Review the Population or Birth Control Acts in view of Natural Human Parthenogenesis Cases

Review the Population or Birth Control Acts in view of Natural Human Parthenogenesis Cases

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Ashutosh Arora started this petition to Supreme Court India and

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संम्पूर्ण नारी स्वतन्त्रता

डीएनए फिंगर प्रिंटिंग एक विश्वव्यापक सर्वमान्य फोरेंसिक पितृत्व निर्धारण जांच प्रक्रिया है जिसके आधार पर अपराधियों/व्यक्तियों की विधिक पहचान और किसी माता-पिता के बच्चे की वैधता (legitimacy) का निर्धारण पितृत्व-जांच (paternity test) के माध्यम से किया जाता है, जिसके आधार पर विधिक न्यायालय किसी को आपराधिक मामले में सज़ा देने तथा किसी दंपत्ति के संबंध विच्छेद्द / तलाक/ या बच्चे की नागरिकता निर्धारण हेतु पर्याप्त साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाता रहा है। यह माना जाता रहा है कि जुड़वां बच्चों में कतिपय विशेषतः मोनोज़ाइगोटिक ट्विन्स (monozygotic twins) को छोडकर अन्य परिस्थितियों में डीएनए असमान ही होते हैं, अतः डीएनए फिंगर प्रिंटिंग किसी भी व्यक्ति कि पहचान का एक विश्वासयोग्य भरोसेमंद टेस्ट है।

2002 में डेविड प्राट (David Pratt) द्वारा अलैंगिक प्रजनन (virginal reproduction/asexual birth) की संभावनाओं का ज़िक्र किया गया था, तदापि 2005 तक यही माना जाता रहा था कि स्तनपायी प्राणियों जैसे कि मनुष्यों में अलैंगिक प्रजनन (virginal reproduction/asexual birth), जिसे पार्थेनोजिनेसिस (parthenogenesis) की संज्ञा दी गयी है, की संभावना शून्य है परंतु टिटबिट (Titbit) हैमर हैड शार्क (hammer head shark) के मामले द्वारा 2005-2008 के बीच हुये गहन अनुसंधान से यह स्पष्ट होता चला गया कि पार्थेनोजिनेसिस स्तनपायी प्राणियों जैसे कि मनुष्यों में भी हो सकता है, तदापि पार्थेनोट स्टेम सेल्स (human parthenote stem cells HPSCs) का एक नया अध्याय मानव भ्रूण निर्माण प्रक्रिया एम्ब्रियोलोज़ी (embryology) के क्षेत्र में शुरू हो गया और प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनन (natural human parthenogenesis-NHP) की संभावनाओं को तलाशने का कार्य शुरू हो गया क्योंकि प्रयोगशालाओं में कई प्रकार से मानव भ्रूण को पार्थेनोजिनेसिस/ अलैंगिक प्रजनन प्रक्रिया से तैयार करनें की विधियां निरूपित की जा चुकीं हैं।

अब प्रश्न यह उठता है कि मानव समुदायों में प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनन (एनएचपी-NHP) हो रहा है या नहीं ? क्योंकि अब इसके होने की संभावनाओं से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। यदि यह मान भी लें कि मानव समुदायों में प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनित अर्थात पार्थेनोजिनेटिक हैं तो अवश्य ही ऐसे बच्चों के डीएनए केवल और केवल उनकी माताओं अथवा उनके जुड़वां भाई-बहिनों से शत-प्रतिशत मेल खाएँगे और उनके पिता का अंश उनके डीएनए में शून्य ही होगा। अति-संभावित यह भी है कि ऐसे दंपत्तियों के बीच संतान(नों) की वैधता को भी पितृत्व-जांच चुनौती हो जाने के कारण संबंध विच्छेद्द / तलाक या बच्चे की नागरिकता निर्धारण हेतु कोई विधिक प्रक्रिया भी हो गयी हो, जिससे उस संतान / उन संतानों और उसकी / उनकी माता(ओं) के साथ घोर अन्य हो गया हो क्योंकि डीएनए टेस्ट के पितृत्व-जांच की प्रक्रिया में दुनिया की किसी भी डीएनए लैब में अभी तक उस वैधता-विवादित बच्चे के पार्थेनोजिनेटिक होने अथवा नहीं होने के लिए किसी भी प्रकार का टेस्ट नही किया जाता है, ऐसा निर्धारण करने वाला कोई प्रोटोकॉल डीएनए टेस्ट में अभी तक बना ही नहीं है!!

यह भी अति-संभावित है कि समान डीएनए होने कि अवस्था में किसी निरपराधी कि डीएनए जांच-प्रमाण साक्ष्य के आधार पर कोई सज़ा हो चुकी हो, जबकि वास्तविक अपराधी कोई अन्य जुड़वां / माता / संतान व्यक्ति हो जिसने वो अपराध कारित किया हो, या कोई इन्श्योरेंस/बीमा दावा लिया जा चुका हो आदि-इत्यादि !!!

अतः अब समय कि मांग है कि मानव समुदायों में प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनन (एनएचपी-NHP) हो रहा है या नहीं जाननें का शोधकार्य क़ानूनन अनिवार्यतः किया जाना चाहिए, जिसके लिए इसके संभावित मामलों में डीएनए जांच प्रक्रिया का सरलीकरण भी किया जाना चाहिए और समस्त मानव समुदायों को मानव समुदायों में प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनन (एनएचपी-NHP) होने की जानकारी प्रदान किया जाये।

क्या है मानव समुदायों में प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनन (एनएचपी-NHP) ?

सामान्यतः किन्ही दो व्यक्तियों के डीएनए फिंगर प्रिंट असमान होते ही हैं, सिवाय उन जुड़वां व्यक्तियों के जो कि मोनोज़ाइगोटिक ट्विन्स (monozygotic twins) हों अन्यथा सिर्फ उन माता और बच्चों के जो पार्थेनोजिनेटिक प्रक्रिया द्वारा माता के अण्ड़े से भ्रूण का विकास बिना किसी पुरूष के शुक्राणु से युग्मित हुए स्वतः निषेचन (self-fertilisation) प्रक्रिया के द्वारा संभव हो जाने पर होता है। Herring, Amy H., Samantha M. Attard, Penny Gordon-Larsen, William H. Joyner, and Carolyn T. Halpern. "Like a virgin (mother): analysis of data from a longitudinal, US population representative sample survey." Bmj 347 (2013): f7102..... ने 2013 में 7870 माताओं, जो कि 15 से 28 वर्ष की आयु की थीं, पर एक शोधकार्य का हवाला देते हुए संभावना बताई है कि 200 माताओं में से एक माता के बच्चे का जन्म पार्थेनोजिनेटिक प्रक्रिया द्वारा होना पाया गया है जिसे वर्ज़िन बर्थ कहा गया है और ब्रिटिश मेड़िकल ज़र्नल में प्रकाशित होना बताया है।

प्रयोगशालाओं में पार्थेनोजिनेटिक प्रक्रिया की अनन्य अभिक्रियाएं और संभावनाएं उजागर की जा चुकी हैं अतः वर्तमान मानव समुदायों में प्राकृतिक / नैसर्गिक मानव अलैंगिक प्रजनित (एनएचपी-NHP) संतति होने की संभावनाओं से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है। यदि इसकी सिद्धि की विधि ज्ञात हो जाये तो नारी जगत की संम्पूर्ण स्वतंत्रता साकार एवं सार्थक हो सकती है।

लेखक: आशुतोष अरोड़ा क्लीनिकल रिसर्चर
Mob: 7987 080 832
(https://www.facebook.com/CRBKAArora/
सह-लेखिका: जसविंदर कौर
स्त्रोत : लेखक का फेसबुक ब्लाॅग :
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1036318003137861&id=1019456898157305

(Single Women Parent Legal Help एकल माता विधिक सहायता)
संदर्भ:
https://drive.google.com/folderview?id=0B4hPIcLfBpAZR28wNzFraVdpNFU
Email: swmplh@gmail.com

Real Women Empowerment

DNA finger printing is a universal forensic parent fixation process, on the basis of which the legal identity of the crimnal/persons and the legitimacy of any alleged child of the couple/parents is determined through maternity or paternity test, on the basis of which the Judiciary convicts someone in any criminal case; and awards divorce to the disputed relationship of a couple; or determines the citizenship of an alleged child. It has been accepted as a sufficient evidence. It has been believed that DNA is non-identical in all human beings except in certain cases of twins, especially monozygotic twins, so DNA finger printing is a credible reliable test of any person's identity.

In 2002, David Pratt has mentioned in detail about the possibility of virginal reproduction/asexual birth in human population his book sex and sexuality, which is also termed as Natural Human Parthenogenesis (NHP).

However, up to 2005 , it was believed that in mammals like human beings NHP is not possible. But from 2005-2008 the extensive research work done on Tibit Hammer Head Shark's case, it became clear that NHP is possible in mammals like Hammer Head Shark and so it may also be possible in human population. After this a new era of parthenogenetic Human Stem Cells(pHSCs) in the human embryology and regenerative sciences began with exploring NHP .The tasks of exploring the possibilities of NHP began in laboratories in various ways in various possibilities and arrived to a great success in recent cited literature reviews.

Now the question arises whether natural human parthogenesis/asexual reproduction is happening in human communities, if yes then to what extent or frequency and by what mechanism(s)? Since the possiblilities of NHP can not be denied now. If it is assumed that NHP in human communities is taking place, then the DNA of such child(ren) will only match to the(ir) mother(s) and/or to the(ir) twin(s)/sibling(s) but the(ir) father's genetic/chromosomal share in those child(ren)'s DNA structure determined in paternity test would have been Zero, hence such child(ren) will get paternity challenges issues and the(ir) mother(s) would have met divorce(s) on the charges of "adultry" through a legal process. There is a huge possibility of a big injustice to such child(ren) and the(ir) mother(s) in such a legal process for facing the sepration/divorce due to the alleged child(ren) not getting counter verified of being born through the NHP among such couples.

Because there is no DNA Lab Protocol for the process of paternity testing in the DNA test, where there is a test to counter check also whether the child is born through NHP or not. Hence the present paternity test has a margin to make injustice with NHP born children and their mothers in facing immigration citizenship or divorce.

It is also highly probable that is the case of having the same DNA, some innocent could have been punished on the basis of evidence of DNA test at crime site, where the real culprit is any other twin/mother/child who might have commited the crime, or any such insurance claim could have been settled etc. etc.

So it is the need of hour for having some DNA protocol regarding the research to know whether the human communities are having such natural human parthenogenesis (NHP) or not?
For that we have to improve the process of DNA based paternity testing and also inform and educate the human communities about this natural human parthenogenesis (NHP) i.e. asexual reproduction.

Now the Question is : What is Natural Human Parthenogenesis (NHP) i.e. asexual reproduction in human communities?

Generally, DNA finger print of any two individuals is dissimilar, except for those twins who are monozygotic twins, or otherwise only those mothers and children who developed zygot with their ovum's self-fertilization process without mutation with any male's gamate / spermatozoa.
Referring:
Herring, Amy H., Samantha M. Attard, Penny Gordon-Larsen, William H. Joyner, and Carolyn T. Halpern. "Like a virgin (mother): analysis of data from a longitudinal, US population representative sample survey." Bmj 347 (2013): f7102.
According to a research study done by 2013 on 7870 mothers, aged 15 to 28 years, one mother out of 200 mothers population has been found having given birth to a child through NHP. It is called virgin birth and has been published in British Medical Journal also.

Different procedures and possibilities of NHP have been exposed in various embronic studies Laboratories. So the possibility of NHP cannot be ruled out in the present human communities. If we can prove that NHP is possible in human communities we can achieve the dream of WOMEN EMPOWERMENT in real sense i.e. self-conception of their offspring without any man in life !!!

https://www.bmj.com/content/347/bmj.f7102

यह सभी प्रमाण NON-INVASIVE NATURAL HUMAN PARTHENOGENESIS होने के लिए पर्याप्त और प्रत्यक्ष हैं, अत: जनसंख्या नियंत्रण जेसे मानवीय विषयों से संबंधित विधि-विधान में इसका भी प्रावधान होना चाहिए और सभी डीएनए टेस्ट लैब्स को यह टेस्ट न्यूनतम खर्च पर मुहैय्या कराने का प्रावधान करना चाहिए, Motherless DNA paternity test को समाप्त किया जाना चाहिए और रेप केस जैसे कि :

http://www.patrika.com/bhilai-news/accused-of-rape-is-not-father-of-the-victim-child-disclosed-in-dna-4208503/?utm_source=patrikaCG&utm_medium=socia

 

को फिर से रिव्यु किया जाना चाहिए क्योंकि :

https://www.mirror.co.uk/news/weird-news/overweight-virgin-who-never-boyfriend-14014562

-आशुतोष अरोड़ा

91-7987080832

psycho-gyno clinical medico-legal researcher

 

 

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