Regarding MCD Toll Tax

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DELHI MCD टोल जो अरबों का करप्शन करने क लिए है शायद। दिल्ली की टैक्सी व दिल्ली के अन्य वाहन दिल्ली में एंट्री करने पर प्रति चक्कर ₹100 देते हैं और कुछ वाहन तो बहुत ज्यादा देते हैं और दूसरे राज्यों की गाड़ी का तो बस पूछो मत उन बेचारो को तो बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है उनके लिए भी 24 घंटे का एक बार होना चाहिए।� क्योंकि यह रोड का टोल नहीं है जो प्रति चक्कर देना पड़े, यह तो एक डिपार्टमेंट है MCD, किसी भी राज्य का टैक्स प्रति चक्कर नहीं दिया जाता दिन में केवल एक बार दिया जाता है और यह तो टैक्स भी नहीं है यह तो भ्रष्टाचार है
दिल्ली के वाहन से तो बिल्कुल भी नहीं लगना चाहिए जो वाहन खरीदते वक्त पहले ही दे दिया जाता है और प्रतिवर्ष भी जमा करते हैं दिल्ली के वहान।
� दिल्ली में अभी लगभग साडे 6 छह लाख वाहन कमर्शियल है।
लगभग दिल्ली के 5 लाख वाहन रोज दिल्ली से बाहर जाते हैं ओर दिल्ली में एंट्री करते हैं और दिल्ली में एंट्री करने के प्रति चक्कर 100 रुपए देने पड़ते हैं, CNG की टैक्सी को तो दिन में कम से कम 8- 10 बार रुपए देने पड़ते हैं।
� अब MCD टोल की दिल्ली के वहान से कमाई देखते।
5 लाख वहान � डेली अप डाउन करते इसलिए 5 लाख को ₹100 से गुणा करते हैं।
�5 लाख ×100= 5 करोड प्रतिदिन की कमाई
अब 30 दिन से करते हैं
30 दिन × 5 करोड = 150 करोड, मतलब 1 अरब 50 करोड हर महीने की कमाई �
अब 12 महीने से करते हैं
12 महीने × 150 करोड = 1800 करोड, मतलब 18 अरब की हर साल कमाई तो मात्र दिल्ली के वहान �� हो जाती है ���

अब अन्य राज्यों के वाहनों से होने वाली कमाई की बात करते हैं।

दिल्ली एनसीआर में चलने वाली लगभग 4 लाख टैक्सी डेली अप डाउन करती है। इस हिसाब से इनके 4 करोड़ डेली के।
अब ट्रक �
डेली 80 हजार ट्रक � डेली दिल्ली से होकर गुजरते हैं।
मैं अभी ग्रीन टैक्स की बात नहीं कर रहा उसका तो करोड़ों में हिसाब बैठ जाएगा।
किसी ट्रक से ₹300 टोल है किसी से ₹700 टोल है किसी से 1200 सो रुपए टोल है किसी से 1800 टोल ओर अधिक भी है और जो वाहन माल से भरे हुए होते हैं उनसे तो बहुत अधिक है।
लेकिन अभी सबसे कम मान लेते हैं। ₹800 से 8 हजार को गुणा कर देते हैं यह सब से कब आ आंकड़ा है बिल्कुल कम
80 हजार ट्रक � ×800 = 6 करोड 40 लाख रोज की लगभग।
अब बात करते हैं वहान की।
जैसे कि 3 पहिया के छोटे टेंपो, टेंपो ट्रैवलर, पिकअप महिंद्रा, छोटा हाथी, व अन्य वहान।
इन सब के बीच सबसे कम अगर माल लिया जाए तो दिल्ली के 50 लाख लगा लो यह आंकड़ा सबसे कम है

अब अन्य राज्यों वाले वाहनों की महीने की और साल की जोड़ते हैं क्योंकि ऊपर रोज की जोड़ी है।
4 करोड NCR� टेक्सी से होने वाली कमाई ×30 दिन =120 करोड।
अब ट्रक � 6 करोड 40 लाख ×30 = 192 करोड �

अब साल का 1200 करोड टेक्सी का ओर लगभग 1900 करोड ट्रक का
अब इन टोटल करने पर 1200+1900= 3100 करोड।
मतलब 31 अरब।
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अब दिल्ली के वाहनों को और अन्य वाहनों का टोटल।

अन्य राज्यों के वाहनों से 31 अरब + दिल्ली के वाहनों से 18 अरब =49 अरब ����� प्रत्येक वर्ष की कमाई।

MCD टोल की कमाई।
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पुरा भारत शिमला बन जाये इतने पडे लगाये जाते प्रत्येक वर्ष। ओर भी साल में पता नहीं क्या क्या हो जाये। इतने पैसो में तो

जोड़ने में हमारे गलती हो सकती है लेकिन फिर भी करप्शन तो है हम किसी पर उंगली नहीं उठाना चाहते।
अब यह सही है या गलत इसका तो तभी पता चल सकता है जब भ्रष्टाचार ना हो और भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बारकोड अनिवार्य होना चाहिए प्रत्येक टोल की पर्ची पर तभी पता चलेगा की दिल्ली से दिल्ली कितने वाहन गुजरते हैं नहीं तो भ्रष्टाचार करने वाले तो कम ही आंकड़ा दिखायेगे।
दिल्ली के चारों तरफ गुंडे खड़े रहते हैं लाठी डंडे लेकर शायद ही किसी की पुलिस वेरीफिकेशन हो

किसी भी टोल पर बोर्ड नहीं लगा कि किस वाहन से कितने रुपए लिए जाएगे और वह कितनी देर के लिए वैलिड रहेगे।
बढ़ा बोर्ड होना चाहिए जो कम से कम 50 मीटर की दूरी से दिख जाए लेकिन नहीं लगा

नाही टोल पर किसी भी कर्मचारी के पास एमसीडी द्वारा दिया गया कार्ड है।

हमें नहीं लगता कि किसी व्यक्ति की वहा पर पुलिस वेरिफिकेशन भी होती हो जो वहां पर कर्मचारी खड़े रहते हैं।

ना किसी के पास वर्दी है, ना कार्ड है, ना वहान का पुरा नम्बर है, ना बारकोड है पर्ची पर, यह कैसा भ्रष्टाचार है

प्रधानमंत्री भारत के प्रत्येक सांसद दिल्ली आता है प्रत्येक विधायक दिल्ली आता है और दिल्ली में रहते भी है निगम पार्षद दिल्ली में रहते हैं और आते भी हैं भारत में प्रत्येक राज्य से चेयरमैन दिल्ली में आते हैं और कुछ रहते भी है डीएम एसडीएम दिल्ली में सभी राज्यों से कभी ना कभी तो आती ही है और खुद दिल्ली के इतने बड़े बड़े अधिकारी और इतने बड़े बड़े लोग दिल्ली में रहते हैं

लेकिन भारत की राजधानी दिल्ली में इस कदर कोराम है कि यह सब नहीं दिखता उनको।
जब यह इतना ही जरूरी है तो सरकारी कर्मचारियों को बैठाना चाहिए इसको ऑनलाइन कर देना चाहिए ताकि यह पता चले की कितनी कमाई है कम से कम भारत सरकार के खाते में तो पैसा जमा हो।

देश का कुछ तो भला हो जिस दिन से MCD टोल लगा है हमे तो दिल्ली एक भी पेड़ नया नहीं लगा हुआ दिखा नहीं से इतने पैसे में तो दिल्ली हरी भरी हो जाती। और भी पता नहीं क्या क्या हो जाता जोड़ने में हमारे रुपए गलती हो सकती है लेकिन इतनी भी गलती नहीं की बहुत ज्यादा कम हो जाए।

और दिल्ली में एंट्री करने का किस बात का टोल है यह रोड का टोल नहीं है एक डिपार्टमेंट का टोल है और वह भी प्रति चक्कर देना पड़ता है और दिल्ली के वहान जो दिल्ली में प्रत्येक वर्ष टैक्स देते वाहन खरीदते वक्त MCD देते और बाहर राज्य के वाहन जो प्रति चक्कर वह भी देते हैं।

दूसरे राज्यों में एक बार टैक्स दिया जाता है और फिर दिन भर की एंट्री फ्री होती है।

और अगर यह MCD टोल इतना ही जरूरी है तो जो प्राइवेट गाड़ी है उनसे यह क्यों नहीं लिया जाता उनसे भी लेना चाहिए लेकिन नहीं लेते क्योंकि वोट खराब हो जाएगी आवाज उठेगी

जिस वाहन से किसी व्यक्ति को रोजगार मिलता है वह कमर्शियल वाहन है एक ड्राइवर का पेट भरा जाता है उसके परिवार का पेट भरा जाता है उसी को सरकार लूटती है राज्य सरकार इन ही को लुटती है उसी पर सारी दुनिया के टैक्स उसी की वजह से यात्रियों को इधर से उधर जाना होता है

लोगों को यात्रा महंगी पड़ती है

हम यह नहीं कहते कि टैक्स और टोल नहीं होना चाहिए होना चाहिए लेकिन वह पैसा सरकार के खाते में भी जाना तो चाहिए

हम किसी पर कोई उंगली नहीं उठा रहे और ना ही हमारी मंशा है हमें किसी ने समझाया तो हम मात्र अपनी बात रख रहे हैं।

बस लास्ट में हम एक ही बात कहेंगे कि अगर यह इतना जरूरी है तो isko ऑनलाइन कर दिया जाए ताकि सरकार के खाते में पैसा जाए हर पर्ची पर बारकोड होना चाहिए वहान का पूरा नंबर लिखा जाए