Reservation on "Economic Basis" Inspite of "Caste Basis"

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आज देश में प्रतिभाओं का हनन हो रहा है क्यूंकि नौकरी से लेकर शिक्षा की हर प्रणाली में जातिगत आधार पर चयन ही रहा है जिससे जो जातियां आरक्षण की श्रेणी में नहीं आती है वो जातियां भेदभाव का शिकार हो रही है उनके साथ आजाद भारत में भी न्याय नहीं हो रहा है एक तरफ जहां सामान्य जाति (गैर आरक्षित) का बच्चा 90% अंक लाकर भी नौकरी से वंचित रहा रहा है वहीं आरक्षित जातियों में बच्चे 30-40% में भी प्रवेश प्राप्त कर नौकरी हासिल कर रहे है इस तरह जातिगत आधार पर इतना बड़ा भेदभाव कर देश के साथ व सामान्य जाति के लोगो के साथ धोखा हो रहा है कहीं कहीं तो -10% वाले अंक पर भी नौकरी दी गई है ये सरासर गलत है संविधान कभी इसकी इजाजत नहीं देता, अगर आजादी के समय किसी वर्ग विशेष को ऊपर लाने के लिए ऐसे कोई नियम रखे होंगे तो अब ऐसे कानून में बदलाव की जरूरत है क्यूंकि आज भारत विश्व के मुख्य देशों के सामने अपनी मुखरता दिखा रहा है वहीं इस तरह के कानून देश के विकास की कल्पना में अवरोधक है

संविधान के रचयिता डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर ने अपने स्वागत भाषण में कहा था कि जिस दिन देश का प्रथम नागरिक (श्री राष्ट्रपति जी) व द्वितीय नागरिक (श्री प्रधानमंत्री जी) आरक्षित श्रेणी से होंगे उस दिन भारत देश को विकासशील मानते हुए आरक्षण को हटा देना है तथा 1950 के बाद हर दस साल बाद इस कानून की समीक्षा करनी है तथा जहां बदलाव लगे वहां बदलाव करना है परन्तु पिछले सत्तर सालो में राजनीतिक पार्टियां ना तो बदलाव कर पाई है और ना ही इस पर कोई चर्चा कर पाई है क्यूंकि सभी अपनी वोटबैंक को बचाने के लिए कटिबद्ध है.

अब समय सबको कंधे से कंधा मिलाकर चलने का है योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का है तो बिना जातिगत भेदभाव के आरक्षण को जातिगत के आधार की बजाय आर्थिक आधार पर कर देना चाहिए जिससे पूरे भारत की प्रतिभाओं के साथ न्याय हो तथा देश विकास की पटरी पर तेज गति से दौड़े.

ये पिटीशन आरक्षण को जाति आधार की बजाय भारतीय नागरिक के आर्थिक आधार पर तय हो ताकि जरूरतमंद को सहायता मिल सके.



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