ARM - Anti Reservation Movement, Initiated by NASH (National Alliance for Social Harmony)

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आरक्षण विरोधी आंदोलन Anti Reservation Movement (ARM) द्वारा पिछले एक दशक से आरक्षण हटाओ की मांग लगातार की रही है । समय - समय पर अनेक धरने प्रदर्शन कर भारत सरकार को अवगत किया गया कि मौजूदा जातिगत आरक्षण किस तरह देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा है आरक्षण की वजह से योग्य छात्र अपनी पढाई पुरी कर विदेशों में पलायन कर अपना भविष्य बना रहे है जिससे देश का आर्थिक विकास अवरुद्ध हो रहा है | विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनिरिंग और प्रद्योगिकी विज्ञान के छात्र अपने देश को छोड़ विदेशों में बस रहे है | मौजूदा आरक्षण की व्यवस्था के कारण आज का युवा वर्ग अपना भविष्य भारत में असुरक्षित महसुस कर रहा है और सभी वर्गों के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजागार हतोत्साहित हैं। इस व्यवस्था से समाज एक अनावश्यक भेद भाव की तरफ बढ़ता जा रहा है, जिससे जातिओं में विद्वेष फ़ैल रहा है जो देश की प्रगति में बाधक है और भविष्य में गृह युद्ध की सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता ।

जैसा कि विदित है आज़ादी के बाद समाज के दलित वर्ग के लिये संविधान में मात्र दस वर्षों के लिये आरक्षण की व्यवस्था की गयी थी, फिर नब्बे के दशक में अन्य पिछड़े वर्ग के लिए भी आरक्षण किया गया । किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि को बार बार बिना किसी समीक्षा के बढाया जाता रहा है | आज तक ऐसे किसी आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, शिक्षक, कर्मचारी ने नहीं कहा कि अब वह शोषित या पिछड़े नहीं रहे और उन्हें अब इस जातिगत आरक्षण की आवश्यकता नहीं है । समृद्ध और शिक्षित कथित दलित नेता भी आरक्षित क्षेत्रों से चुनाव लड़कर संसद में पहुँचते है जबकि उनको किसी भी प्रकार के आरक्षण की आवश्यकता नहीं है । इस जातिगत आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं |

देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिओं ने भी समय समय पर आरक्षण के मौजूदा स्वरुप पर चिंता व्यक्त की है कई राज्यों जिसमे मुख्यतया राजस्थान और तमिलनाडु शामिल है ने आरक्षण को 49.5 % से भी आगे बढ़कर 87% तक कर दिया है । जिसमे आरक्षण का आधार आर्थिक भी रखा गया गया जो की सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भी खुल्लम खुल्ला अवमानना है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख माननीय मोहन भागवत भी आरक्षण पर समीक्षा होनी चाहिए के पक्ष धर है ।

आरक्षण जब तक ख़त्म नहीं हो जाता यह लड़ाई जारी रहेगी और आने वाले समय में इसका  समग्र भारत में दिखाई देगा | जिस प्रकार बिहार में अनआरक्षित लोगो द्वारा चुनाव का बहिष्कार किया और नोटा को अपना विकल्प बनाया । देश की एकता, अखंडता और समानता के लिए आपका सहयोग आपेक्षित है । धन्यवाद |

तजेंद्र पंवार 

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