाता!

मैं 'इंडिया टुडे ग्रुप' के कर्ता-धर्ताओं, 'प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया' एवं सरकार से भी अनुरोध करूँगा कि वे इस विषय को संज्ञान में लें एवं उचित क़दम उठायें!

इस विषय पर आप अपने विचार मुझसे यहाँ शेयर कर सकते हैं - https://twitter.com/AbhishekSinhRao